शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

भीगा चेहरा ...

मेरे आंसुओ से भीगा चेहरा

तुम्‍हें कभी अच्‍छा नहीं लगता कि

मैं रोऊं

पर कारण जरूर बन जाते हो

कभी देर से आने पर

कभी बिना कुछ कहे

चले जाने पर

कभी कभी हंस के मनाने पर ।


17 टिप्‍पणियां:

  1. Oh! bilkul sahi baat aur sateek abhivykati......... bilkul aisa hi hota hai..... hamare saath kai baar.,......... kai baar hi nahi........hamesha.... aisa hi hota hai...

    पर कारण जरूर बन जाते हो..... yeh line bahut sateek rahi....

    bahut achchi lagi yeh kavita.....

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  2. बहुत ही कम शब्दों में बहुत अच्छी अभिव्यक्ति, बधाई !!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. पर कारण जरूर बन जाते हो

    कभी देर से आने पर

    कभी बिना कुछ कहे

    चले जाने पर

    कभी कभी हंस के मनाने पर ।

    Bahut khoob, behtareen !

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut hi badiya
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    aapke bahut sarre future fans aapki kavitayein padne ka intezaar kar rahein hai ..do login and post.

    उत्तर देंहटाएं
  5. अनुभव को शेर मे बढ़िया ढंग से पिरोया है!

    उत्तर देंहटाएं
  6. शायद एक कारण
    यह भी बन जाता होगा
    रोना चाहो
    और न रो पाने का

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत उम्दा भाव उकेरे..वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  8. इतना प्यारा चेहरा आंसुओं से भीगा हमें मंजूर नहीं ...
    सिर्फ और सिर्फ मुस्कुराएँ ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. नायिकाभेद में तो ये एक लक्षण प्रकार है।
    डाक्साब को इत्तला करिए।

    अत्युत्तम रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. kuch hi shabdon mein kahi ..... gahri baat .... is baat ko kabhi kabhi aap zindagi mein bhi mahsoos kiya ja sakta hai ... achha likha

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....