मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

जिंदगी ...

जिंदगी 
मैं सोचती हूँ 
जब भी तुम्हें 
तो फिर 
जाने क्यूँ सब कुछ 
भूल जाता है smile emoticon
....
सच कहो
तुम कोई याद हो
या फिर रिश्ता
जन्मों का
जो निभाती हो
नाता ताजिंदगी
जिंदगी के साथ !

...
कोई रिश्ता 
मन वचन के साथ-साथ 
हो जाता है‍ जिंदगी भी 
अपने आप से
...
ये मन का आप
न जाने कितनी
कसौटियों का
लेखा-जोखा करता है
और निभाता है
रिश्ता हर एक से
परख मन की
आईना जिंदगी का
...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....