गुरुवार, 1 नवंबर 2012

शब्‍दों के रिश्‍ते हैं शब्‍दों से ....













शब्‍दों के रिश्‍ते हैं
शब्‍दों से
कोई चलता है उँगली पकड़कर
साथ - साथ
कोई मुँह पे उँगली रख देता है
कोई चंचल है इतना
झट से जुबां पर आ जाता है
कोई मन ही मन  कुलबुलाता है
किसी शब्‍द को देखो कैसे खिलखिलाता है
....
दर्द के साये में शब्‍दों को
आंसू बहाते देखा है
शब्‍दों की नमी
इनकी कमी
गुमसुम भी शब्‍दों की द‍ुनिया होती है
कुछ अटके हैं ... कुछ राह भटके हैं
कितने भावो को समेटे ये
मेरे मन के आंगन में
अपना अस्तित्‍व तलाशते
सिसकते भी हैं 
....
जब भी मैं उद‍ासियों से बात करती हूँ,
जाने कितनी खुशियों को
हताश करती हूँ
नन्‍हीं सी खुशी जब मारती है  किलकारी,
मन झूम जाता है उसके इस
चहकते भाव पर
फिर मैं  शब्‍दों की उँगली थाम
चलती हूँ हर हताश पल को
एक नई दिशा देने
कुछ शब्‍द साहस की पग‍डंडियों पर
दौड़ते हैं मेरे साथ-साथ
कुछ मुझसे बातें करते हैं
कुछ शिकायत करते हैं उदास मन की
कुछ गिला करते हैं औरों के बुरे बर्ताव का
मैं सबको बस धैर्य की गली में भेज
मन का दरवाजा बंद कर देती हूँ !!!

40 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दों से शब्दों में बयां करती बेहद बेहतरीन उम्दा रचना, गहरी सोंच वाह मज़ा आ गया बधाई स्वीकारें।

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  2. शत्रु-शस्त्र से सौ गुना, संहारक परिमाण ।
    शब्द-वाण विष से बुझे, मित्र हरे झट प्राण ।।

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    1. रविकर जी ये पंक्तियाँ साँझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  4. शब्द ही तो बुलाते हैं भावनाओं की मिटटी से सने ...इस रिश्ते में सच्चाई हो तो शब्द शब्द अमरत्व पा लेते हैं ...

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  5. आपने अपने सुंदर शब्दों को एक मीठी सी आवाज़ दे दी ...एक खूबसूरत सा अहसास !

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  6. शब्दों की अनोखी दास्ताँ..आभार!

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  7. शब्द गहन हो जाते हैं,
    मन की सब कह जाते हैं।

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  8. बहुत ही अच्‍छी अभिव्‍यक्ति..

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  9. बस शब्द ही तो हैं जो हमेशा साथ चलते हैं ...

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  10. फिर मैं शब्‍दों की उँगली थाम
    चलती हूँ हर हताश पल को
    एक नई दिशा देने

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  11. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  12. शब्दों में बहुत शक्ति होती है...
    यह फूल सा सहला सकती है और तीर सा बेध सकती है
    सार्थक रचना|

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  13. कुछ शिकायत करते हैं उदास मन की
    कुछ गिला करते हैं औरों के बुरे बर्ताव का
    मैं सबको बस धैर्य की गली में भेज
    मन का दरवाजा बंद कर देती हूँ !!!
    बेहद भाव पूर्ण प्रेरणादायी अभिव्यक्ति....
    सादर !!!

