शनिवार, 7 अगस्त 2021

तुम बुरा मत मानना !!!


 










तुम और मैं

अक़्सर अब शब्दों में

मिलने लगे

विचारों में टटोलने लगे हैं

एक-दूसरे को 

अपनेपन की दीवारों पर

कड़वाहटों की दरारें

उभर आईं हैं 

जरूरत है इनको मरम्मत की !

ये जो तुम

सुप्रभात के नाम पर  स्टेटस 

लगा लेते हो न 

इस पर अब कुदृष्टि लग गई है

अर्थ इनके जाने कितनी बार

अनर्थ कर देते हैं,

प्रेम, अनुराग, मित्रता

सबको लुभाने में सक्षम है

पर इन सुविचारों के रूप

अब परिवर्तित हो गए हैं,

हालातों के मारे

अपनों से छले गए लोगों ने

प्रेरक विचारों को

हथियार बना लिया है

तभी तो फ़रेब, धोखे की

तीख़ी मार से 

प्यार भी घायल है

अपनेपन की आँखों में नमी है !!

….

न, तुम बुरा मत मानना

बस कुछ शब्दों की मैंने

आज यूँ ही मरम्मत की है,

कुछ जख्मी शब्दों को

दिलाई है दर्द से निज़ात भी

कुछ हिचकियों को ...

पानी भी पिलाया है

उठक-बैठक करते शब्द

कलम से माँग रहे हैं माफ़ी

कुंठित सोच को

न होने देंगे, खुद पर हावी 

अनुचित न करेंगे न करने देंगे !!!

© सीमा 'सदा'


शनिवार, 31 जुलाई 2021

रूठने और मनाने की तस्वीरें !!


 











एक मुस्कराहट 

आज फिर 

तुम्हारे नाम की 

सजी है मेरे लबों पर

कुछ शैतानियों के

आज फ़िर पकड़े हैं कान,

कुछ बूंदे बरसीं हैं

खामोशी से

तेरी यादों की,

मन ही मन 

बना रही हूँ कोलाज़

रूठने और मनाने की 

तस्वीरें लगाकर ..

इन लम्हों को 

मित्रता दिवस की

मुबारकबाद जो देनी है !!!

...

© सीमा 'सदा'

#मित्रता_दिवस



मंगलवार, 27 जुलाई 2021

रिश्ता मन का !!

 

एक रिश्ता
जिसकी बुनियाद
बस मन ही होता है
उसकी नीव में
भरा होता है
संबंधों का गारा
जिसे बनाया गया होता है
अपनेपन के पानी से
एक निश्चित मात्रा
ना ठोस ना तरल
...
पानी की यही ख़ासियत है
जिसमे मिला दो
उस जैसा हो जाता है
रिश्ता मन का
पानी की पारदर्शिता लिये
जहाँ नमी हो
वो पौधे सूखा नहीं करते
ऐसा माँ कहती है 😉...........


बुधवार, 19 मई 2021

आँखों में आँखे डालकर !!!

 

वक़्त के पास
इन दिनों मुश्किलों की
लंबी कतार है …
नित नये संक्रमणों के साथ,
आँधी-पानी और तूफ़ान भी है !

कहती है उम्मीद तभी
कानों के पास आहिस्ता से,
डरकर भी लड़ी है, जंग कोई किसी ने
संभल कर चलो, हिम्मत बनो
किसी उदास मन को
एक मुस्कान देकर, 
दुआओं के कुछ बोल सौंप दो
जिंदादिली से, देखना तुम
गुज़र जाएगा ये वक़्त,
तमाम मुश्किलों की
आँखों मे आँखे डालकर !!!
© सीमा 'सदा'
#उम्मीद

....




शनिवार, 8 मई 2021

माँ की दुआओं में ....

 


बड़ी बरक़त देखी

मैंने माँ की दुआओं में

मुड़-मुड़ कर पलटती रहीं

जब भी मुश्किलें

माँ अपनी हथेली 

मेरे सर रख देती !!

....



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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....