शनिवार, 22 अगस्त 2020

ये स्मृतियाँ आपकी !!!

 स्मृतियाँ जब भी तर्क करती

पापा मैं आपको सोचती,

और फिर आपकी हथेली में

होती मेरी उँगली,

जिया हुआ,बेहद सुखद क्षण

सजीव हो उठता,

या फिर …

जब मेरे दोनों बाजू थाम

मुझे आप, हवा में उछालते

मैं चहक कर कहती

और ऊपर …

लगता था वक़्त बस यहीं थम जाये!

...

सबने अपने जीवन में

कभी न कभी, ये जरूर सोचा होगा,

पर वक़्त को गुज़रने की

हमेशा जल्दी ही रही,

पूरे तेईस वर्ष गुज़र गये

बिन आपके पापा,

पर एक भी स्मृति की,

विस्मृति न हुई आज तक!

ना ही कभी होगी!!

आज फिर सजा है

मेरे मन का आँगन,आपकी

मीठी स्मृतियों से

नमी हैं पलकों के आसपास,

स्मरण आपका ...

करते-करते, जी लिए

बचपन के अनगिनत पल,

सच आपकी तरह ही

अनमोल हैं ..

ये स्मृतियाँ आपकी !!!

....


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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....