गुरुवार, 17 नवंबर 2016

साँच को आँच नहीं :))

मैं, तुम, हम
सच कहूँ तो
सब बड़े ही  खुदगर्ज़ हैं
कोई किसी का नहीं
सब अपनी ही  बात
अपने ही अस्तित्व को
हवा देते रहते हैं
कि दम घुट ना जाये कहीं
...

सत्य
जिन्दा है जब तक
विश्वास भी
सांस ले रहा है तब तक
झूठ असत्य अविश्वास
भिन्न नामों की परिधि में
छुपे हुए सत्य को
पहचान जाओ तो
ये तुम्हारा हुनर
वर्ना ये रहता है अनभिज्ञ !
....
नहीं कचोटता होगा तुम्हें
कभी असत्य
क्यूंकि जब जिसके साथ
जीवन निर्वाह की आदत हो जाये
तो फ़िर गलत होकर भी
कुछ गलत नहीं लगता
पर उपदेश कुशल बहुतेरे
वाली बात कह कर
तुम सहज ही
मुस्करा तो देते हो
पर सत्य से
नज़रें मिलाने का साहस
नहीं कर पाते
इतिहास गवाह है
हर क्रूरता को
मुँह की खानी पड़ी है
और झूठ ने गँवाई है
अपनी जान
साँच को आँच नहीं :)

बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

मैं संग्रहित करता रहा !!!!

मैं संग्रहित करता रहा
जीवन पर्यन्त
द्रव्य रिश्ते नाते
तेरे मेरे
सम्बन्ध अनगिनत
नहीं एकत्रित करने का -
ध्यान गया
परहित,श्रद्धा, भक्ति
विनम्रता, आस्था, करुणा
में से कुछ एक भी
जो साथ रहना था
उसे छोड़ दिया
जो यही छूटना था
उसकी पोटली में
लगाते रहे गाँठ
कुछ रह ना जाये बाकी !!!
...
मैं तृष्णा की  रौ में
जब भरता अँजुरी भर रेत
कंठ सिसक उठता
प्यासे नयनों में विरक्तता
बस एक आह् लिये
मन ही मन
दबाता रहता
उठते हुए ग़ुबार को !!!
.....

बुधवार, 14 सितंबर 2016

मातृभाषा, माँ बोली !!!


हिंदी बोलोगे
गर्व से जिस दिन
उस दिन तुम्हे
जिभ्या पे
स्वाद मिलेगा 
इक अनोखा !
समझा पाओगे
अपनी बात ही नहीं
समझ पाओगे
लोग क्या कहना
चाह रहे हैं !!!!
...
मातृभाषा, माँ बोली
जिसने पहचान कराई
हिंदी से हिन्दुस्तान से
बल्कि कहूँ तो
सारे जहान से
इसे दिवस विशेष
मत बनाओ
बड़ा लम्बा सफ़र
तय किया है इसने
मैं, तुम से लेकर
हम तक पहुँचने का
इसकी क़ाबलियत का
सम्मान करो और
अपनाकर हर्ष से
हर दिन !
जन-जन तक इस
दिवस विशेष का
ये सन्देश पहुँचाओ !!!

सोमवार, 22 अगस्त 2016

बेटियां होती ...

बेटियां होती
दोनों कुल का मान
स्वीकारो ये !
....
बिन बेटी के
ना भाग्य संवरता
जाना ना भूल !
....
बेटी होती है
प्लस का एक चिन्ह
जो जोड़े सदा !
....
बेटी नहीं है
जिन्हें तरसते वो
कन्यादान को !
....
बेटियां होती
बिंदी रोली कुंकुम
पूजा की पात्र !
....
बेटी सावन
चूड़ी मेहँदी झूले
मिल के कहें !

....बेटी सावन
चूड़ी मेहँदी झूले
मिल के कहें !

बुधवार, 17 अगस्त 2016

कलाई राखी सजे !!!













अक्षत रोली
लगाकर भाई को
बाँधी है राखी !
...
पवित्र रिश्‍ता
विश्‍वास का बँधन
कायम रखे !
...
रेशम डोर
कलाई से बँधे तो
दुआ बनती ! 
...
माथे तिलक
कलाई राखी सजे
खुश हो भाई !
...
दुआ की डोर
बाँधे पावन रिश्‍ता
सदा के लिए !
...

शनिवार, 6 अगस्त 2016

दोस्‍त है वही !!!

सुबह शाम
कैसे हो दोस्‍त कहे
मेरा ये मित्र !
...
संग दोस्‍त का
अनमोल ये पल
साथ हैं हम !
...
फूल दोस्‍ती का
साथ निभाते हुये
महका करे !
...
साथ चले जो
दूर रहकर भी
दोस्‍त है वही !
...
दोस्‍त जिंदगी
रिश्‍ता ईमान का ये
जान से प्‍यारा !
...
रिश्‍ता दोस्‍ती का
जिंदगी को सौग़ात
मिली रब से !!

शनिवार, 16 जुलाई 2016

अर्थ बोलते हैं जब !



