शनिवार, 21 जून 2025

जब माँ साथ होती है!!


जाने कहाँ छिप जाती हैउ

उदासी, ख़ामोशी, 

और तन्हाई 

जब माँ साथ होती है !!!

...

सारी मुस्कराहटों को

पता होता है, 

माँ की धड़कनों से

हर कोना हँसता है, 

और दीवारें 

जगमगाती हैं !!!

© सीमा 'सदा'

 

रविवार, 18 मई 2025

माँ,... वो दुआ


माँ ... वो दुआ

जो लबों से पहले

दिल से निकलती है! 

सीमा 'सदा'


 

रविवार, 21 जनवरी 2024

नतमस्तक होगी भक्ति भी!!


 

संकल्प की ड्योढ़ी पर

आज हर आंगन

दीप जलेगा

उत्सव की इस बेला में

नतमस्तक होगी भक्ति भी

विश्वास की शक्ति से

राम आएंगे… जन जन के राम आएंगे!

… 

शुभ और हर संकल्पित मन को 

इस पल की बधाई! बधाई!! 


मंगलवार, 5 सितंबर 2023

नया सबक..

 ज़िंदगी सबसे बड़ी शिक्षक

तो तू ही है, हर दिन.. 

हर पल... एक नया सबक

सिखाती है और credit भी 

नहीं लेती ☺














शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

वक़्त की मुस्कान ...

 वक़्त तो बड़ा ही व्यस्त है

ज़िन्दगी भी अब
इसकी अभ्यस्त है
नित-नई चुनौतियों की
ओढ़कर दुशाला
चलते-चलते
सोचता कोई है ..
जो मन की देहरी को
पार करने से पहले
दस्तक़ देकर,
पूछ ले हाल
मनमर्जियों की लग़ाम
पकड़ ले कसकर !

तुम्हें पता है न
विदा के वक़्त की मुस्कान
मन के हर भार को
हल्का कर देती है
और विश्वास को दुगुना
.. कि जो भी होगा
वो अच्छा ही होगा !!

नववर्ष की अनंत मंगलकामनाएं 🎉🎉
...
© सीमा 'सदा'


सोमवार, 13 सितंबर 2021

मातृ भाषा की उन्नति !!!

 



पर्व है ये

मातृ भाषा की उन्नति का

मन से मन को मिलाती

करती परिक्रमा

अंतर्मन की

सृजित होती,

उर्जित करती कर को

मन की करता चल

रुक मत तू आगे ही आगे

बढ़ता चल !

जाने कितने रंग समेटे 

उत्सव का दिन

लेकर आई हिंदी

उल्लासित हैं

सब मिल-जुल,

स्वर-व्यंजन भी

हुए अलंकृत 

नये-नये प्रतिमानों से,

मन के द्वार 

सजी रंगोली

मंगल कलश 

सजा कर कमलों में

करती हूँ अभिनन्दन तेरा

हिंदी, लगाकर तुझको

रोली चन्दन मैं !!

रविवार, 22 अगस्त 2021

पावन सी दुआ !!!

 स्मृतियां आने से पहले

नहीं देती दस्तक़

वरना मैं आपको आज भी

हँसती हुई मिलती पापा

बना रही हूँ 

मीठी सिवइयां

इनके बिना फीका लगता था

आपको हर त्यौहार 

नेह के बन्धनों में बंधे हम

विस्मृत नहीं होते 

कभी इन स्मृतियों से !

अक्षत से रोली

हँस के बोली 

तुम भी मेरे भाई के माथे पर 

सितारों से चमकते हो

मेरे रतनारी रँग पर

पावन सी दुआ बनते हो

इस विश्वास के साथ कि

मेरे भाई की कोई क्षति नहीं होगी

धागा नेह का

बंध के कलाई पर 

अडिगता से निभाता है वचन

पवित्र रिश्ते का 

सम्मान के संग !!

...




शनिवार, 7 अगस्त 2021

तुम बुरा मत मानना !!!


 










तुम और मैं

अक़्सर अब शब्दों में

मिलने लगे

विचारों में टटोलने लगे हैं

एक-दूसरे को 

अपनेपन की दीवारों पर

कड़वाहटों की दरारें

उभर आईं हैं 

जरूरत है इनको मरम्मत की !

ये जो तुम

सुप्रभात के नाम पर  स्टेटस 

लगा लेते हो न 

इस पर अब कुदृष्टि लग गई है

अर्थ इनके जाने कितनी बार

अनर्थ कर देते हैं,

प्रेम, अनुराग, मित्रता

सबको लुभाने में सक्षम है

पर इन सुविचारों के रूप

अब परिवर्तित हो गए हैं,

हालातों के मारे

अपनों से छले गए लोगों ने

प्रेरक विचारों को

हथियार बना लिया है

तभी तो फ़रेब, धोखे की

तीख़ी मार से 

प्यार भी घायल है

अपनेपन की आँखों में नमी है !!

….

न, तुम बुरा मत मानना

बस कुछ शब्दों की मैंने

आज यूँ ही मरम्मत की है,

कुछ जख्मी शब्दों को

दिलाई है दर्द से निज़ात भी

कुछ हिचकियों को ...

पानी भी पिलाया है

उठक-बैठक करते शब्द

कलम से माँग रहे हैं माफ़ी

कुंठित सोच को

न होने देंगे, खुद पर हावी 

अनुचित न करेंगे न करने देंगे !!!

© सीमा 'सदा'


शनिवार, 31 जुलाई 2021

रूठने और मनाने की तस्वीरें !!


