शनिवार, 21 जुलाई 2012

तुम्‍हारी हर ख्‍़वाहिश को ...


















कुछ बातों पर
यकी़न करना जैसे कील चुभोना होता है
सच की नोक इतनी पैनी
फिर भी झूठ के
आवरण उसे ढंकते रहते हैं
चुभ सकती थी ऐसे जैसे किसी ने
ठोक दिया हो जबरदस्‍ती
पर वह चुभती रही हर बार
एक नई जगह पर
और छलनी कर देती पूरा का पूरा
...
कुछ बेबसी के लम्‍हों पर
फिर खा़मोशी ने
तान दी चादर बड़े ही सलीके से
हिचकियों की आवाजें
हलक से बाहर आ रही थीं दबी-दबी सी
उसने चादर का
एक कोना भर लिया मुंह में
सन्‍नाटा बेताब था
विद्रोह की गर्जना करने को
उसने हथेलियों से
दी थीं थपकियां
वो निढाल हो गया
कहना चाहता था
बेबसी तुम सन्‍नाटे की
दुलहन न बनती तो अच्‍छा था
वो मासूम़
जिसका कल रात कत्‍ल हुआ
वो फक़ीर अंधा था
सौंप गया था बड़े ही यकीन से
तुम्‍हें मेरे बाजु़ओं में
और मैंने
तुम्‍हारी हर ख्‍वाहिश को
चकनाचूर कर दिया !!!
...

31 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा कि यकीन को भी यकीन करने में शक ही होता है..

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  2. हिचकियों की आवाजें
    हलक से बाहर आ रही थीं दबी-दबी सी
    उसने चादर का
    एक कोना भर लिया मुंह में

    मार्मिक. यकीन स्वयं कई पर्दों में छिप गया है.

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  3. सन्‍नाटा बेताब था
    विद्रोह की गर्जना करने को
    उसने हथेलियों से
    दी थीं थपकियां
    वो निढाल हो गया

    बहुत मार्मिक प्रस्तुति

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  4. सच मे यकीन से हम हर पल दूर होते जा रहे हैं ...!!
    प्रबल ...मार्मिक भाव ...!!

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  5. ह्रदय द्रवित करती
    बहुत ही मार्मिक रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  6. तुम्‍हें मेरे बाजु़ओं में
    और मैंने
    तुम्‍हारी हर ख्‍वाहिश को
    चकनाचूर कर दिया !!!
    ....बहुत शक्तिशाली मार्मिक अभिव्यक्ति -

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  7. बहुत अच्छी...ह्रदयस्पर्शी रचना.....

    सस्नेह

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  8. विश्वास बड़ा शब्द है, स्वयं से भी..

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  9. गहन भाव लिए हुए ....
    मर्मस्पर्शी ..

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  10. कुछ बेबसी के लम्‍हों पर
    फिर खा़मोशी ने
    तान दी चादर बड़े ही सलीके से
    हिचकियों की आवाजें
    हलक से बाहर आ रही थीं दबी-दबी सी
    उसने चादर का
    एक कोना भर लिया मुंह में


    हाँ ऐसा ही बिल्कुल ऐसा ही होता है और उसको बहुत सुंदर भावों को उससे भी अधिक सुंदर शब्दों में ढाल कर प्रस्तुत किया है.

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  11. सदा जी इस बेहतरीन पोस्ट के लिए हैट्स ऑफ ।

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  12. विश्वास फिर भी पानी माँग रहा है ...

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  13. ह्रदयस्पर्शी बहुत मार्मिक रचना..

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  14. सुन्दर प्रस्तुति ।

    बधाई स्वीकारें ।।

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  15. बेहद मार्मिक रचना! आभार.

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  16. कुछ बेबसी के लम्‍हों पर
    फिर खा़मोशी ने
    तान दी चादर बड़े ही सलीके से
    हिचकियों की आवाजें
    हलक से बाहर आ रही थीं दबी-दबी सी
    उसने चादर का
    एक कोना भर लिया मुंह में

    भावपूर्ण मार्मिक प्रस्तुति !!

    उत्तर देंहटाएं
  17. कोमल भावो की और मर्मस्पर्शी.. अभिवयक्ति .......

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  18. सशक्त मार्मिक प्रस्तुति,,,
    बहुत सुंदर रचना लगी सदा जी ,,,,,,


    RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

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  19. दिल को छू गयी यह कविता. बहुत सुंदर.
    आभार.

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  20. मार्मिक!गहन भाव लिए हुए !!!

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  21. सच की नोक इतनी पैनी
    फिर भी झूठ के
    आवरण उसे ढंकते रहते हैं ...

    ये स्थिति क्षणिक होती है ... अंततः सच की नौक झूठ के आवरण को फाड़ के बाहर आ ही जाती है ..... हिम्मत का साथ जरूरी है बस ...

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  22. सीमा सिंघल जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'सदा' से कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 23 जुलाई 'तुम्हारी हर ख्वाहिश को...' शीर्षक के लेख को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

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  23. वाह सदा जी क्या बात है दिल छु गयी आप कि यह रचना। देर से आने के लिए माफी कल ही लौटी हूँ इंडिया से इसलिए इतने दिनों से पढ़ नहीं सकी किसी की भी कोई भी पोस्ट अब पढ़ रही हूँ सब के updates...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....