गुरुवार, 7 मार्च 2019

जन्मदात्री बन !!


मन्नतों के धागे
कच्चे सूत से भले ही बने होते हैं
पर जब तक पूरी न हो फ़रियाद
ये हवा धूप पानी सब सहकर भी
रब की चौखट में हर पल
सज़दे में रहते हैं !

इनका बंधे रहना
गठानों का ना खुलना सबूत है
बड़ी ताकतवर है ये आस्था
सम्बल,भरोसा,विश्वास और धैर्य
पिता, भाई, पति और बेटे के रूप में
जन्म से लेकर मृत्यु तक
श्वास की आस बने
मैं इन दायरों के मध्य रहकर
जन्मदात्री बन इनकी
खुशियों उपलब्धियों के बीज बोती
बिना किसी श्रेय के
करुणा, अनुराग, प्रेम और वात्सल्य की
खाद बन इनकी जड़ों को पोषित कर
बूंद-बूंद तिनका-तिनका सवांरते हुए
इस बात से बनकर अंजान
शक्ति को अपनी बस ममता के
सांचे में डाल रहती पल -पल खुशहाल
मन्नतों के धागे सी !!!




22 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 10 मार्च 2019 को साझा की गई है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-03-2019) को "जूता चलता देखकर, जनसेवक लाचार" (चर्चा अंक-3268) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत प्रभावी और भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  4. बहुत सुंदर कविता।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    iwillrocknow.com

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  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .....

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  6. भावपूर्ण .... ये आस्थाएं हैं तो जीवन को डोर भी है ... अन्यथा दिशाहीन पशु ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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  7. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को शुभकामनायें : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  8. आस्था और विश्वास के बल पर ही जीवन एक लय में बंधा रहता है..

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  9. शानदार उम्दा भावपूर्ण रचना ,धन्यवाद आपका ,सबने ठीक ही कहा है ।

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....