शनिवार, 3 अप्रैल 2021

दबे पाँव आई अनहोनी !!

 दबे पाँव आई अनहोनी

बड़ी ख़ामोशी से,

हुआ हादसा ..

कुछ ज़ख्म, कुछ खरोचें

कुछ मुंदी चोटें

गहरे काले निशानों के साथ

रक्तरंजित कर गईं

चेहरे को 

यक़ीन के परे का एक सच

ये कह गया चुपके से कानों में

समय का मरहम

मिटा देगा हर ज़ख्म का निशान !!!

… 




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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....