गुरुवार, 7 मार्च 2019

जन्मदात्री बन !!


मन्नतों के धागे
कच्चे सूत से भले ही बने होते हैं
पर जब तक पूरी न हो फ़रियाद
ये हवा धूप पानी सब सहकर भी
रब की चौखट में हर पल
सज़दे में रहते हैं !

इनका बंधे रहना
गठानों का ना खुलना सबूत है
बड़ी ताकतवर है ये आस्था
सम्बल,भरोसा,विश्वास और धैर्य
पिता, भाई, पति और बेटे के रूप में
जन्म से लेकर मृत्यु तक
श्वास की आस बने
मैं इन दायरों के मध्य रहकर
जन्मदात्री बन इनकी
खुशियों उपलब्धियों के बीज बोती
बिना किसी श्रेय के
करुणा, अनुराग, प्रेम और वात्सल्य की
खाद बन इनकी जड़ों को पोषित कर
बूंद-बूंद तिनका-तिनका सवांरते हुए
इस बात से बनकर अंजान
शक्ति को अपनी बस ममता के
सांचे में डाल रहती पल -पल खुशहाल
मन्नतों के धागे सी !!!




रविवार, 13 जनवरी 2019

बचत का सलीका !!

माँ तुम जौहरी तो नहीं थी
न ही कोई व्यापारी
पर परखने का तरीक़ा
बचत का सलीका
कब कहाँ कैसे
खर्च करना है शब्दों को
कहाँ किसी टूटे औऱ
कमज़ोर का सहारा बनकर
उसे ताकतवर बना देना है
ये हुनर बखूबी सिखाया है
तुमने हमें !

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

नये वर्ष की नई खुशियाँ !!

इसे दिसम्बर नहीं
सांता आया कहना चाहिए
इसके काँधे पे
जो झोली है न उसमे से
झाँकती है जनवरी
कुनमुनाता है बसन्त
बिखरा है गुलाल
मचाते हुए धमाल !
..
कच्ची अम्बियों के साथ
मनभावन सावन
झूलों की पींगे
वीर की कलाई पे
बंधने को रेशम की डोर
कितना कुछ समेटे
पटाखों की लड़ी से
झगड़ती वो फुलझड़ी !!
..
समेट कर सारे दिन सुहाने
आया फ़िर से दिसम्बर में
झोली लेकर सांता
हम सबको लुभाने
नये वर्ष की नई खुशियाँ लुटाने !!!
©


गुरुवार, 29 नवंबर 2018

बेहिसाब उम्मीदें !!!!

कोशिशों का एक थैला दिया था
माँ ने बचपन में
जिसमे बेहिसाब उम्मीदें भरी थीं
तभी तो मन आज भी
हार मान कर
चुप बैठता नहीं है !!!!
...

शनिवार, 3 नवंबर 2018

उत्सव के रंग .....

उत्सव के रंग से रंगी हो
द्वार की रंगोली
माँ लक्ष्मी के मङ्गल चरण
हों ड्योढ़ी पर
शुभ लाभ का निवास हो
स्वास्तिक प्रतीक के संग
उत्सव का आनन्द हो
घर के कोने-कोने में
दीपावली की शुभकामनाओं का
प्रकाश अन्तर्मन को
सदा यूँ ही आलोकमय रखे _/\_
....
© सीमा 'सदा'


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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....