बुधवार, 14 सितंबर 2016

मातृभाषा, माँ बोली !!!


हिंदी बोलोगे
गर्व से जिस दिन
उस दिन तुम्हे
जिभ्या पे
स्वाद मिलेगा 
इक अनोखा !
समझा पाओगे
अपनी बात ही नहीं
समझ पाओगे
लोग क्या कहना
चाह रहे हैं !!!!
...
मातृभाषा, माँ बोली
जिसने पहचान कराई
हिंदी से हिन्दुस्तान से
बल्कि कहूँ तो
सारे जहान से
इसे दिवस विशेष
मत बनाओ
बड़ा लम्बा सफ़र
तय किया है इसने
मैं, तुम से लेकर
हम तक पहुँचने का
इसकी क़ाबलियत का
सम्मान करो और
अपनाकर हर्ष से
हर दिन !
जन-जन तक इस
दिवस विशेष का
ये सन्देश पहुँचाओ !!!

सोमवार, 22 अगस्त 2016

बेटियां होती ...

बेटियां होती
दोनों कुल का मान
स्वीकारो ये !
....
बिन बेटी के
ना भाग्य संवरता
जाना ना भूल !
....
बेटी होती है
प्लस का एक चिन्ह
जो जोड़े सदा !
....
बेटी नहीं है
जिन्हें तरसते वो
कन्यादान को !
....
बेटियां होती
बिंदी रोली कुंकुम
पूजा की पात्र !
....
बेटी सावन
चूड़ी मेहँदी झूले
मिल के कहें !

....बेटी सावन
चूड़ी मेहँदी झूले
मिल के कहें !

बुधवार, 17 अगस्त 2016

कलाई राखी सजे !!!













अक्षत रोली
लगाकर भाई को
बाँधी है राखी !
...
पवित्र रिश्‍ता
विश्‍वास का बँधन
कायम रखे !
...
रेशम डोर
कलाई से बँधे तो
दुआ बनती ! 
...
माथे तिलक
कलाई राखी सजे
खुश हो भाई !
...
दुआ की डोर
बाँधे पावन रिश्‍ता
सदा के लिए !
...

शनिवार, 6 अगस्त 2016

दोस्‍त है वही !!!

सुबह शाम
कैसे हो दोस्‍त कहे
मेरा ये मित्र !
...
संग दोस्‍त का
अनमोल ये पल
साथ हैं हम !
...
फूल दोस्‍ती का
साथ निभाते हुये
महका करे !
...
साथ चले जो
दूर रहकर भी
दोस्‍त है वही !
...
दोस्‍त जिंदगी
रिश्‍ता ईमान का ये
जान से प्‍यारा !
...
रिश्‍ता दोस्‍ती का
जिंदगी को सौग़ात
मिली रब से !!

शनिवार, 16 जुलाई 2016

अर्थ बोलते हैं जब !



शब्‍द प्रेरणा होते हैं
जब मन स्‍वीकारता है उन्‍हें
तो अर्थ बोलते हैं उनके
आरम्‍भ होती हैं पंक्तियाँ
जन्‍म लेती है कविता
कितनी बार
इन शब्‍द और अर्थों के साये में !
...
प्रेरक विचार
जन्‍म लेने से पहले
कितना मथते हैं मन को
शब्‍दों का कोलाहल
एकदम शांत चित्‍त हो
ठिठककर सुनता है
अर्थ बोलते हैं जब
इन शब्‍दों के
विचार एकाएक
हो जाते हैं बलशाली
निश्‍चय की आखि़री सीढ़ी
वो चढ़ चुके होते है
जहाँ उनकी अडिगता को
डिगा पाना मन के लिए भी
संभव नहीं हो पाता !!!

ब्लॉग आर्काइव

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....