रविवार, 13 जनवरी 2019

बचत का सलीका !!

माँ तुम जौहरी तो नहीं थी
न ही कोई व्यापारी
पर परखने का तरीक़ा
बचत का सलीका
कब कहाँ कैसे
खर्च करना है शब्दों को
कहाँ किसी टूटे औऱ
कमज़ोर का सहारा बनकर
उसे ताकतवर बना देना है
ये हुनर बखूबी सिखाया है
तुमने हमें !

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

नये वर्ष की नई खुशियाँ !!

इसे दिसम्बर नहीं
सांता आया कहना चाहिए
इसके काँधे पे
जो झोली है न उसमे से
झाँकती है जनवरी
कुनमुनाता है बसन्त
बिखरा है गुलाल
मचाते हुए धमाल !
..
कच्ची अम्बियों के साथ
मनभावन सावन
झूलों की पींगे
वीर की कलाई पे
बंधने को रेशम की डोर
कितना कुछ समेटे
पटाखों की लड़ी से
झगड़ती वो फुलझड़ी !!
..
समेट कर सारे दिन सुहाने
आया फ़िर से दिसम्बर में
झोली लेकर सांता
हम सबको लुभाने
नये वर्ष की नई खुशियाँ लुटाने !!!
©


गुरुवार, 29 नवंबर 2018

बेहिसाब उम्मीदें !!!!

कोशिशों का एक थैला दिया था
माँ ने बचपन में
जिसमे बेहिसाब उम्मीदें भरी थीं
तभी तो मन आज भी
हार मान कर
चुप बैठता नहीं है !!!!
...

शनिवार, 3 नवंबर 2018

उत्सव के रंग .....

उत्सव के रंग से रंगी हो
द्वार की रंगोली
माँ लक्ष्मी के मङ्गल चरण
हों ड्योढ़ी पर
शुभ लाभ का निवास हो
स्वास्तिक प्रतीक के संग
उत्सव का आनन्द हो
घर के कोने-कोने में
दीपावली की शुभकामनाओं का
प्रकाश अन्तर्मन को
सदा यूँ ही आलोकमय रखे _/\_
....
© सीमा 'सदा'


बुधवार, 24 अक्तूबर 2018

माँ की ममता से !!!!

माँ तुम्हारे
शब्दों की विरासत
मेरी हथेलियों को देती है ताक़त
मन को संबल
कदमों को हौसला
मस्तिष्क को
कभी हार कर भी
नहीं हारने देना
सोचती हूँ
शब्दों में इतनी हिम्मत
पहले तो नहीं थी
जरूर तुमने अभिमंत्रित किया होगा
इन्हें अपनी ममता से
सुना है कि
माँ की ममता से
कोई पार नहीं पा सकता !!!
....


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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....