शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

अभिलाषाओं का हवन ....!!!

बहुत दिनों बाद
आज जिन्‍दगी गले मिली
मैने मुस्‍करा के उसका
स्‍वागत किया ...
पर  ...
वो न मुस्‍काई न कुछ बात की
बस सिसकती रही
मैं आहत हो उठी
क्‍या हुआ ...
वो कातर स्‍वर में कहने लगी
कितना मुश्किल
हो गया है न यूं जीना
सबकी हसरतों का ख्‍याल रखना
सिवाय खुद की
तुम्‍हें पता है इन पलों में
कितना बिखर जाती हूं मैं
इच्‍छाओं की पूर्ति
इतनी आसान नहीं होती
जन्‍म से मृत्‍यु
तक की अवधि में
ये कितने सोपान पार करती है
लड़खड़ा के गिरती है कभी संभलती भी
तब भी इसकी
रूह को जन्‍म से संस्‍कारों की परिधि में
बांधकर अभिलाषाओं का हवन
करने के लिए आहुति देनी होती है
प्रेम की ... आस्‍था की ...विश्‍वास की
जिसकी जगह ले लेते हैं
आसानी से काम, क्रोध, मद, लोभ 
इनकी जकड़न से बच कहा पाता है कोई
रूप बदलते रहते हैं
हम कठपुतली की माफिंक
ताउम्र अपने अंतस की
आवाज को अनसुना करते हुए  ..
मन ही मन आहत होते रहते हैं ...
सच कह रही थी जिन्‍दगी
मैं इंकार न कर सकी
सच्‍चाई से उसकी ... ।

35 टिप्‍पणियां:

  1. Jeevan mein aise utar chadaav aate rahte hain ... Is kashmakash ko baakhoobi utaara hai shabdon mein ... Badhaai ...

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  2. जीवन बंधनों से युक्त है हर क्षण!
    सुन्दर कविता!

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रेम की ... आस्‍था की ...विश्‍वास की
    जिसकी जगह ले लेते हैं
    आसानी से काम, क्रोध, मद, लोभ
    इनकी जकड़न से बच कहा पाता है कोई
    रूप बदलते रहते हैं
    हम कठपुतली की माफिंक
    ताउम्र अपने अंतस की
    आवाज को अनसुना करते हुए ..
    मन ही मन आहत होते रहते हैं ...

    very appealing lines...

    .

    उत्तर देंहटाएं
  4. तुम्‍हें पता है इन पलों में
    कितना बिखर जाती हूं मैं
    इच्‍छाओं की पूर्ति
    इतनी आसान नहीं होती

    Very true....bahur sundar evam bhavpurn...

    www.poeticprakash.com

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  5. रूह को जन्‍म से संस्‍कारों की परिधि में
    बांधकर अभिलाषाओं का हवन
    करने के लिए आहुति देनी होती है
    प्रेम की ... आस्‍था की ...विश्‍वास की
    man ki baat kah di aapne.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. जीवन
    जन्म और म्रत्यु के
    बीच की दूरी
    जन्म ले लिया तो
    जीना मजबूरी

    sadaajee achhee abhivyvaktee

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  7. बहुत ही सटीक चित्रण किया है…………शानदार रचना।

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  8. इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  9. बहुत ही सुन्दर पोस्ट और तस्वीर भी :-)

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  10. रूह को जन्‍म से संस्‍कारों की परिधि में
    बांधकर अभिलाषाओं का हवन
    करने के लिए आहुति देनी होती है

    वाह...कितनी सच्ची बात कही है आपने...बधाई

    नीरज

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  11. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ..