 











एक मुस्कराहट 

आज फिर 

तुम्हारे नाम की 

सजी है मेरे लबों पर

कुछ शैतानियों के

आज फ़िर पकड़े हैं कान,

कुछ बूंदे बरसीं हैं

खामोशी से

तेरी यादों की,

मन ही मन 

बना रही हूँ कोलाज़

रूठने और मनाने की 

तस्वीरें लगाकर ..

इन लम्हों को 

मित्रता दिवस की

मुबारकबाद जो देनी है !!!

...

© सीमा 'सदा'

#मित्रता_दिवस



मंगलवार, 27 जुलाई 2021

रिश्ता मन का !!

 

एक रिश्ता
जिसकी बुनियाद
बस मन ही होता है
उसकी नीव में
भरा होता है
संबंधों का गारा
जिसे बनाया गया होता है
अपनेपन के पानी से
एक निश्चित मात्रा
ना ठोस ना तरल
...
पानी की यही ख़ासियत है
जिसमे मिला दो
उस जैसा हो जाता है
रिश्ता मन का
पानी की पारदर्शिता लिये
जहाँ नमी हो
वो पौधे सूखा नहीं करते
ऐसा माँ कहती है 😉...........


बुधवार, 19 मई 2021

आँखों में आँखे डालकर !!!

 

वक़्त के पास
इन दिनों मुश्किलों की
लंबी कतार है …
नित नये संक्रमणों के साथ,
आँधी-पानी और तूफ़ान भी है !

कहती है उम्मीद तभी
कानों के पास आहिस्ता से,
डरकर भी लड़ी है, जंग कोई किसी ने
संभल कर चलो, हिम्मत बनो
किसी उदास मन को
एक मुस्कान देकर, 
दुआओं के कुछ बोल सौंप दो
जिंदादिली से, देखना तुम
गुज़र जाएगा ये वक़्त,
तमाम मुश्किलों की
आँखों मे आँखे डालकर !!!
© सीमा 'सदा'
#उम्मीद

....




शनिवार, 8 मई 2021

माँ की दुआओं में ....

 


बड़ी बरक़त देखी

मैंने माँ की दुआओं में

मुड़-मुड़ कर पलटती रहीं

जब भी मुश्किलें

माँ अपनी हथेली 

मेरे सर रख देती !!

....



रविवार, 2 मई 2021

ईश्वर पर आस्था रखना !!!

तसल्ली भरे शब्दों के

चेहरों पर

मातम सा छाया देख

दुआओं की 

पगडंडियों पर

साथ चल रही उम्मीद

कहती है ...

गुज़र जाएगा ये वक़्त

ईश्वर पर आस्था रखना

इस प्रार्थना के साथ 

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।




शनिवार, 3 अप्रैल 2021

दबे पाँव आई अनहोनी !!

 दबे पाँव आई अनहोनी

बड़ी ख़ामोशी से,

हुआ हादसा ..

कुछ ज़ख्म, कुछ खरोचें

कुछ मुंदी चोटें

गहरे काले निशानों के साथ

रक्तरंजित कर गईं

चेहरे को 

यक़ीन के परे का एक सच

ये कह गया चुपके से कानों में

समय का मरहम

मिटा देगा हर ज़ख्म का निशान !!!

… 




गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

ज़िद्दी यादों से !!!

 आँसू बहाये, पाँव भी पटके

बड़ी देर तक 

ठुनकती भी रहीं

पर मुझसे दूर न हुईं

इनको भुलाने की फ़नकारी में

मैं माहिर न हो सकी

चाह कर भी ..... 

टूटता नहीं, रिश्ता मेरा 

इन ज़िद्दी यादों से !!!

....




रविवार, 17 जनवरी 2021

ज़िंदगी की चाय !!!

ज़िंदगी की चाय में

उबाल देना

सारे रंजो-ग़म

अनबन की गाँठ वाली अदरक को,

कूट-पीटकर डाल देना

जिसका तीखा सा स्वाद भी

बड़ा भला लगेगा,

मिठास के लिए

ज़रा सा अपनापन

डालते ही

जायकेदार चाय

पिला सकोगे

अपने अपनो को !!!

...



बुधवार, 6 जनवरी 2021

मुस्कराहटों के मायने !!!

 मुस्कराहटों के मायने

मत पूछा करो तुम,

दर्द को छिपाने में 

 .... आँसुओं को,

पलकों की ....

कोरों पे रोकने में

अक़्सर ये,

शुभचिंतक हो जाती है!!!

©

    


गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

सजे हैं द्वार मन के !!!

 दिसम्बर का

इंतज़ार ख़त्म होने को है

21वीं सदी को

इक्कीसवें साल की

शुभकामनाएं देने

जनवरी सीढ़ी दर सीढ़ी

उतर रही है ...

शुभता की कामनाओं से

सजे हैं द्वार मन के,

उम्मीद ने बुलावा भेजा है

खुशियों को मंगल गीत गाने को,

आना ही होगा नव वर्ष को,

सबके आँगन …..

हर्ष और उत्कर्ष का

चर्मोत्कर्ष लिए !!!

.....


मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

उम्मीदों की पिटारी लिए !!!

 उम्मीदों के माथे पे

कभी काला टीका भी लगा देना

बड़ा बेरोक-टोक ये

इसकी उसकी आँखों में

उतर जाती हैं

बन के अपनी सी !

….

जाने की तैयारी में है

दिसंबर 20 का

उम्मीदों की पिटारी लिये

जनवरी 21 की

दस्तक़ देने को आतुरता से

शुभ क्षण, शुभ दिन को

साथ लिए शुभकामनाओं भरा

शुभ बिहान साथ लाई है !!!

...



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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....