शनिवार, 19 नवंबर 2011

इस बंदगी के लिए ....!!!

हमने ही जाने-अंजाने
जमीं तैयार की थी,
मुहब्‍बत की
तुमने कहा था न
जब प्यार की बातें होती हैं
वहाँ मेरा साया होता ही है .
बस उसी क्षण
मैने तुम्‍हारे यह शब्‍द
चुरा लिये थे
हो सकता है तुम
मेरी इस चोरी के लिए
नाराज हो जाओ मुझसे
या फिर
खामोशी की चादर
ओढ़ लो ...
लेकिन जितना जाना है तुम्‍हें
उससे यह कह सकती हूं
बस थोड़ी देर की खामोशी होगी
फिर होगा तुम्‍हारा
वही प्‍यार
जिसमें हम खामोश रहकर
भी बात कर लिया करते हैं
तुम्‍हें पता है
बिना तुमसे कुछ कहे
मैं लौट आई
उन अहसासों को
अपने दामन में समेटकर
लेकिन इन शब्‍दों को
मैं पल-पल
जीती रही जिन्‍दगी की तरह
कभी करती हूं
बन्‍दगी तुम्‍हारी
कभी तुम्‍हें जी लेती हूं
मन ही मन
सुना है
रिश्‍ते तो ऊपर वाला बनाता है
चाहे वह कोई भी रिश्‍ता हो
उसका नाम हो
या फिर
वह बेनाम ही क्‍यूं न हो
चाहत
जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है
यह तो सुना होगा तुमने भी
मुझे इजाज़त दे दो
इस बंदगी के लिए
एक मुस्‍कान के साथ .... :)

37 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे इजाज़त दे दो
    इस बंदगी के लिए
    एक मुस्‍कान के साथ .... :)

    वाह...लाजवाब रचना

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  2. मन ही मन
    सुना है
    रिश्‍ते तो ऊपर वाला बनाता है
    चाहे वह कोई भी रिश्‍ता हो
    .......बिकुल सही कहा है.....मन में गहराई तक उतरती भावप्रवण पंक्तियाँ बहुत खूबसूरत... एक एक शब्द दिल को छू गया...बहुत खूब सदा दी ...आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत खूबसूरती से एहसासों को लिखा है....बेहतरीन प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है
    यह तो सुना होगा तुमने भी
    मुझे इजाज़त दे दो
    इस बंदगी के लिए
    एक मुस्‍कान के साथ ....

    बहुत सुन्दर ....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचना
    प्रेम ही पूजा है
    शुभकामनाये

    उत्तर देंहटाएं
  6. मन की भावनाओ को बाखूबी पेश किया सुंदर पोस्ट ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. कभी करती हूं
    बन्‍दगी तुम्‍हारी
    कभी तुम्‍हें जी लेती हूं
    मन ही मन
    अत्यंत कोमल भावनाओं से सजी कविता. किसी को जी लेना एक बहुत खूबसूरत अहसास है. वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  8. चाहत
    जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है

    Wahm bhavpurn....Sundar

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह वाह जितनी तारीफ़ की जाये कम है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है....
    सुन्दर भावभरी रचना.....
    सादर बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  11. बंदगी के लिए इजाज़त भला क्यों ? वो तो ज़िंदगी ने सिखा दिया न .. आपकी यह रचना मुझे बहुत पसंद आई ..कोई मांग नहीं है बस समर्पण है ..

    उत्तर देंहटाएं
  12. लो जी हमारी तरफ से तो इज़ाज़त है .....:))

    उत्तर देंहटाएं
  13. चाहत
    जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है

    kya baat hai...

    shukriya..

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही बेहतरीन भावाभिवय्क्ति.....

    उत्तर देंहटाएं
  15. यह सही हो भी सकता है कि रिश्ते ऊपर वाला बनाता है लेकिन यह तो बिल्कुल सही है कि चाहत
    जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है

    उत्तर देंहटाएं
  16. खूबसूरत अहसास।
    गजब की भावनाएं...
    बेहतरीन शब्‍द संयोजन।

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुना है
    रिश्‍ते तो ऊपर वाला बनाता है
    सच्ची बात!

    उत्तर देंहटाएं
  18. चाहत
    जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है

    Bahut Umda Vichar....Sunder Rachna

    उत्तर देंहटाएं
  19. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-704:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  20. मैने तुम्‍हारे यह शब्‍द
    चुरा लिये थे
    मासूम चोरी .. वाह

    उत्तर देंहटाएं
  21. अपने अहसासों के साथ संवाद की अभिव्यक्ति बहुत सुंदर है.

    उत्तर देंहटाएं
  22. सच है ये चाहत बंदगी तो सिखा ही देती है ... लाजवाब रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  23. वही प्‍यार
    जिसमें हम खामोश रहकर
    भी बात कर लिया करते हैं

    बेहतरीन......शानदार |

    उत्तर देंहटाएं
  24. चाहत
    जिन्‍दगी की बंदगी करना सिखा देती है

    bhavpoorn...sundar.

    उत्तर देंहटाएं
  25. सच है.... "चाहत ज़िंदगी को बंदगी करना सीखा देती है" इसलिए कहीं सुना था एक बार शायद कोई संवाद था की प्यार ज़िंदगी में हर एक इंसान को ज़रूर करना चाहिए क्यूँकि प्यार बुरे से बुरे इंसान को भी बहुत अच्छा बना देता है ..... सार्थक अभिव्यक्ति सदा जी बहुत खूब .....

    उत्तर देंहटाएं

ब्लॉग आर्काइव

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....