शुक्रवार, 1 जून 2012

तुम मानो या नहीं ...!!!














तुम मानो या नहीं
पर कोई तो है सर्वशक्तिमान
जो सबल बनाता है निर्बल को
तुम्‍हारी हर आवाज़ को सुनता है
पलटकर जवाब भी देता है
तुम समझ पाओ या नहीं
देख पाओ या नहीं
पर कोई तो है ... 
कभी देखा है तुमने
काई पर चलकर जिसपर चलते हुए
यह जानते हो कि फिसलन है यहां
पर कितनी मजबूती से तुम्‍हारे
कदम पड़ते हैं काई पर
कोई तो है ...
जो देता है मजबूती ...
पराजय को विजय के द्वार पर ले जाने की शक्ति
सर्वशक्तिमान के सिवाय किसी के पास नहीं ये
...
जीवन और मृत्‍यु से परे
अनश्‍वर आत्‍मा ''एकोsहम् द्वितीयोनास्ति''
जगत और जीवात्‍मा के कथन को सिद्ध
करती ... प्रत्‍येक कदम पर
जीवन दर्शन दिखलाती
कभी मन का संताप बनती
कभी ह्रदय का उल्‍लास बनती
कर्तव्‍य का बोध कराती
कभी बांधती मर्यादाओं में
कभी बनती तुम्‍हारी हथेली में
तक़दीर की कोई रेखा
बताओ किसने देखा है तन की
इस सूक्ष्‍मता को
जो हर प्राणी के शरीर में
सर्वशक्तिमान होकर विराज़मान है
अदृश्‍य होकर भी वह
कण-कण में समाहित है
तुम मानो या नहीं पर कोई तो है ...

34 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन और मृत्‍यु से परे
    अनश्‍वर आत्‍मा ''एकोsहम् द्वितीयोनास्ति''.....सत्यम शिवम सुन्दरम....

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  2. सर्वशक्तिमान होकर विराज़मान है
    अदृश्‍य होकर भी वह
    कण-कण में समाहित है

    तुम मानो या नहीं पर कोई तो है ...

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर भावपूर्ण रचना,,,,,

    RECENT POST ,,,, काव्यान्जलि ,,,, अकेलापन ,,,,

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  3. सर्वशक्तिमान होकर विराज़मान है
    अदृश्‍य होकर भी वह
    कण-कण में समाहित है
    तुम मानो या नहीं पर कोई तो है...!!
    .......koi maane ya naa maane par ye satya hai .

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  4. है...बिलकुल है......हमारा होना ही इसकी पुष्टि करता है......

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  5. सच ...कोई तो है .... सुन्दर प्रस्तुति

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  6. तभी तो उसे परमपिता कहते हैं.. पालनहार!!
    बहुत अच्छी कविता!!

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  7. पर कोई तो है सर्वशक्तिमान
    जो सबल बनाता है निर्बल को
    तुम्‍हारी हर आवाज़ को सुनता है

    bahut khub

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  8. सच है और हमारे न मानने से व 'नहीं' नहीं हो जाता है वो 'है' तो है ....सुन्दर प्रस्तुति।

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  9. कोई तो है ...
    जो देता है मजबूती ...
    पराजय को विजय के द्वार पर ले जाने की शक्ति
    सर्वशक्तिमान के सिवाय किसी के पास नहीं ये
    the ALLMIGHTY .OMNI PRESENCE.

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  10. हर तरफ हर जगह हर कही पे है उसकी का नूर ...
    कोई तो है जिसके आगे है आदमी मजबूर !
    अवश्य !

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  11. सही है। जो अनुभव करना चाहेगा,वही जान पाएगा।

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  12. अदृश्‍य होकर भी वह
    कण-कण में समाहित है
    तुम मानो या नहीं पर कोई तो है ...

    bahut sundar bhaav ..!!

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  13. अदृश्‍य होकर भी वह
    कण-कण में समाहित है
    तुम मानो या नहीं पर कोई तो है ...

    ....बिलकुल सच...इसे सिर्फ़ अनुभव किया जा सकता है...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  14. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  15. उसकी इच्छा के बिना कुछ संभव नहीं!
    सुन्दर कविता!

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  16. यह विश्वास ही सबसे बडा सम्बल है ।सुन्दर कविता ।

    उत्तर देंहटाएं
  17. यह विश्वास ही सबसे बडा सम्बल है ।सुन्दर कविता ।

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  18. वो हर कहीं विराजमान है..... बस विश्वास बना रहे ....

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  19. यही विश्वास हमें हौसला देता है....
    बहुत ही बेहतरीन रचना..

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  20. कोई तो है ...
    जो देता है मजबूती ...
    पराजय को विजय के द्वार पर ले जाने की शक्ति
    सर्वशक्तिमान के सिवाय किसी के पास नहीं ये

    सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  21. सच कहा कोई तो है ....जो जिंदगी ले लेता है और वहां डाक्टर ,दवा दुआ सब फेल हो जाते हैं इंसान के बस में कुछ भी नहीं रहता ...सर्वशक्तिमान ....बहुत सुन्दर लिखा है

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  22. तुम मानो या नहीं
    पर कोई तो है सर्वशक्तिमान
    जो सबल बनाता है निर्बल को
    तुम्‍हारी हर आवाज़ को सुनता है
    पलटकर जवाब भी देता है
    तुम समझ पाओ या नहीं
    देख पाओ या नहीं
    पर कोई तो है ...

    sach kaha ...yahi hai aek sachchai ....

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  23. बिलकुल है और वो पास ही है ... बस देख नहीं पाते हम उसे ...
    सुन्दर रचना ...

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  24. achha likha hai, sach hai koi to hai jo harpal sang hai, apni anoobhooti karata hai par ise jaanna aasaan nhi to kathin bhi nahi.

    shubhkamnayen

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  25. आपकी कविता का भाव मन को स्पंदित कर गया । किसी भी कविता में भाव-प्रवणता का समन्वय उसे सार्थकता प्रदान करता है । मेरे नए पोस्ट 'खड़ी बोली का प्रतिनिधि कवि-मैथिलीशरण गुप्त" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  26. 'विश्वासं फल दायकं'. सुंदर अभिव्यक्ति.

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....