सोमवार, 28 नवंबर 2011

अपनी हथेली का ....!!!













बन्‍द पलकों में ख्‍वाबों की
सरगोशियां
आहटें उन कदमों की
जो दूर चले गए
पर दिल के बेहद करीब  थे
जिनके अहसास
उन्‍हें इंतजार रहता था
पलकों के बन्‍द होने का
वो मुझे थपकियां देते
या गुनगुनाते गीत
जिन्‍दगी के .....!
.......................................

सोचती हूं सारे शब्‍दों को
सौंप दूं तुम्‍हें
अपनी हथेली का
इसे विस्‍तृत आकाश देना
इनकी सोच को
धरती ने विस्‍तार दिया था
पर इन्‍हें हसरत थी
गगन में उड़ने की
मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
एतबार ज्‍यादा है ...!!!!

24 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
    एतबार ज्‍यादा है ...!!!!
    ऐसे भोले भाले विश्वासों पर ही शायद ज़िन्दगी चलती है!

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  2. सोचती हूं सारे शब्‍दों को
    सौंप दूं तुम्‍हें

    मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
    एतबार ज्‍यादा है ...!!!!

    Wah!!! bahut hi sundar....

    www.poeticprakash.com

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  3. मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
    एतबार ज्‍यादा है ...!!!!waah

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  4. कविता को पुनः पढ़ना पड़ा और इसे यूँ समझा-
    मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
    एतबार ज्‍यादा है
    ओ मुझे थपकियां देते
    गुनगुनाते गीत
    जिन्‍दगी के....

    सुंदर कविता.

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  5. बहुत सुंदर रचना...बहुत खूब,..

    उत्तर देंहटाएं
  6. सोचती हूं सारे शब्‍दों को
    सौंप दूं तुम्‍हें

    मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
    एतबार ज्‍यादा है
    bahut khub ......

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  7. भोली भाली सुन्दर रचना...
    सादर बधाई...

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  8. एतबार की इंतहा.....
    सुंदर.... बेहतरीन......बेमिसाल.....

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  9. वाह "सदा जी" गहरे अर्थ लिए एक और बेहतरीन अभिव्यक्ति... बहुत खूब ...

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  10. स्पर्श और विश्वास में छिपा प्रेम और प्रेम में प्रकट स्पर्श और विश्वास!

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  11. मुझे तुम्‍हारी हथेलियों पर
    एतबार ज्‍यादा है ...!!!!

    ख़ूबसूरत रचना..

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  12. सुन्दर अभिव्यक्ति, शब्द और भाव दोनों बहुत सुन्दर

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  13. बहुत खूब ... भावों को गहरे से अभिव्यक्त किया है आपने ..

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....