जाने कहाँ छिप जाती हैउ
उदासी, ख़ामोशी,
और तन्हाई
जब माँ साथ होती है !!!
...
सारी मुस्कराहटों को
पता होता है,
माँ की धड़कनों से
हर कोना हँसता है,
और दीवारें
जगमगाती हैं !!!
© सीमा 'सदा'
जाने कहाँ छिप जाती हैउ
उदासी, ख़ामोशी,
और तन्हाई
जब माँ साथ होती है !!!
...
सारी मुस्कराहटों को
पता होता है,
माँ की धड़कनों से
हर कोना हँसता है,
और दीवारें
जगमगाती हैं !!!
© सीमा 'सदा'
संकल्प की ड्योढ़ी पर
आज हर आंगन
दीप जलेगा
उत्सव की इस बेला में
नतमस्तक होगी भक्ति भी
विश्वास की शक्ति से
राम आएंगे… जन जन के राम आएंगे!
…
शुभ और हर संकल्पित मन को
इस पल की बधाई! बधाई!!
वक़्त तो बड़ा ही व्यस्त है
ज़िन्दगी भी अब
इसकी अभ्यस्त है
नित-नई चुनौतियों की
ओढ़कर दुशाला
चलते-चलते
सोचता कोई है ..
जो मन की देहरी को
पार करने से पहले
दस्तक़ देकर,
पूछ ले हाल
मनमर्जियों की लग़ाम
पकड़ ले कसकर !
…
तुम्हें पता है न
विदा के वक़्त की मुस्कान
मन के हर भार को
हल्का कर देती है
और विश्वास को दुगुना
.. कि जो भी होगा
वो अच्छा ही होगा !!
नववर्ष की अनंत मंगलकामनाएं 🎉🎉
...
© सीमा 'सदा'
पर्व है ये
मातृ भाषा की उन्नति का
मन से मन को मिलाती
करती परिक्रमा
अंतर्मन की
सृजित होती,
उर्जित करती कर को
मन की करता चल
रुक मत तू आगे ही आगे
बढ़ता चल !
…
जाने कितने रंग समेटे
उत्सव का दिन
लेकर आई हिंदी
उल्लासित हैं
सब मिल-जुल,
स्वर-व्यंजन भी
हुए अलंकृत
नये-नये प्रतिमानों से,
मन के द्वार
सजी रंगोली
मंगल कलश
सजा कर कमलों में
करती हूँ अभिनन्दन तेरा
हिंदी, लगाकर तुझको
रोली चन्दन मैं !!
…
स्मृतियां आने से पहले
नहीं देती दस्तक़
वरना मैं आपको आज भी
हँसती हुई मिलती पापा
बना रही हूँ
मीठी सिवइयां
इनके बिना फीका लगता था
आपको हर त्यौहार
नेह के बन्धनों में बंधे हम
विस्मृत नहीं होते
कभी इन स्मृतियों से !
…
अक्षत से रोली
हँस के बोली
तुम भी मेरे भाई के माथे पर
सितारों से चमकते हो
मेरे रतनारी रँग पर
पावन सी दुआ बनते हो
इस विश्वास के साथ कि
मेरे भाई की कोई क्षति नहीं होगी
धागा नेह का
बंध के कलाई पर
अडिगता से निभाता है वचन
पवित्र रिश्ते का
सम्मान के संग !!
...
तुम और मैं
अक़्सर अब शब्दों में
मिलने लगे
विचारों में टटोलने लगे हैं
एक-दूसरे को
अपनेपन की दीवारों पर
कड़वाहटों की दरारें
उभर आईं हैं
जरूरत है इनको मरम्मत की !
…
ये जो तुम
सुप्रभात के नाम पर स्टेटस
लगा लेते हो न
इस पर अब कुदृष्टि लग गई है
अर्थ इनके जाने कितनी बार
अनर्थ कर देते हैं,
प्रेम, अनुराग, मित्रता
सबको लुभाने में सक्षम है
पर इन सुविचारों के रूप
अब परिवर्तित हो गए हैं,
हालातों के मारे
अपनों से छले गए लोगों ने
प्रेरक विचारों को
हथियार बना लिया है
तभी तो फ़रेब, धोखे की
तीख़ी मार से
प्यार भी घायल है
अपनेपन की आँखों में नमी है !!
….
न, तुम बुरा मत मानना
बस कुछ शब्दों की मैंने
आज यूँ ही मरम्मत की है,
कुछ जख्मी शब्दों को
दिलाई है दर्द से निज़ात भी
कुछ हिचकियों को ...
