शनिवार, 19 जुलाई 2014

वो मिली तो मुस्‍कराई भी नहीं :)

टाँग दिया है
एक बार फिर से
हर एक दर्द को
ग़म के कील पर
और मुस्‍कान की
लीपा-पोती करके
भर दिया है
दीवार के हर एक छेद को
तो भी अब जाने क्‍यूँ
पहले जैसी रौनक नहीं है !!
...
पलस्‍तर उधड़ा-उधड़ा
गवाही दे जाता है
गौर से नज़र डालने पर
सीलन भी
चुगलखोरी से बाज़ नहीं आती
एक बड़े पोस्‍टर के नीचे से
झड़ती रेत को
बुहार के फेंक आती हूँ
जब-तब सबकी नज़र बचाकर
जाने कब तुम आ जाओ
मेरे घर मेहमान बनकर
तुम्‍हारी आवभगत में
कोई कसर न रहे  !!!
 ...
ऐ जिंदगी 
तुम भूल मत जाना
मुस्‍कराने का सलीका
कहीं आने वाला कोई लम्‍हा
मेरी शिकायत न कर दे
तुमसे ये कहते हुये
वो मिली तो मुस्‍कराई भी नहीं :)

....  

रविवार, 6 जुलाई 2014

फ़रेब की स्‍लेट पर !!!

जब भी मेरी उम्मीद
टूटकर मिलती तो बस
इतना ही कहती तुम जीने के लिये
किसी की उम्मीद बन जाना
कुछ मुश्किल तो होगा
पर तुम्हे जीना आ जाएगा !!!
....
सहानुभूति के शब्‍द
अक्‍़सर फ़रेब की स्‍लेट पर
लिखे जाते हैं
जहाँ सच बात को
बेर्इमानी के छींटे डालकर
मिटा दिया गया होता है
बड़ी ही सफ़ाई से !!!
.....
सच की ताकत
रूहों को पाक़ रखती है
तभी तो 
जब भी ज़मीर जागता है
सच की प़नाह लेता है !!!


शनिवार, 28 जून 2014

बचाती हैं व्‍यक्तित्‍व को !!!!

कुछ रचनाएँ जन्‍म लेती हैं और
क़ैद होकर रह जाती हैं
डायरी के पन्‍नों में
उनके मर्म उनके अर्थों को
नहीं जान पाता कोई.
...
कितनी पीड़ा कितनी नसीहतों
को उकेरा था उजले पन्‍नों पर
इस काली स्‍याही ने
बड़े-बड़े इरादो को
समेटा था कुछ पंक्तियों में
और पहुँचाया था उन्‍हें बुलंदियों पर
कभी किसी यक़ीन के
टूटने पर उसके टुकड़ों की चुभन से
बचाया था तुम्‍हें
कतरा-कतरा बहने से पहले
दिया था हौसला भी जब
संभाला था खुद को तुमने
बिखरने से पहले.
....
रचनाओं में
जब बिखर जाते हैं शब्‍द
तब कई बार ये बचाती हैं
व्‍यक्तित्‍व को बिखरने से
सहेजती है अक्षरश:
दिखाते हुए उम्‍मीदों का आईना
रू-ब-रू होते हैं एहसास जहाँ
जिंदगी के रंगमंच पर
अपने संकल्‍पों के साथ 
बारी-बारी!!!!



शुक्रवार, 13 जून 2014

पूरा दिन ये बस आपके नाम!!!!

आपकी समझाइशों का सच
थाम के उँगली
मेरे साथ चलता है
परखने की आदत
मुझे मिली है आपसे
विरासत में
पितृ दिवस के दिन
कुछ स्‍मृतियाँ
मेरे इर्द-गिर्द
अपना घेरा बना के
आपके साथ हैं
और साथ रहेंगी भी !
....
रहते हैं हर छोटी-बड़ी बात पर
साथ आप हर ल़म्‍हा
पर दिवस विशेष
करता है आग्रह
आज का पूरा दिन ये

बस आपके नाम कर दूँ!!!!


रविवार, 1 जून 2014

जिंदगी के रंगमंच पर !!!


जिंदगी के रंगमंच पर लगाकर आईना जिंदगी ने,
हर लम्‍हा इक नया ही रंग दिखाया है जिंदगी ने ।

ख्‍वाब, हो ख्वाहिश हो या फिर हो कोई जुस्‍तजू,
कदमों का साथ हर मोड़ पे निभाया है जिंदगी ने ।

इंतजार हो हसरत हो या फिर हो कोई तमन्‍ना,
बड़ी साजिशों के बाद इनसे मिलाया है जिंदगी ने ।

रूठा हो मचला हो या फिर हुई हो कोई तक़रार,
भूल के सारी बातों को अपना बनाया है जिंदगी ने ।

जानती है जाना होगा रूह को छोड़ के सदा के लिए,
फिर भी बड़ी वफ़ादारी से इसे अपनाया है जिंदगी ने ।


मेरे बारे में

मेरा फोटो
मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....