ना बातें मुकद्दर की किया कर,
जो भी है तू हंस के जिया कर ।
जीने के हैं चार दिन इसी बात
पर ही अमल कर लिया कर ।
तेरे-मेरे की रूसवाईयों को छोड़,
सच्चाई से रूबरू हो लिया कर ।
झुका के सजदे में सर रब के,
आगे कानों को छू लिया कर ।
करनी कर के पछतावे जो कोई
तू ऐसे जुर्म से बच लिया कर ।
ये बातें गजल तो ना हुईं सदा तू
सीधी सच्ची बात समझ लिया कर ।
सीधे सच्चे अंदाज़ में लाजवाब लिखा है............ सत्य को पहचानने की की कोशिच कराती उम्दा ग़ज़ल
जवाब देंहटाएं"ये बातें गजल तो ना हुईं सदा तू
जवाब देंहटाएंसीधी सच्ची बात समझ लिया कर ।"
सदा।
तुमने सादेपन से बहुत ऊँची बात कह दी है।
बधाई।
जो भी है तू हंस कर जिया कर
जवाब देंहटाएंसकारात्मक अभिव्यक्ति पर बधाई
हिन्द युग्म पर मेरी गज़ल देखने का शुक्रिया
"ये बातें गजल तो ना हुईं सदा तू
जवाब देंहटाएंसीधी सच्ची बात समझ लिया कर ।
बहुत सुन्दर संदेश देती बडिया गज़ल
ek alag se niraale andaaz me apni baatein rakhi aapne...ant to kaafi akarshak lagaa
जवाब देंहटाएंwww.pyasasajal.blogspot.com
सदा नहीं यदा-कदा ही आया करो
जवाब देंहटाएंरातरानी सी यूं ही महक जाया करो
हंसने रोने की बात तो सब करते
तुम यूं ही चुपके से छू जाया करो
आप सभी का बहुत-बहुत आभार प्रोत्साहन के लिये ।
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