बुधवार, 18 जुलाई 2012

खुद का खुद से नाता तोड़ता !!!













सब कुछ पा लेने के भ्रम में वह
जाने कितना कुछ वह
खोता चला गया
...
टूटता रहा जब भी कुछ
वह उसे जोड़ने के क्रम में
कभी वादे करता
कभी मिन्‍नतें करता
कभी बांधकर गांठ
किसी न किसी तरह  से
अपना काम चला ही लेता
...
होता मन जब भी प्रेम में
फूलों को तोड़ता
तुमसे स्‍नेह का रिश्‍ता जोड़ता
...
क्रोध की अग्नि में जब वह
अपना धैर्य खो देता
मैं की सर्वज्ञता में
रिश्‍तों को तोड़ता
....
वक्‍़त के साथ दौड़ता
इसको उसको सबको
पीछे छोड़ता
खुद का खुद से नाता तोड़ता
....

35 टिप्‍पणियां:

  1. वाह: बहुत गहन अभिव्यक्ति सदा जी..

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  2. 'मैं' चीज़ ही ऐसी है जो इन अनुभवों से गुज़रती है. अंत में अहं से, स्वयं से भी नाता तोड़ने की अवस्था आ जाती है. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति.

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  3. मन ही तो है अलग अपनी ही बात कहता ..सुन्दर रचना .बेहतरीन अभिव्यक्ति

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  4. टूटता रहा जब भी कुछ
    वह उसे जोड़ने के क्रम में
    कभी वादे करता
    कभी मिन्‍नतें करता ...

    जो टूट जस्ता है उसमें अक्सर दरार आ जाती है ... खुद पे विश्वास रहे तो खुद से नाता जुडा रहता है ...

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  5. बहुत सुन्दर रचना सदा जी.....
    सस्नेह
    अनु

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  6. वक्‍त ने सभी को अलग कर दिया हे सब टूटता जा रहा है
    यूनिक तकनीकी ब्लाrग

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  7. सार्थक भाव लिए सुंदर एवं गहन भावभिव्यक्ति...

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  8. बहुत बेहतरीन गहरे अर्थ लिए रचना...
    :-)

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  9. सब कुछ पा लेने के भ्रम में वह
    जाने कितना कुछ वह
    खोता चला गया
    ...
    जिंदगी काट दी ...बस ऐसा ही होता
    चला गया ......

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  10. खो देने का सुख जाना जब,
    पाने का आनन्द भी पाया।

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  11. वक्‍़त के साथ दौड़ता
    इसको उसको सबको
    पीछे छोड़ता
    खुद का खुद से नाता तोड़ता

    ....बहुत खूब! बहुत सुन्दर और गहन अभिव्यक्ति...

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  12. विषय समझने में थोड़ी मुश्किल हुई-



    टूट-फूट को जोड़ते, लगा गाँठ पर गाँठ ।

    रहा अनवरत कर्मरत, पहर आठ के आठ |

    पहर आठ के आठ, पाठ धीरज का पढ़ के ।

    नेह बांध के साथ, निभाये वह बढ़-चढ़ के ।

    सबसे आगे दौड़, छोड़ता पीछे सबको ।

    खुद से नाता तोड़, याद कर जाए रब को ।।

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  13. मन की एक घुटन ...जो अंदर ही अंदर धुँआ धुआँ होती रहती हैं ...

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  14. वक्‍़त के साथ दौड़ता
    इसको उसको सबको
    पीछे छोड़ता
    खुद का खुद से नाता तोड़ता

    बिल्कुल....सटीक पंक्तियाँ

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  15. वक्‍़त के साथ दौड़ता
    इसको उसको सबको
    पीछे छोड़ता
    खुद का खुद से नाता तोड़ता
    BEAUTIFUL LINES

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  16. वाह: बहुत गहन अभिव्यक्ति,सुंदर रचना,,,,, सदा जी..,,,,

    RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

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  17. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।



    आइये पाठक गण स्वागत है ।।

    लिंक किये गए किसी भी पोस्ट की समालोचना लिखिए ।

    यह समालोचना सम्बंधित पोस्ट की लिंक पर लगा दी जाएगी 11 AM पर ।।

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  18. खुद का खुद से नाता तोड़ता....वाह ।

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  19. बिछड़े सभी बारी-बारी
    यहाँ तक अपने से हम भी

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  20. खुद का खुद से नाता तोड़ता ....waah behatreen!!

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  21. भाव विरेचन करती बहुत अच्छी प्रस्तुति है सदा जी .

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  22. सुंदर अभिव्यक्ति:

    तोड़ते चले जाओ
    फेविकोल है ना
    बाजार से ले आओ!

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  23. काबू करलो क्रोध पर, शीतलता अपनाय।
    गुस्से बनते हिए, काम बिगड़ते जाय।।

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  24. वक्‍त के साथ दौड़ता
    इसको उसको सबको
    पीछे छोड़ता
    खुद का खुद से नाता तोड़ता

    अहं का भाव सदैव घातक होता है
    काफी गहन और सुंदर अभिव्यक्ति ...
    सादर !

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  25. बहुत खूबसूरत रचना और सुंदर अभिव्यक्ति...

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  26. सीमा सिंघल जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'सदा' से कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 21 जुलाई को 'खुद का खुद से नाता तोड़ता' शिर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

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  27. मन के भावो को शब्द दे दिए आपने......

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....