सोमवार, 23 अप्रैल 2018

मरहम के साये में दर्द !!!!

कड़वे शब्द
कठिन समय में
बस मरहम होते हैं
जख्मो की ज़बान होती
तो वो चीखते शोर मचाते
आक्रमण करते
मरहम के साये में दर्द नम होकर
यूँ पसीज हिचकियाँ ना लेते !!!!
...
छलनी होती रूह पे
घड़ी दो घड़ी की तसल्ली
वाले शब्दों से
कुछ हुआ है ना कभी होगा
गुनाहों की शक्ल
बदलने के वास्ते
रूहों का लिबास बदलना होगा !!!
...

सोमवार, 2 अप्रैल 2018

मन भी सिक्का !!!

मौन मेरा
आज कुछ बातों को
सिक्के की तरह
उछाल रहा है
गगन की ओर
चित्त और पट
अब मन की मुट्ठी में है
किस बात को
कैसे कब और कहाँ
इस्तेमाल करना है।
...
जब बातें
कड़क और स्प्ष्ट हों
तो मन भी सिक्का हो जाता है
क्या लेना है और क्या छोड़ना
निर्णय किसी हथेली पर
चाहकर भी नहीं छोड़ता मन !!!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....