बुधवार, 16 नवंबर 2011

वज़ह मिल जाएगी जीने की .... !!!

दर्द का मौसम
आंसुओं की बारिश
तमन्‍नाएं फिर भी हंसने की
अभी बाकी हैं
हंसते हुए कभी
आंख भर आए तो
चेहरे को छिपाना मत
वर्ना जिंदादिली का तुम्‍हारी
चर्चा आम हो जाएगा
कहने वाले ने क्‍या खूब कहा है ...
बिना लिबास आए थे इस जहान में
बस इक कफ़न की ख़ातिर इतना सफर करना पड़ा
जब जीने की कोई वज़ह न हो
तो जिन्‍दगी में
पन्‍नों से बढ़कर हमसफ़र कोई नहीं होता
तुम्‍हारे हर अश्‍क को
ये अपने सीने में ज़ज्‍ब कर लेता है
और किसी के आगे
अपने लब कभी नहीं खोलता
तुम्‍हारी मायूसियों में
खोजता है
तुमने क्‍या नहीं पाया है
तुम्‍हारी कमियां
तुम्‍हें कभी नहीं गिनाता
नहीं कहता
तुमने क्‍या दिया है उसे
वह तो बस बांटना जानता है तुम्‍हारा
अवसाद तुम्‍हारा दर्द
तुम्‍हारी खुशी में ...
बिन पंखों के उड़ता है ये
फिर भी तुम मायूस हो जिन्‍दगी से
इससे शिक़वा कैसा ...
हौसला है तुम्‍हारे पास
तभी तो जिन्‍दगी को जीने का असली मज़ा है
तूफ़ानो से लड़कर देखो
साहिल पे पहुंचने का उत्‍साह
दुगना होगा ...
कोई तुम्‍हारा नहीं हो सका
इस बात की परवाह मत करो
अपने जैसे किसी
बेगाने की जिन्‍दगी को कुछ सांसे दे दो
तुम्‍हारी जिन्‍दगी को
वज़ह मिल जाएगी जीने की .... !!!

39 टिप्‍पणियां:

  1. सादे पन्नों को भरने का अद्भुत आमंत्रण सोचता हूँ यहाँ और कवि और लेखक आये क्योँ नही अभी तक . चलिए मैं ही शुरुआत करता हूँ - क्या कहते हैं बिस्मिल्लाह करना . अपने ब्लॉग पर आपकी नयी पोस्ट का आमंत्रण सबसे पहला था और याद आया आप का आमंत्रण हलचल पर तुरंत यहाँ चला आया आना सार्थक हो गया .

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  2. बेग़ाने की जिंदग़ी को कुछ साँसे देने से बढ़ कर जीने की अच्छी वजह क्या हो सकती है. ख़ूब कहा है. बढ़िया रचना.

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  3. सरल जीवन का उत्साह परम होता है, इसको ढूँढ लेना बहुत कठिन है।

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  4. कोई तुम्‍हारा नहीं हो सका
    इस बात की परवाह मत करो
    अपने जैसे किसी
    बेगाने की जिन्‍दगी को कुछ सांसे दे दो
    तुम्‍हारी जिन्‍दगी को
    वज़ह मिल जाएगी जीने की .... !!!

    जीने की वजह को कहती सुन्दर प्रस्तुति

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  5. Chahe to saree saansen lele...par koyee begana dikhe to!
    Bahut hee khoobsoorat rachana!

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  6. जीने की वजह बखूबी व्यक्त किया है!

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  7. जब जीने की कोई वज़ह न हो
    तो जिन्‍दगी में
    पन्‍नों से बढ़कर हमसफ़र कोई नहीं होता
    अच्छी रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. कोई तुम्‍हारा नहीं हो सका
    इस बात की परवाह मत करो
    अपने जैसे किसी
    बेगाने की जिन्‍दगी को कुछ सांसे दे दो
    तुम्‍हारी जिन्‍दगी को
    वज़ह मिल जाएगी जीने की .... !!!prena deti khubsurat rachna....

