शुक्रवार, 15 जून 2012

कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत

कतरा-कतरा मुहब्‍बत ने जब दम तोड़ा
नफ़रत की दहलीज़ पे
मत पूछ मेरे क़ातिल किस तरह
फिर मैं मुहब्‍बत के ज़नाज़े में
शामिल हुई
...

बेवफ़ाई शिक़ायत फ़रेब बेक़सी
चार कांधे उसको मिले
बेगानों से
परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
दफ़न हो गई
बददुआ की खाक़ पर

45 टिप्‍पणियां:

  1. बेवफ़ाई शिक़ायत फ़रेब बेक़सी
    चार कांधे उसको मिले

    गज़ब का मानवीकरण ...

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  2. शनिवार 16/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

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  3. ना जाने ये बददुआ का सिलसिला कब थमेगा ??

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  4. मार्मिक अभिव्यक्ति। शुभकामनाये।

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  5. बेवफ़ाई शिक़ायत फ़रेब बेक़सी ये
    चार कांधे ..... यूँ ही सब को मिलजाया करते है .....इनकी तो आदत होगई..सुन्दर प्रस्तुति...

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  6. ह्म्म्म्म्म्म
    आज कुछ नया रंग???
    बहुत बढ़िया ...

    सस्नेह.

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  7. परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर

    bahut khub

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  8. परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर

    बहुत संवेदनशील

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  9. उफ़ ……………मोहब्बत तेरी यही कहानी………दिल को छू गयी

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  10. काँच बनने में लगी मेहनत और टूटने की आवाज बेहिसाब होती है..

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  11. दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर,,,,,

    सुंदर प्रस्तुति,,,संवेदन शील रचना,,,,,

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (16-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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    1. दिल को छु जाने वाली पंक्तियाँ सुन्दर

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  13. दर्द ही दर्द ....बेहद गहन ...!!
    मन तरपत हरि दरसन को आज ...

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  14. बेवफ़ाई शिक़ायत फ़रेब बेक़सी
    चार कांधे उसको मिले ...
    bahut badhiya

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  15. "परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर"
    गहन वेदना समाए सुंदर अभिव्यक्‍ति!

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  16. बेवफ़ाई शिक़ायत फ़रेब बेक़सी
    चार कांधे उसको मिले
    बेगानों से
    परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर
    नया अंदाज़ अभिव्यक्ति का ,व्यंजना को जैसे पंख लग गएँ हैं .



    Read more: http://www.dailymail.co.uk/health/article-2159087/Healthy-people-share-bodies-10-000-species-germs.html#ixzz1y5dKc7O2

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  17. मत पूछ मेरे क़ातिल किस तरह
    फिर मैं मुहब्‍बत के ज़नाज़े में
    शामिल हुई

    ये भी प्यार और शिकायत का निराला अंदाज़ हुआ .......

    उत्तर देंहटाएं
  18. परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई ...

    very impressive...

    .

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत भावपूर्ण रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  20. परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई ...
    मोहब्बत हमेशा से चश्मेबद का शिकार होती आई है. दर्द का ब्यान त्रासदी को कह जाता है.

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  21. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (17-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  22. बहुत मर्मस्पर्शी
    परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई ...

    उत्तर देंहटाएं
  23. मोहब्बत को प्रायः कफ़न ही नसीब होता है |

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  24. अच्छी प्रस्तुति । धन्यवाद ।

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  25. परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर

    जबरदस्त मोहब्बत का खाके सुपुर्द होना.

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  26. परायेपन के कफ़न में लिपटी मुहब्‍बत
    दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर

    ....बहुत मार्मिक....

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  27. दर्दभरी भावपूर्ण रचना..

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  28. दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई
    बददुआ की खाक़ पर
    आह ये मुहब्बत !

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  29. गहनता से परिपूर्ण रचना ......

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  30. दुआओं के फ़ूलो को तरसती हुई
    दफ़न हो गई ...
    और कहते हैं.. कि मोहब्बत करनेवाले इस सिले में भी ख़ुशी ख़ुशी मर जाते हैं!!
    बेहद खूबसूरत

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....