शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

एक चुटकी उम्मीद की !!!

 ये हौसला है न

इसको मैंने नजरें उठाकर

देखा भी नहीं,

पर जितनी बार टूटती हूँ मैं

उतनी बार इसे

अपने आस-पास ही देखती हूँ !

एक चुटकी उम्मीद की

बजाना कभी

उदासियां भी खिलखिलाकर

गले लग जाती हैं

खामोशियाँ बतियाने लगती हैं

आपस में

और मन चल पड़ता है

एक नई डगर पे !!

.....



11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (20-12-2020) को   "जीवन का अनमोल उपहार"  (चर्चा अंक- 3921)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. वाह ! आपकी आशाभरी दृष्टि सदा राह दिखाती है

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  3. सुंदर.... हृदयस्पर्शी रचना....

    जवाब देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....