शनिवार, 3 अप्रैल 2021

दबे पाँव आई अनहोनी !!

 दबे पाँव आई अनहोनी

बड़ी ख़ामोशी से,

हुआ हादसा ..

कुछ ज़ख्म, कुछ खरोचें

कुछ मुंदी चोटें

गहरे काले निशानों के साथ

रक्तरंजित कर गईं

चेहरे को 

यक़ीन के परे का एक सच

ये कह गया चुपके से कानों में

समय का मरहम

मिटा देगा हर ज़ख्म का निशान !!!

… 




गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

ज़िद्दी यादों से !!!

 आँसू बहाये, पाँव भी पटके

बड़ी देर तक 

ठुनकती भी रहीं

पर मुझसे दूर न हुईं

इनको भुलाने की फ़नकारी में

मैं माहिर न हो सकी

चाह कर भी ..... 

टूटता नहीं, रिश्ता मेरा 

इन ज़िद्दी यादों से !!!

....




रविवार, 17 जनवरी 2021

ज़िंदगी की चाय !!!

ज़िंदगी की चाय में

उबाल देना

सारे रंजो-ग़म

अनबन की गाँठ वाली अदरक को,

कूट-पीटकर डाल देना

जिसका तीखा सा स्वाद भी

बड़ा भला लगेगा,

मिठास के लिए

ज़रा सा अपनापन

डालते ही

जायकेदार चाय

पिला सकोगे

अपने अपनो को !!!

...



बुधवार, 6 जनवरी 2021

मुस्कराहटों के मायने !!!

 मुस्कराहटों के मायने

मत पूछा करो तुम,

दर्द को छिपाने में 

 .... आँसुओं को,

पलकों की ....

कोरों पे रोकने में

अक़्सर ये,

शुभचिंतक हो जाती है!!!

©

    


गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

सजे हैं द्वार मन के !!!

 दिसम्बर का

इंतज़ार ख़त्म होने को है

21वीं सदी को

इक्कीसवें साल की

शुभकामनाएं देने

जनवरी सीढ़ी दर सीढ़ी

उतर रही है ...

शुभता की कामनाओं से

सजे हैं द्वार मन के,

उम्मीद ने बुलावा भेजा है

खुशियों को मंगल गीत गाने को,

आना ही होगा नव वर्ष को,

सबके आँगन …..

हर्ष और उत्कर्ष का

चर्मोत्कर्ष लिए !!!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....