शनिवार, 1 अगस्त 2009

सितारों से नजदीकियां . . .

धरती को मां,

चांद को मामा

इन रिश्‍तों से

जिन्‍दा रखी

मुस्‍कराहट मैने ।


बदलियों में छुप जाता,

चांद जब भी

सितारों से नजदीकियां,

रखी मैने ।


रातें खामोशी की,

चादर ओढ़ लेती जब,

उजालों के लिए,

खिड़कियां खु‍ली

रखी मैने ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. रातें खामोशी की,

    चादर ओढ़ लेती जब,

    उजालों के लिए,

    खिड़कियां खु‍ली

    रखी मैने ।
    badhiya bhav..badhiya rachana..dher sari badhayi..

    उत्तर देंहटाएं
  2. सदा जी
    बहुत खूबसूरत भाव की कविता
    "उजालों के लिए,
    खिड़कियां खु‍ली
    रखी मैने ।"
    वाह

    उत्तर देंहटाएं
  3. रातें खामोशी की,
    चादर ओढ़ लेती जब,
    उजालों के लिए,
    खिड़कियां खु‍ली
    रखी मैने


    खूबसूरत शब्द संयोजन और लाजवाब भाव हैं.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. amazig poem hai ji ...kam shabdo me aapne ek sasaar rach diya hai.. badhai


    aabhar

    vijay

    pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....