रविवार, 23 जुलाई 2017

मन थोड़ा अनमना सा ....

मन थोड़ा अनमना सा घर के कुछ कोने उदास हैं
दूर गया है आज वो मुझसे जो मन के पास है !

कैसे रहना है अपनों से दूर बेगानों के बीच जाने ना
जिसने जाना ना हो अपनेपन की होती क्या प्यास है !

खोया पाया लिया दिया इन बातों का हिसाब न रखा,
उन लम्हो को फिक्स कर दिया जो लगे कुछ खास हैं !

कीमत मत पूछना बहुत कीमती हैं जज़्बात अपनेपन के
अनमोल रिश्तों में खास होता बस यही इक अहसास है !

तस्वीर दीवार पे लगाई तुमने हर पल सामने रहने को
जी भर देखा भी नहीँ जाता सदा होता जब मन उदास है
  

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....