बुधवार, 6 जून 2012

'' तुम मेरी जिन्‍दगी हो ''














तर्जनी और मध्‍यमा के साथ
अंगूठे के पोर में
सिमटी कलम कागज के साथ
खेलना चाहती है
कहना चाहती है कोई नया शब्‍द
जो तुम तक पहुंच कर
हिला दे तुम्‍हारे अन्‍तर्मन को
...
कभी हँसी का प्रतीक बना
तुम्‍हारे चेहरे की कल्‍पना करती
और मुस्‍करा देती मन ही मन
कभी लिखती ... नहीं समझे !
और फिर खुद ही
हँस देती ... जब कहूँगी
तब तो कुछ समझोगे ...
....
विस्मित सा कागज !! सोचता रहा
बड़ी देर तक
क्‍या कहना है
क्‍या समझना है
भला मैं क्‍या जानूँ कुछ लिखो तो
कोई शब्‍द जिसके अर्थ गहरे हों
भले उस पर लाख पहरे हों
तभी उसने देखा
कितनी आत्‍मीयता से उसने
लिखा था ये
'' तुम मेरी जिन्‍दगी हो ''
और मुझे त़ह कर रख दिया
डायरी के बीचो बीच
कलम का ठहरना  कागज का सिमटना
ये त़य कर चुका था
अब शेष नहीं कुछ कहने को .... !!!

28 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई अब शेष नहीं कुछ कहने को
    बहुत सुंदर रचना

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  2. '' तुम मेरी जिन्‍दगी हो ''
    और मुझे त़ह कर रख दिया
    डायरी के बीचो बीच
    कलम का ठहरना कागज का सिमटना
    ये त़य कर चुका था,,,,,

    अब शेष नहीं कुछ कहने को ....

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  3. waah ..sundar rachna ...
    blog ke rang bahut sundar lage ...

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  4. तुम मेरी जिन्‍दगी हो ''
    और मुझे त़ह कर रख दिया
    डायरी के बीचो बीच
    कलम का ठहरना कागज का सिमटना
    ये त़य कर चुका था
    अब शेष नहीं कुछ कहने को .... !!!बहुत ही अच्छी.... जबरदस्त अभिवयक्ति.....वाह!

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  5. कितनी आत्‍मीयता से उसने
    लिखा था ये
    '' तुम मेरी जिन्‍दगी हो ''

    ....इसके बाद कहने को बचा ही क्या है....बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति....

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  6. कागज और कलम, दोनों ही निर्धारित कर लेते हैं कि कब कविता समाप्त हो गयी है।

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  7. '' तुम मेरी जिन्‍दगी हो '' बस इससे आगे कुछ नही ...इसी में ह्रदय की सारी सच्चाई छुपी है..

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  8. इसके बाद भि कहने को कुछ बचता है क्या? इसके बाद तो सिर्फ़ समझना है।

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  9. Kya khoob likhtee hain aap....rachanayen hamesha anoothee hoti hain!

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  10. वाह बहुत खूब ....सच कवि ही ऐसा कर सकता है

    कागज़ कलम का संवाद मन को मोह लिया

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  11. कलम का ठहरना कागज का सिमटना
    ये त़य कर चुका था
    अब शेष नहीं कुछ कहने को .... !!!

    Beautiful !!! sach kaha apne.. lekhak ke liye kalam ka thaharna aur kagaj ka simatna hi tay karta hai.. ki kuch kahne ko.. shesh raha ya nahin nahin .

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  12. '' तुम मेरी जिन्‍दगी हो '' इसी में सिमटा हैं जीवन का सच....

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  13. कहने वाले ने तो सब कह दिया ...
    अब सोंचने वाले की बारी है ....
    खूब कहा !

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  14. कलम का कहना और कागज़ को कहना सुन्दर अभिव्यक्ति

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  15. कलम का ठहरना कागज का सिमटना
    ये त़य कर चुका था
    अब शेष नहीं कुछ कहने को .... !!!wah......

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  16. इसके बाद कुछ शेष भी नहीं रह जाता ... जिंदगी बना लेना किसी कों ... प्यार की पराकाष्ठा है ...

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  17. सब कुछ कहने के बाद क्या शेष रहेगा कहने को

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  18. प्रवीण जी की बात से सहमत हूँ बहुत ही बढ़िया गहन भाव अभिव्यक्ति....

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  19. कलम का ठहरना कागज का सिमटना
    ये तय कर चुका था
    अब शेष नहीं कुछ कहने को .... !!!

    बहुत खूबसूरती से भाव को कहा गया है. सुंदर सृजन.

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....