सोमवार, 25 जून 2012

कहाँ हो तुम ???

भोर की पहली किरण के संग
तुम्‍हारा ख्‍याल दबे पांव आकर
जाने कब मेरे सिरहाने
आकर पलकों में समा जाता
मैं उन्‍हें मूंदे - मूंदे ही
तुम्‍हारी सोच के साथ
पलकों को उठाती
हथेलियों से ढांपती चेहरे को
पूछती कहाँ हो तुम ???
...
तुम्‍हारा आना ख्‍यालों के संग,
आज भी वैसा है जैसे
मोबाइल से मैसेज सेंड करना
आम हो गया है
दूरियां मीलों की लाख सही
अहसास उसका हमारी हथेलियों में
सिमटा हुआ है
कभी कोई स्‍माइली जीभ चिढ़ाते हुए
कभी उछलते हुए आता है जब
तुम्‍हारा चेहरा सजीव हो उठता है
...
मन दर्पण की तरह
उदासियों के बीच
तुम्‍हारे हर ख्‍याल में
अपना प्रतिबिम्‍ब देखता
झांकता तुम्‍हारी हँसी को
निहारता पलटकर कभी
फिर अपनी बेबसी को
मुस्‍कराने का वादा तो
मैने भी किया था तुमसे
पर सच कहूँ
बिन तुम्‍हारे जीने का 'जी'
बिल्‍कुल नहीं करता!!!

35 टिप्‍पणियां:

  1. याद करने का निराला ढंग है |
    क्या तुम्हारा रूप माते
    क्या चमकता रंग है ||
    संग है, वो संग है ||

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  2. बहुत सुन्दर......
    प्यारी सी भावाव्यक्ति....

    सस्नेह.

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  3. मुस्कुराहट को जरूरी है हमेशा इक सबब,
    जिन्दगी की राह यादों से सुहानी हो गई।

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २६/६ १२ को राजेश कुमारी द्वारा
    चर्चामंच पर की जायेगी

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २६/६ १२ को राजेश कुमारी द्वारा
    चर्चामंच पर की जायेगी

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  6. बिन तुम्‍हारे जीने का 'जी'
    बिल्‍कुल नहीं करता!!!

    दूरियां समेटनी ही होगी

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  7. कोमल भाव लिए...
    सुन्दर अहसास लिए..
    सुन्दर.हृदयस्पर्शी रचना...
    :-)

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  8. कोमल भावनाओं की सटीक अभिव्यक्ति...बधाई!

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  9. कुछ अलग सी , अर्थपूर्ण भाव लिए रचना

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  10. दूरियां मीलों की लाख सही
    अहसास उसका हमारी हथेलियों में
    सिमटा हुआ है

    बहुत कोमल भावों को लिए खूबसूरत रचना

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  11. sach! jisko ham dil se chanten hain jab tak vp paas na ho ek akela pan to lagta hi hai .fir aap chahe lakh maisej kar ya eir baaten hi kar len-------------
    bahut hi komalta ke saath aapne apni yaado ko hatheliyon me samet ke rakkha hai---
    bahut hi badhiya prastuti----
    poonam

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  12. उदासियों के बीच ये खयाल दूरियों को मिटाए रखते हैं ...
    खूबसूरत स्मृतियों के कुछ पल पूरी जिंदगी को जीने के लिए काफी है , तो फिर जी ने को दिल क्यों नहीं करता :)

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  13. झांकता तुम्‍हारी हँसी को
    निहारता पलटकर कभी
    फिर अपनी बेबसी को

    ह्दय मे याद उज्ज्वल हो ....
    कलम कि ज्योति प्रज्ज्वल हो ...
    तभी आज बहुत प्रखर है ...कविता ...!!
    बहुत सुंदर रचना ...!!

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  14. कोमल भावों से सजी बहुत ही बढ़िया भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  15. बहुत ही प्यारी रचना ! बहुत खूबसूरत अहसासों से सजी हुई ! बधाई स्वीकारें !

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  16. मुस्‍कराने का वादा तो
    मैने भी किया था तुमसे
    पर सच कहूँ
    बिन तुम्‍हारे जीने का 'जी'
    बिल्‍कुल नहीं करता!!!...acchi rachna hai..biyog ke manobhavon ksa sahi chitran

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  17. वाह...एक दर्द है..जो टीसता रहता है

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  18. ममत्व झलक रहा है... सुन्दर रचना

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  19. बांधे रहती है हर पंक्ति हर बिम्ब ममत्व की डोर से जो मूर्त होने लगती है ..... ......वीरुभाई परदेसिया .

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  20. ममता की खान सीमा
    ममता का वन्धन
    सुन्दर रचना
    सादर

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  21. बचपन में झांकती सुन्दर कहानी ...

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  22. वाह: बहुत प्यारी नाजुक सी अभिव्यक्ति..

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  23. अनुपम भाव ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  24. हथेली पर रखे एसएमएस के अहसास का बिंब तेज़ गति वाला है. कोमल कविता.

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  25. मुस्‍कराने का वादा तो
    मैने भी किया था तुमसे
    पर सच कहूँ
    बिन तुम्‍हारे जीने का 'जी'
    बिल्‍कुल नहीं करता!!!

    ....लाज़वाब पंक्तियाँ....बहुत कोमल अहसास...उत्कृष्ट प्रस्तुति...

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  26. जिसके बगैर हम जी नहीं सकते , वह मन में ही होता है ...

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....