सोमवार, 30 अप्रैल 2012

विश्‍वास का मंत्र ....

प्रथम पहर ... जीवन का जन्‍म
सीखने की ..कहने की ... समझने की
सारी कलाएं सीखने से पहले भी
माँ समझती रही मौन को
मेरी भूख को मेरी प्‍यास को
बढ़ते कदमों की
लड़खड़ाहट को थामती उंगली
मेरे आधे-अधूरे शब्‍दों को
अपने अर्थ देती मॉं
बोध कराती रिश्‍तों का
दिखलाती नित नये रंग
मुझे जीवन में
दूजा प्रहर ... मैं युवा किशोरी
मेरी आंखों में सपने थे
कुछ संस्‍कारों के
कुछ सामाजिक विचारों के
कुछ  जिदें थी कुछ मनमानी
माँ  समझाती ...
इसमें क्‍या है सत्‍य और मिथ्‍या क्‍या
समझना होगा ...
ऐसे में हम हो जाते हैं अभिमानी
स्‍नेह ... समर्पण .. त्‍याग भी जानो
अपनी खु‍शियों के संग औरों का
सुख भी तुम पहचानो ....
आंखों की भाषा  ... मौन को सुनना
सिखलाती माँ ने मुझे
एक दिन ... गले से लगाकर
अपने नयनों में आंसू भरकर
विदाई की बेला में ...
पाठ पढ़ाया तीजे प्रहर ...का
बेटी से बहू बनाया
माँ  ने इक दूजी माँ से मिलवाया
हर रिश्‍ते का मान किया
सबके निर्णय का सम्‍मान किया
मेरी गोद में भी
इक नव जीवन आया
यह जीवन यात्रा ... इसके पड़ाव
कभी इतनी सहज़
कभी विषम और दुर्गम
विश्‍वास का मंत्र
बचपन से ही मेरे कानों में
पढ़ा था माँ ने
मैं उसी महामंत्र के सहारे
आगे बढ़ रही हूं ..
इस जीवन यात्रा मे
नवजीवन का हाथ थामे हुए .... !!!

37 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर...............

    जीवन चक्र यूँ ही चलता रहे ..............
    प्यारी रचना.

    सस्नेह.

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  2. यही मूल मंत्र है .... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सदा जी ....
    पहली गुरु है अपनी माता ...
    प्रथम ज्ञान शिशु माँ से पता ...
    जीवन की निर्मात्री है माँ ....
    इन चरणों पर सुमन चढाएं ...
    बलि बलि जाएँ ...!!

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  4. विश्‍वास का मंत्र
    बचपन से ही मेरे कानों में
    पढ़ा था माँ ने
    मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    इस जीवन यात्रा मे
    नवजीवन का हाथ थामे हुए .... !!!kramwaar satya

    जवाब देंहटाएं
  5. Maa sachme aisee hee hoti hai! Aapkee maa to waqayee badee mahan hai!

    जवाब देंहटाएं
  6. ये अनवरत चक्र यूँ ही चलता रहे ।

    जवाब देंहटाएं
  7. विश्‍वास का मंत्र
    बचपन से ही मेरे कानों में
    पढ़ा था माँ ने
    मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    इस जीवन यात्रा मे
    नवजीवन का हाथ थामे हुए ....

    बहुत बेहतरीन रचना,...सदा जी

    जवाब देंहटाएं
  8. शोभा चर्चा-मंच की, बढ़ा रहे हैं आप |
    प्रस्तुति अपनी देखिये, करे संग आलाप ||

    मंगलवारीय चर्चामंच ||

    charchamanch.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  9. विश्‍वास का मंत्र
    बचपन से ही मेरे कानों में
    पढ़ा था माँ ने
    मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    इस जीवन यात्रा मे
    नवजीवन का हाथ थामे हुए .... !!!

    .....माँ का दिया मन्त्र बेटी कहाँ भूलती है..बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना...

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  10. मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    इस जीवन यात्रा मे
    नवजीवन का हाथ थामे हुए .... !!!wah.....bahot achche.

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  11. यह चक्र जीवन को ऊर्जा दिये हुये है।

    जवाब देंहटाएं
  12. मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    जीवन चक्र का यही तो है महामंत्र
    बहुत सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  13. यह वह मंत्र है जो हर विकट परिस्थिति को असान बना देता है।

    जवाब देंहटाएं
  14. यह जीवन यात्रा ... इसके पड़ाव
    कभी इतनी सहज़
    कभी विषम और दुर्गम
    विश्‍वास का मंत्र
    बचपन से ही मेरे कानों में
    पढ़ा था माँ ने
    मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    इस जीवन यात्रा मे
    नवजीवन का हाथ थामे हुए
    बहुत सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.
    सार्थक और प्रेरक.
    शुभकामनाएँ.

    जवाब देंहटाएं
  16. बचपन से ही मेरे कानों में
    पढ़ा था माँ ने
    मैं उसी महामंत्र के सहारे
    आगे बढ़ रही हूं ..
    इस जीवन यात्रा मे
    नवजीवन का हाथ थामे हुए .... !!!

    Bahut Sunder...... Prernadayi

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  17. आप की जीवन-यात्रा सदा सुखद रहे!
    शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  18. जीवन यात्रा और जीवन का मूलमंत्र... बहुत ही सुन्दर भावों से सजाया है आपने इस कविता को!!

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  19. विरासत ऐसे ही आगे बढ़ती है...माँ से बेटी तक...

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  20. माँ से माँ तक चलता ही जाता है जीवनचक्र अनवरत !

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  21. जीवन चक्र यूँ ही चलता रहे ...........बहुत प्यारी और सुन्दर रचना...

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  22. जीवनमंत्र सारस्वरूप प्रस्तुत करती कविता!
    सादर!

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  23. अद्भुत रचना....

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  24. नारी जीवन के चक्र कों बाखूबी शब्दों में बाँधा है आपने ...

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  25. यही तो है वो महा मंत्र जो एक बेटी को माँ के और करीब ले आता है। खूबसूरत भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

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  26. संबंधों में संस्कारों और मूल्यों की निरंतरता खूब बन पड़ी है.

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  27. जीवन निर्माण का यह चक्र चलता रहे , यही आनंद है..

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  28. ब्लॉग बुलेटिन की ५५० वीं बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन की 550 वीं पोस्ट = कमाल है न मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  29. very nice dear aap u hi hame riste nibhane ki rah par chalate rahiye

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