पानी भी पिलाया है
उठक-बैठक करते शब्द
कलम से माँग रहे हैं माफ़ी
कुंठित सोच को
न होने देंगे, खुद पर हावी
अनुचित न करेंगे न करने देंगे !!!
© सीमा 'सदा'
एक मुस्कराहट
आज फिर
तुम्हारे नाम की
सजी है मेरे लबों पर
कुछ शैतानियों के
आज फ़िर पकड़े हैं कान,
कुछ बूंदे बरसीं हैं
खामोशी से
तेरी यादों की,
मन ही मन
बना रही हूँ कोलाज़
रूठने और मनाने की
तस्वीरें लगाकर ..
इन लम्हों को
मित्रता दिवस की
मुबारकबाद जो देनी है !!!
...
© सीमा 'सदा'
वक़्त के पास
इन दिनों मुश्किलों की
लंबी कतार है …
नित नये संक्रमणों के साथ,
आँधी-पानी और तूफ़ान भी है !
…
कहती है उम्मीद तभी
कानों के पास आहिस्ता से,
डरकर भी लड़ी है, जंग कोई किसी ने
संभल कर चलो, हिम्मत बनो
किसी उदास मन को
एक मुस्कान देकर,
दुआओं के कुछ बोल सौंप दो
जिंदादिली से, देखना तुम
गुज़र जाएगा ये वक़्त,
तमाम मुश्किलों की
आँखों मे आँखे डालकर !!!
© सीमा 'सदा'
#उम्मीद
....
बड़ी बरक़त देखी
मैंने माँ की दुआओं में
मुड़-मुड़ कर पलटती रहीं
जब भी मुश्किलें
माँ अपनी हथेली
मेरे सर रख देती !!
....
तसल्ली भरे शब्दों के
चेहरों पर
मातम सा छाया देख
दुआओं की
पगडंडियों पर
साथ चल रही उम्मीद
कहती है ...
गुज़र जाएगा ये वक़्त
ईश्वर पर आस्था रखना
इस प्रार्थना के साथ
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।
…
दबे पाँव आई अनहोनी
बड़ी ख़ामोशी से,
हुआ हादसा ..
कुछ ज़ख्म, कुछ खरोचें
कुछ मुंदी चोटें
गहरे काले निशानों के साथ
रक्तरंजित कर गईं
चेहरे को
यक़ीन के परे का एक सच
ये कह गया चुपके से कानों में
समय का मरहम
मिटा देगा हर ज़ख्म का निशान !!!
…
आँसू बहाये, पाँव भी पटके
बड़ी देर तक
ठुनकती भी रहीं
पर मुझसे दूर न हुईं
इनको भुलाने की फ़नकारी में
मैं माहिर न हो सकी
चाह कर भी .....
टूटता नहीं, रिश्ता मेरा
इन ज़िद्दी यादों से !!!
....
ज़िंदगी की चाय में
उबाल देना
सारे रंजो-ग़म
अनबन की गाँठ वाली अदरक को,
कूट-पीटकर डाल देना
जिसका तीखा सा स्वाद भी
बड़ा भला लगेगा,
मिठास के लिए
ज़रा सा अपनापन
डालते ही
जायकेदार चाय
पिला सकोगे
अपने अपनो को !!!
...
मुस्कराहटों के मायने
मत पूछा करो तुम,
दर्द को छिपाने में
.... आँसुओं को,
पलकों की ....
कोरों पे रोकने में
अक़्सर ये,
शुभचिंतक हो जाती है!!!
©
दिसम्बर का
इंतज़ार ख़त्म होने को है
21वीं सदी को
इक्कीसवें साल की
शुभकामनाएं देने
जनवरी सीढ़ी दर सीढ़ी
उतर रही है ...
शुभता की कामनाओं से
सजे हैं द्वार मन के,
उम्मीद ने बुलावा भेजा है
खुशियों को मंगल गीत गाने को,
आना ही होगा नव वर्ष को,
सबके आँगन …..
हर्ष और उत्कर्ष का
चर्मोत्कर्ष लिए !!!
.....उम्मीदों के माथे पे
कभी काला टीका भी लगा देना
बड़ा बेरोक-टोक ये
इसकी उसकी आँखों में
उतर जाती हैं
बन के अपनी सी !
….
जाने की तैयारी में है
दिसंबर 20 का
उम्मीदों की पिटारी लिये
जनवरी 21 की
दस्तक़ देने को आतुरता से
शुभ क्षण, शुभ दिन को
साथ लिए शुभकामनाओं भरा
शुभ बिहान साथ लाई है !!!
...