शब्‍द प्रेरणा होते हैं
जब मन स्‍वीकारता है उन्‍हें
तो अर्थ बोलते हैं उनके
आरम्‍भ होती हैं पंक्तियाँ
जन्‍म लेती है कविता
कितनी बार
इन शब्‍द और अर्थों के साये में !
...
प्रेरक विचार
जन्‍म लेने से पहले
कितना मथते हैं मन को
शब्‍दों का कोलाहल
एकदम शांत चित्‍त हो
ठिठककर सुनता है
अर्थ बोलते हैं जब
इन शब्‍दों के
विचार एकाएक
हो जाते हैं बलशाली
निश्‍चय की आखि़री सीढ़ी
वो चढ़ चुके होते है
जहाँ उनकी अडिगता को
डिगा पाना मन के लिए भी
संभव नहीं हो पाता !!!

शनिवार, 7 मई 2016

माँ के लिये !


माँ ने नहीं पढ़े होते
नियम क़ायदे
ना ही ली होती है डिग्री
कोई कानून की
फिर भी हर लम्‍हा सज़ग रहती है
अपने बच्‍चों के अधिकारों के प्रति
लड़ती है जरूरत पड़ने पर
बिना किसी हथियार के
करती है बचाव सदा
खुद वार सहकर भी !
....
माँ के लिये एक समान होती हैं
उसकी सभी संताने
किसी एक से कम
किसी एक से ज्‍यादा
कभी भी प्‍यार नहीं कर पाती वह
ये न्‍याय वो कोई तुला से नहीं
बल्कि करती है दिल से
ममता की परख
बच्‍चे कई बार करते हैं !!
...
कसौटियों पर रख ये भी कहते हैं
हमें कम तुम्‍हें ज्‍यादा चाहती है माँ
कहकर आपस में जब झगड़ते हैं
तो उन झगड़ों को वो अक्‍़सर
एक सहज सी मुस्‍कान से मिटा देती है
और सब लग जाते हैं गले
ऐसा न्‍याय सिर्फ माँ ही कर सकती है !!!

...


मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

जिंदगी ...

जिंदगी 
मैं सोचती हूँ 
जब भी तुम्हें 
तो फिर 
जाने क्यूँ सब कुछ 
भूल जाता है smile emoticon
....
सच कहो
तुम कोई याद हो
या फिर रिश्ता
जन्मों का
जो निभाती हो
नाता ताजिंदगी
जिंदगी के साथ !

...
कोई रिश्ता 
मन वचन के साथ-साथ 
हो जाता है‍ जिंदगी भी 
अपने आप से
...
ये मन का आप
न जाने कितनी
कसौटियों का
लेखा-जोखा करता है
और निभाता है
रिश्ता हर एक से
परख मन की
आईना जिंदगी का
...

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

बासन्‍ती पर्व कहलाऊंगा !!!!

बसंत पंचमी को
माँ सरस्‍वती का वंदन
अभिनन्‍दन करते बच्‍चे आज भी
विद्या के मन्दिरों में
पीली सरसों फूली
कोयल कूके अमवा की डाली
पूछती हाल बसंत का
तभी कुनमुनाता नवकोंपल कहता
कहाँ है बसंत की मनोहारी छटा
वो उत्‍सव वो मेले
सब देखो हो गये हैं कितने अकेले
मैं भी विरल सा हो गया हूँ
उसकी बातें सुनकर
डाली भी करूण स्‍वर में बोली
मुझको भी ये सूनापन
बिल्‍कुल नहीं भाता!
...
विचलित हो बसंत कहता
मैं तो हर बरस आता हूँ
तुम सबको लुभाने
पर मेरे ठहरने को अब
कोई ठौर नहीं
उत्‍सव के एक दिन की तरह
मैं भी पंचमी तिथि को
हर बरस आऊंगा
तुम सबके संग माता सरस्‍वती के
चरणों में शीष नवाकर
बासन्‍ती पर्व कहलाऊंगा !!!!
...


सोमवार, 25 जनवरी 2016

सारे जहाँ से अच्‍छा !!!








गणतंत्र की सुबह
उत्‍सव का उल्‍लास लिये
बचपन की हथेली में
कुछ गुलाब हैं
और कुछ पंखुडिया भी
नन्‍हें कदमों में
साधक का भाव है
जयहिन्‍द का स्‍वर
..
मैं ढूँढ़ती हूँ
खुद को
इन नन्‍हें पदचापों में
जो कुहासे से
लिपटी भोर में
उत्‍सुक हैं
तिरंगे के फहराये जाने को
गुलाब की कुछ
पंखुडि़या अर्पित कर
जन मन गण जय हे
गाये जाने को
..
ये दिवस
हमेशा एक उत्‍साह
एक उर्जा लिये
मेरे मन पे
दस्‍तक देता था
देता रहेगा
गणतंत्र दिवस की
पूर्व संध्‍या को ही
सुबह की तमाम
होने वाली
गतिविधियों को
चलचित्र की भांति
पलकों पे संजोये
भारत की शान में
गुनगुना उठता था
सारे जहाँ से अच्‍छा
हिन्‍दोस्‍ता हमारा ...
!! जय हिन्‍द !!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....