मंगलवार, 18 जून 2019
गुरुवार, 13 जून 2019
सारे हल आज एकजुट थे !!
पापा कोई जादू तो नहीं है
मेरे पास, है तो बस निष्ठा
जो उम्मीद भरी आँखों में
विश्वास और धैर्य की
उँगली थाम के जब चलती है
तो लगता है आप साथ हों
तो बस मुश्किलें भी घबरा जाती हैं
बुरा वक़्त देकर दस्तक़
लौट जाता है
एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया था
चुनौतियों ने
परेशानियों को देकर समझाइश भेजा भी
पर सारे हल आज एकजुट थे
इसी निष्ठा से
कोई ना कोई तो
तेरे काम जरूर आएगा
बस मन के दरवाज़े पे
भरोसे की चिटकनी लगा कर रखना
कोई भी परेशानी
भीतर प्रवेश न कर सकेगी !!
मेरे पास, है तो बस निष्ठा
जो उम्मीद भरी आँखों में
विश्वास और धैर्य की
उँगली थाम के जब चलती है
तो लगता है आप साथ हों
तो बस मुश्किलें भी घबरा जाती हैं
बुरा वक़्त देकर दस्तक़
लौट जाता है
एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया था
चुनौतियों ने
परेशानियों को देकर समझाइश भेजा भी
पर सारे हल आज एकजुट थे
इसी निष्ठा से
कोई ना कोई तो
तेरे काम जरूर आएगा
बस मन के दरवाज़े पे
भरोसे की चिटकनी लगा कर रखना
कोई भी परेशानी
भीतर प्रवेश न कर सकेगी !!
शनिवार, 1 जून 2019
सोमवार, 20 मई 2019
तुम इच्छाशक्ति हो !!
मेरे पास सपने थे
तुमने उम्मीद बँधाई
मेरे पास हौसला था
तुमने पंख लगाये
मेरे पास
कुछ कर गुज़रने की
च़ाहत थी
तुमने मुझे
बुलंदी पे पहुँचाया !
....
मैने तुम्हें
आस-पास अपने
कभी देखा नहीं
पर हमेशा साथ पाया
माँ कहती है
तुम इच्छा शक्ति हो
जिसे जो चाहिये होता है
उसे वो मिल जाता है
तुम्हारे साथ होने से !!!
....
तुमने उम्मीद बँधाई
मेरे पास हौसला था
तुमने पंख लगाये
मेरे पास
कुछ कर गुज़रने की
च़ाहत थी
तुमने मुझे
बुलंदी पे पहुँचाया !
....
मैने तुम्हें
आस-पास अपने
कभी देखा नहीं
पर हमेशा साथ पाया
माँ कहती है
तुम इच्छा शक्ति हो
जिसे जो चाहिये होता है
उसे वो मिल जाता है
तुम्हारे साथ होने से !!!
....
शुक्रवार, 10 मई 2019
माँ, तुलसी और गुलमोहर ...
माँ कहती थी
आँगन के एक कोने में तुलसी
और दूसरे में गुलमोहर हो
तो मन से बसंत कभी नहीं जाता
तपती धूप में भी
खिलखिलाता गुलमोहर जैसे
कह उठता हो
कुछ पल गुजारो तो सही
मेरे सानिध्य में
मन का कोना-कोना
मेरी सुर्ख पत्तियों के जैसा
खुशनुमा हो जाएगा!
…
नहीं है इस बड़े महानगर में
गुलमोहर का पेड़
मेरे आस-पास
पर कुछ यादें आज भी हैं
इसके इर्द-गिर्द
बचपन की, माँ की,
और इसकी झरतीं सुर्ख पत्तियों की
मेरी यादों में गुलमोहर
हमेशा मेरे साथ ही रहेगा
मेरे पीहर की तरह
अपनेपन की छाँव लिये !!
..
आँगन के एक कोने में तुलसी
और दूसरे में गुलमोहर हो
तो मन से बसंत कभी नहीं जाता
तपती धूप में भी
खिलखिलाता गुलमोहर जैसे
कह उठता हो
कुछ पल गुजारो तो सही
मेरे सानिध्य में
मन का कोना-कोना
मेरी सुर्ख पत्तियों के जैसा
खुशनुमा हो जाएगा!
…
नहीं है इस बड़े महानगर में
गुलमोहर का पेड़
मेरे आस-पास
पर कुछ यादें आज भी हैं
इसके इर्द-गिर्द
बचपन की, माँ की,
और इसकी झरतीं सुर्ख पत्तियों की
मेरी यादों में गुलमोहर
हमेशा मेरे साथ ही रहेगा
मेरे पीहर की तरह
अपनेपन की छाँव लिये !!
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- सदा
- मन को छू लें वो शब्द अच्छे लगते हैं, उन शब्दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....