शनिवार, 16 जुलाई 2016

अर्थ बोलते हैं जब !



शब्‍द प्रेरणा होते हैं
जब मन स्‍वीकारता है उन्‍हें
तो अर्थ बोलते हैं उनके
आरम्‍भ होती हैं पंक्तियाँ
जन्‍म लेती है कविता
कितनी बार
इन शब्‍द और अर्थों के साये में !
...
प्रेरक विचार
जन्‍म लेने से पहले
कितना मथते हैं मन को
शब्‍दों का कोलाहल
एकदम शांत चित्‍त हो
ठिठककर सुनता है
अर्थ बोलते हैं जब
इन शब्‍दों के
विचार एकाएक
हो जाते हैं बलशाली
निश्‍चय की आखि़री सीढ़ी
वो चढ़ चुके होते है
जहाँ उनकी अडिगता को
डिगा पाना मन के लिए भी
संभव नहीं हो पाता !!!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....