सोमवार, 9 जनवरी 2012

यही अस्‍त्र शेष था ....













हर श‍ब्‍द व्‍यथित है क्‍यूं
इसे पीड़ा का भान है
पढ़ता है मन ही मन अन्‍तर्मन को
मेरे बिखरने को  देता है शब्‍द
मेरे मौन को कहता है
सुनता है ध्‍यान से
दर्द ने कब कहा आह !
खुशी ने पकड़ी मेरी बांह
मुस्‍कराया था कब मैं
अपने ही पागलपन पर ....
कितना व्‍याकुल था
तेरे आने पर
कितना टूटा था तेरे जाने पर
सन्‍नाटा गहरा था
मन पे तनहाईयों का पहरा था
पर मेरा साथ नहीं छोड़ा शब्‍दों ने
नाता जलधि सा गहरा था  ....
मैं लांघ जाना चाहता था
हर दर्द को हंसी की आवाज से
आत्‍मा को इस नश्‍वर तन से
मुक्‍त कर देना चाहता था
टूटकर हर बार ये सोचता
शायद ये अंतिम हो
मेरी परीक्षा की घड़ी
मैं फिर से सजग हो चल पड़ता
नई राह पे ...
जहां होती थी कोई
अंजान चुनौती खड़ी ... !!
व्‍यथित शब्‍दों के तीर
कंटीली राहें मेरे लिए थी तैयार
मैंने तैयार किया था
एक मुस्‍कान को
इन्‍हें परास्‍त करने के लिए
मेरे पास यही अस्‍त्र शेष था
विजय पाने का यही
गणवेश था ... !!!

33 टिप्‍पणियां:

  1. टूटकर हर बार ये सोचता
    शायद ये अंतिम हो
    मेरी परीक्षा की घड़ी
    मैं फिर से सजग हो चल पड़ता
    नई राह पे ...

    खूबसूरत अभिव्यक्तियों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भे एक सुन्दर काव्य के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. "शब्द" को बेहतरीन शब्द दिए आपने..
    बहुत खूब..
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सटीक और सार्थक आस्त्र है।

    एक मुस्‍कान को
    इन्‍हें परास्‍त करने के लिए
    मेरे पास यही अस्‍त्र शेष था
    विजय पाने का यही
    गणवेश था ... !!!

    आनन्दायी पंक्तियाँ!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. गहरे अहसास।
    सुंदर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  5. मुस्‍कराया था कब मैं
    अपने ही पागलपन पर ....
    कितना व्‍याकुल था
    तेरे आने पर
    कितना टूटा था तेरे जाने पर

    बहुत खूब..........शानदार|

    उत्तर देंहटाएं
  6. मैंने तैयार किया था
    एक मुस्‍कान को
    इन्‍हें परास्‍त करने के लिए
    मेरे पास यही अस्‍त्र शेष था
    विजय पाने का यही
    गणवेश था ... !!!
    Wah! Kya kamal kaa likha hai!

    उत्तर देंहटाएं
  7. bahut sundar bhavaabhivyakti.. Bhavnaon me Shabon ko bahut sundar tareeke se priyon aur ban gaya aik sundar shabdon ka sansaar is kavita ke roop me.. umda

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत बढिया प्रस्तुति सुंदर अभिव्यक्ति......
    मेरे पोस्ट पर आइये,....
    WELCOME to--जिन्दगीं--

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छा लिखा है आपने ...बेहतरीन अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  10. मुस्‍कान सबसे बड़ा हथियार है।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सटीक लिखा है आपने!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत प्यारा लिखा है आपने ........

    उत्तर देंहटाएं
  13. हर दम मुस्कान साथ हो तो कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है .. सार्थक अस्त्र चुना है ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. bahut hi aanand dayak ...thanq mem bahut hi sundar sachana prastuti ke liye

    उत्तर देंहटाएं
  15. गहरे भावों से सजी बेहद सुंदर एवं प्रभावशाली रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  16. गहरे भावो से भरी धारदार रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  17. शायद उनका आखिरी हो यह सितम
    हर सितम ये सोच कर हम सह गये।

    उत्तर देंहटाएं
  18. बेहतरीन पोस्ट, सुन्दर संप्रेषण

    उत्तर देंहटाएं
  19. दर्द ने कब कहा आह !
    खुशी ने पकड़ी मेरी बांह
    मुस्‍कराया था कब मैं
    अपने ही पागलपन पर ....

    सुन्दर भाव संयोजन.... उत्तम रचना...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  20. इन्‍हें परास्‍त करने के लिए
    मेरे पास यही अस्‍त्र शेष था
    विजय पाने का यही
    गणवेश था ... !!!sochne ko vivash karti rachna

    उत्तर देंहटाएं
  21. शायद सबसे बड़ा अस्त्र यही है ... मुस्कान

    उत्तर देंहटाएं
  22. मुस्‍कान सबसे बड़ा हथियार है। एकदम सही कहा
    बहुत ही सुन्दर... कुछ अलग सी रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  23. इन्‍हें परास्‍त करने के लिए
    मेरे पास यही अस्‍त्र शेष था
    विजय पाने का यही गणवेश था...
    बहुत ही सुन्दर,नववर्ष की मंगल कामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  24. सीधे दिल तक पहुँचती है इस रचना की बात।

    उत्तर देंहटाएं
  25. मैंने तैयार किया था
    एक मुस्‍कान को
    इन्‍हें परास्‍त करने के लिए ...
    सच है की मुस्कान अस्त्र का काम करती है दुखों को भुलाने में ... हर हाल में मुस्कुराना चाहिए ...

    उत्तर देंहटाएं
  26. bs yu samajhiye hriday ke toron ko jhankrit kr gyee apki yh sangraneey rachana ......badhai Sada ji

    उत्तर देंहटाएं

ब्लॉग आर्काइव

मेरे बारे में

मेरा फोटो
मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....