गुरुवार, 13 जून 2019

सारे हल आज एकजुट थे !!

पापा कोई जादू तो नहीं है
मेरे पास, है तो बस निष्ठा
जो उम्मीद भरी आँखों में
विश्वास और धैर्य की
उँगली थाम के जब चलती है
तो लगता है आप साथ हों
तो बस मुश्किलें भी घबरा जाती हैं
बुरा वक़्त देकर दस्तक़
लौट जाता है
एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया था
चुनौतियों ने
परेशानियों को देकर समझाइश भेजा भी
पर सारे हल आज एकजुट थे
इसी निष्ठा से
कोई ना कोई तो
तेरे काम जरूर आएगा
बस मन के दरवाज़े पे
भरोसे की चिटकनी लगा कर रखना
कोई भी परेशानी
भीतर प्रवेश न कर सकेगी !!


7 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (15 -06-2019) को "पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक- 3367) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. विश्वास और धैर्य की
    उँगली थाम के जब चलती है
    तो लगता है आप साथ हों
    तो बस मुश्किलें भी घबरा जाती हैं
    बहुत सुंदर रचना ,पापा के होने के एहसास भर से सारी मुस्किले आसान हो जाती हैं।

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन रक्तदान करके बनें महादानी : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    जवाब देंहटाएं
  4. आस्था व विश्वास बहुत बड़े सम्बल हैं .

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति मन तक गहरे उतर गई उस अथाह विश्वास में कितनी आस्था और कितनी दृढ़ता है
    अप्रतिम रचना।

    जवाब देंहटाएं
  6. कई बार उम्मीद, आस्था बड़े से बड़ा कार्य खुद कर जाती है ...
    क्योंकि किसी का संबल रहता है साथ जो हिम्मत देता है ...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....