बुधवार, 19 मई 2021

आँखों में आँखे डालकर !!!

 

वक़्त के पास
इन दिनों मुश्किलों की
लंबी कतार है …
नित नये संक्रमणों के साथ,
आँधी-पानी और तूफ़ान भी है !

कहती है उम्मीद तभी
कानों के पास आहिस्ता से,
डरकर भी लड़ी है, जंग कोई किसी ने
संभल कर चलो, हिम्मत बनो
किसी उदास मन को
एक मुस्कान देकर, 
दुआओं के कुछ बोल सौंप दो
जिंदादिली से, देखना तुम
गुज़र जाएगा ये वक़्त,
तमाम मुश्किलों की
आँखों मे आँखे डालकर !!!
© सीमा 'सदा'
#उम्मीद

....




7 टिप्‍पणियां:

  1. हौसला और विश्वास दिलाती बेहतरीन रचना ।

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर ( 3034...रात की सियाही को उजाले से जोड़ोगे कैसे...?) गुरुवार 20 मई 2021 को साझा की गई है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. आशा से ही आकाश थमा है ,सुन्दर रचना !!

    जवाब देंहटाएं
  4. जलते जंगल पर कुछ बरसातज्ञकी बौछार है ये आशा से भरी पंक्तियाँ।
    सुंदर सृजन सीमा जी।

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  5. एक आशा की किरण लेकर आई यह रचना हौसला देती है आज की परिस्थिति का सामना करने का! आमीन!!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....