मंगलवार, 27 जुलाई 2021

रिश्ता मन का !!

 

एक रिश्ता
जिसकी बुनियाद
बस मन ही होता है
उसकी नीव में
भरा होता है
संबंधों का गारा
जिसे बनाया गया होता है
अपनेपन के पानी से
एक निश्चित मात्रा
ना ठोस ना तरल
...
पानी की यही ख़ासियत है
जिसमे मिला दो
उस जैसा हो जाता है
रिश्ता मन का
पानी की पारदर्शिता लिये
जहाँ नमी हो
वो पौधे सूखा नहीं करते
ऐसा माँ कहती है 😉...........


13 टिप्‍पणियां:

  1. जहाँ नमी हो वो पौधे सूखा नहीं करते ऐसा माँ कहती है
    गहन अभिव्यक्ति !!

    जवाब देंहटाएं
  2. पानी की यही ख़ासियत है
    जिसमे मिला दो
    उस जैसा हो जाता है
    वाह बहुत खूबसूरत।

    जवाब देंहटाएं
  3. रिश्ता मन का
    पानी की पारदर्शिता लिये
    जहाँ नमी हो
    वो पौधे सूखा नहीं करते
    ऐसा माँ कहती है 😉...........

    भावपूर्ण अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ३० जुलाई २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  5. माँ झूठ भी कहाँ कहती है ...
    मन का रिश्ता कभी टूट नहीं पाता ... उसमें कोई कारण जो नहीं होता ... बस प्रेम होता है ...

    जवाब देंहटाएं
  6. माँ सदैव सत्य कहा करती हैं

    सुन्दर लेखन

    जवाब देंहटाएं
  7. पानी की यही ख़ासियत है
    जिसमे मिला दो
    उस जैसा हो जाता है
    बेहतरीन..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह!गहरी बात कह गईंं आप सदा जी ।खूबसूरत सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  9. एक रिश्ता
    जिसकी बुनियाद
    बस मन ही होता है
    उसकी नीव में
    भरा होता है
    संबंधों का गारा
    जिसे बनाया गया होता है
    अपनेपन के पानी से
    अपनेपन के पानी से बना ये रिश्ता...
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर लाजवाब सृजन।

    जवाब देंहटाएं

ब्लॉग आर्काइव

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....