रविवार, 27 दिसंबर 2020

एक दुआ !!!

पावन सी एक दुआ

तेरे हक में

कच्चे सूत की

पक्के रँग वाली बाँध दी है

उम्मीद की गठानें मारकर!

..

जब भी गूँजेंगे

मंदिर में घण्टियों के स्वर

ईश्वर को इन

मन्नतों का स्मरण

जरूर होगा

विश्वास की डोर

नेह से बंधी

डोलती रहती है आगे-पीछे

पवित्र स्पर्श से !!!

...



शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

एक चुटकी उम्मीद की !!!

 ये हौसला है न

इसको मैंने नजरें उठाकर

देखा भी नहीं,

पर जितनी बार टूटती हूँ मैं

उतनी बार इसे

अपने आस-पास ही देखती हूँ !

…

एक चुटकी उम्मीद की

बजाना कभी

उदासियां भी खिलखिलाकर

गले लग जाती हैं

खामोशियाँ बतियाने लगती हैं

आपस में

और मन चल पड़ता है

एक नई डगर पे !!

.....



सोमवार, 23 नवंबर 2020

रिश्तों की उम्र लम्बी हो जाती है !!


आंकलन तेरा,

तेरे बग़ैर तेरा जब भी किया

सारी कमियों को

नजरअंदाज मन ने कर दिया

बिना मेरे कहे ही

सच तो यही है न,

कि दिलों के रिश्तों में...

दिमाग़ का दख़ल, न रखा जाये

तो, रिश्तों की उम्र लम्बी हो जाती है !!!





सोमवार, 2 नवंबर 2020

कड़वी जिंदगी का टॉनिक !!!

 ...1

ये सुधियाँ भी

हुई बावरी देखो

चंचल मन।

…2

मीठी-सी यादें
कड़वी जिंदगी का
टॉनिक जैसे।
...3
सूनी मुँडेर
यादों का कागा बोले,
मन चहके।
...4
मन की नदी,
यादों के सागर से
मिली खो गई।
...5
यादों की डोर
बाँधे मन– पतंग
उड़ती जाए।
...6
यादों के मोती
चुगता जाए मन
फिर भी भूखा।

...



रविवार, 6 सितंबर 2020

निर्मल स्नेह भर अँजुरी में ...

 


मन की नदी में 

तर्पण किया है पापा भावनाओं से,

भीगा सा मन लिए ...

इस पितृपक्ष 

फिर बैठी हूँ आकर, भोर से ही

छत पर, जहाँ कौए के 

कांव - कांव करते शब्द

और सूरज की बढ़ती लालिमा

के मध्य, निर्मल स्नेह भर अंजुरी में

कर रही हूँ अर्पित, 

नेह की कुछ बूंदें गंगाजल के संग 

आशीष की अभिलाषा लिए!!!

…..

© सीमा 'सदा'






    

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....