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  12. किसी को भी यहाँ मुकम्बल ..जहान नहीं मिलता
    हर किसी को उसके हिस्से का आसमान नहीं मिलता
    जहाँ वो उड़ सके अपनी ख्याबों ...के आसमान पर
    चल सके ...अपने हिस्से की धरती पर ...
    जी सके कुछ पल अपनी ही मर्ज़ी से अपनी इस जिन्दगी में (अनु)

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  13. सदा जी बहुत सुन्दर चित्रण ....जिन्दगी होती ही ऐसी है ...नाजुक
    आभार
    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण
    लड़खड़ा के गिरती है कभी संभलती भी
    तब भी इसकी
    रूह को जन्‍म से संस्‍कारों की परिधि में
    बांधकर अभिलाषाओं का हवन
    करने के लिए आहुति देनी होती है
    प्रेम की ... आस्‍था की ...विश्‍वास की

    उत्तर देंहटाएं
  14. ऊँचे नीचे रास्ते और मंजिल....
    वाह! सुन्दर रचना...
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  15. प्रेम की ... आस्‍था की ...विश्‍वास की
    जिसकी जगह ले लेते हैं
    आसानी से काम, क्रोध, मद, लोभ
    इनकी जकड़न से बच कहा पाता है कोई
    रूप बदलते रहते हैं

    गम्भीर अभिव्यक्ति है जीवन की…………

    उत्तर देंहटाएं
  16. जीवन में सबसे अधिक कोमल भावनाओं की आहुति देनी पड़ती है. बहुत ही सुंदर रचना.

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  17. प्रेम की आस्था विश्वास, त्याग, समर्पर्ण सभी कुछ तो कह दिया अपने रचना में.....

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  18. ये इच्छाएं ही तो बांध कर रखती हैं..... सुंदर रचना

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  19. सदा जी,
    बहुत ही सटीक लाजबाब सुंदर चित्रण,
    प्रेम,आस्था,विश्वाश,त्याग और समर्पण का सुंदर पोस्ट,
    मेरे नये पोस्ट पर आइये,...

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  20. रूह को जन्‍म से संस्‍कारों की परिधि में
    बांधकर अभिलाषाओं का हवन
    करने के लिए आहुति देनी होती है

    बहुत खूब.

    उत्तर देंहटाएं
  21. कितना मुश्किल
    हो गया है न यूं जीना
    सबकी हसरतों का ख्‍याल रखना
    सिवाय खुद की
    तुम्‍हें पता है इन पलों में
    कितना बिखर जाती हूं मैं
    zindagi ko bakhoobi samjha hai

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  22. Namaskar ji..

    Humko tojanm se ye mrityu tak..
    Leke ye jindgi hi jaati hai..
    Kabhi hanskar nibhati chalti hai..
    Kabhi aansoo bahati jaati hai..

    Sundar bhav..

    Deepak Shukla..

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  23. जीवन की राह विविधता भरी होती है।

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  24. aage se ansuna mat kariye...kuchh apne liye bhi jee kar dekhiye tab jawab de sakengi is jindgi ko.

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  25. सच कह रही थी जिन्‍दगी
    मैं इंकार न कर सकी
    सच्‍चाई से उसकी ... ।


    आपकी रचना सीधे दिल तक पहुची ..लिखी भी सिलसे गयी है
    बहुत बहुत बधाई

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  26. संघर्षों का नाम ही जिंदगी है....
    बढिया प्रस्‍तुति।

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  27. उम्दा रचना..यही है जिन्दगी...

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  28. खूबसूरत ख्याल ..संघर्ष ही ज़िंदगी है ..

    उत्तर देंहटाएं
  29. रूह को जन्‍म से संस्‍कारों की परिधि में
    बांधकर अभिलाषाओं का हवन
    करने के लिए आहुति देनी होती है
    प्रेम की ... आस्‍था की ...विश्‍वास की
    जिसकी जगह ले लेते हैं
    आसानी से काम, क्रोध, मद, लोभ
    उम्दा बेहतरीन रचना ........

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  30. जिंदगी जब गले मिलती है, सच ही तो कहती है।

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  31. सदा जी देर से आने के लिए माफी चाहूंगी.... जीवन बंधनो से युक्त है हर क्षण॥बहुत खूब लिखा है आपने...समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है ..

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....