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  14. सारा सार शब्दों में ही छुपा है...गहन अभिव्यक्ति

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  15. शब्‍दों के रिश्‍ते हैं
    शब्‍दों से
    कोई चलता है उँगली पकड़कर
    साथ - साथ
    कोई मुँह पे उँगली रख देता है
    कोई चंचल है इतना
    झट से जुबां पर आ जाता है
    कोई मन ही मन कुलबुलाता है
    किसी शब्‍द को देखो कैसे खिलखिलाता है
    ....
    दर्द के साये में शब्‍दों को
    आंसू बहाते देखा है
    शब्‍दों की नमी
    इनकी कमी
    गुमसुम भी शब्‍दों की द‍ुनिया होती है
    कुछ अटके हैं ... कुछ राह भटके हैं
    कितने भावो को समेटे ये
    मेरे मन के आंगन में
    अपना अस्तित्‍व तलाशते
    सिसकते भी हैं
    ....
    जब भी मैं उद‍ासियों से बात करती हूँ,
    जाने कितनी खुशियों को
    हताश करती हूँ
    नन्‍हीं सी खुशी जब मारती है किलकारी,
    मन झूम जाता है उसके इस
    चहकते भाव पर
    फिर मैं शब्‍दों की उँगली थाम
    चलती हूँ हर हताश पल को
    एक नई दिशा देने
    कुछ शब्‍द साहस की पग‍डंडियों पर
    दौड़ते हैं मेरे साथ-साथ
    कुछ मुझसे बातें करते हैं
    कुछ शिकायत करते हैं उदास मन की
    कुछ गिला करते हैं औरों के बुरे बर्ताव का
    मैं सबको बस धैर्य की गली में भेज
    मन का दरवाजा बंद कर देती हूँ !!!
    sada, सदा पर 10:36:00 am
    सम्प्रेषण में बे -मिसाल रचना ,शब्दों की जादूगरी को छकाती ,भाव को पगाती चाशनी में भावों की .बधाई .

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  16. मैं सबको बस धैर्य की गली में भेज
    मन का दरवाजा बंद कर देती हूँ !!!
    yahi sahi hai ....

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  17. मैं सबको बस धैर्य की गली में भेज
    मन का दरवाजा बंद कर देती हूँ !!!


    किन शब्दों को किस प्रकार की दिशा देनी चाहिए ...

    बहुत कुछ सिखने को मिला.

    आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा।मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत हैं।अगर आपको अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग से भी जुड़ें।धन्यवाद !!

    http://rohitasghorela.blogspot.com/2012/10/blog-post.html

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  18. शब्दों से रिश्ते होते भी हैं और शब्द रिश्ते भी बना देते हैं .... सुंदर प्रस्तुति

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  19. संगीता दी ने मेरे मुँह की बात छीन ली.. शब्दों का चरित्र-चित्रण इसे कहते हैं!!

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  20. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  21. धीरज बहुत कुछ देता है ...
    शुभकामनायें आपको !

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  22. शब्दों से ही रिश्ते बनते बिगड़ते हैं विश्लेषक पोस्ट की बधाई .

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  23. बहुत बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति !:)
    कभी कभी शब्द खामोश भी हो जाते हैं...वो खुद निःशब्द हो जाते हैं...~जैसे हमारे शब्द.. ~तारीफ़ के लिए शब्द ही नहीं मिल पा रहे हैं... :(
    ~सादर !

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  24. बहुत सुंदर
    क्या कहने
    सच में ऐसी रचना कभी कभी ही पढने को मिलती है

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  25. शब्‍द ही हैं जो हमें निशब्‍द भी कर देते हैं।

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  26. बहुत उत्कृष्ट...दिल को छूते शब्द...

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  27. हर खट्टे मीठे लम्हों में ये शब्द ही साकार अभिव्यक्ति कर पाते हैं ..
    सुन्दर।
    सादर
    मधुरेश

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  28. आपके शब्दों में जादू है. बहुत जानदार और शानदार प्रस्तुति.

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  29. शब्दों से की बातें शब्द भर भर
    निःशब्द ही शब्दों ने थामी अंगुलियाँ !
    खूबसूरत शब्दों की दास्तान !

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  30. सदा दी आपकी इस रचना को कविता मंच पर साँझा किया गया है

    http://kavita-manch.blogspot.in

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....