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  9. जब जीने की कोई वज़ह न हो
    तो जिन्‍दगी में
    पन्‍नों से बढ़कर हमसफ़र कोई नहीं होता kitni sachchi baat

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  10. बिना लिबास आए थे इस जहान में
    बस इक कफ़न की ख़ातिर इतना सफर करना पड़ा

    सुभानाल्लाह क्या बात कही है.........बेहतरीन.....शानदार |

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  11. जिन्‍दगी में
    पन्‍नों से बढ़कर हमसफ़र कोई नहीं होता....

    सुन्दर प्रस्तुति

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  12. जब जीने की कोई वज़ह न हो
    तो जिन्‍दगी में
    पन्‍नों से बढ़कर हमसफ़र कोई नहीं होता....

    Bahut sundar bhaav....

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  13. कोई तुम्‍हारा नहीं हो सका
    इस बात की परवाह मत करो
    अपने जैसे किसी
    बेगाने की जिन्‍दगी को कुछ सांसे दे दो
    तुम्‍हारी जिन्‍दगी को
    वज़ह मिल जाएगी जीने की .... !!!

    मनोबल बढ़ाती हुई कविता।

    सादर

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  14. करना पड़ा
    जब जीने की कोई वज़ह न हो
    तो जिन्‍दगी में
    पन्‍नों से बढ़कर हमसफ़र कोई नहीं होता
    तुम्‍हारे हर अश्‍क को
    ये अपने सीने में ज़ज्‍ब कर लेता है
    और किसी के आगे
    अपने लब कभी नहीं खोलता

    सदा जी एक बेहतरीन रचना सबके दिल की बात कह दी।

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  15. इस सार्थक रचना के लिए बधाई स्वीकारें



    नीरज

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  16. अपने जैसे किसी
    बेगाने की जिन्‍दगी को कुछ सांसे दे दो
    तुम्‍हारी जिन्‍दगी को
    वज़ह मिल जाएगी जीने की .... !!!

    .....बहुत सार्थक सोच...एक एक पंक्ति गहन अहसासों से परिपूर्ण और दिल को छू जाती है और अंतस को निशब्द कर देती है ..बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति..

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  17. apnee apnee जीने की वजह hai apne apne tareeke hein
    meraa tareekaa likh rahaa hoon


    सब को पसंद हैं
    खूबसूरत चेहरे
    कितनी आसानी से
    दिल को भूल जाते
    मुझे चेहरों से ज्यादा
    खूबसूरत
    दिल पसंद है
    निरंतर
    जीने का मकसद
    जो देते हैं

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  18. 'बिना लिबास आए थे इस जहान में
    बस इक कफ़न की ख़ातिर इतना सफर करना पड़ा...'

    गजब के जज्‍बात।
    बेहतरीन... बेमिसाल.... लाजवाब....

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  19. गहन विचार समेटे रचना |बधाई
    आशा

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  20. अत्यंत प्रभावशाली सुन्दर पंक्तिया सुन्दरता से रची हुई ...

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  21. कल 18/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  22. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-701:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  23. तुमने क्‍या नहीं पाया है
    तुम्‍हारी कमियां
    तुम्‍हें कभी नहीं गिनाता
    नहीं कहता
    तुमने क्‍या दिया है उसे
    वह तो बस बांटना जानता है तुम्‍हारा
    अवसाद तुम्‍हारा दर्द

    बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति

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  24. गहन विचार सुन्दर सार्थक रचना...

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  25. सुन्दर भावपूर्ण रचना
    मेरे ब्लॉग पे आकर उत्साहवर्धन
    के लिये आपको दिल से
    शुक्रिया !

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  26. lajavab...
    pratyek pankti dil ko chu lenewali hai...
    bahut hi gahare bhav
    bahut hi sundar....
    bemisal....

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  27. हम लेखको की कौम ...ही ज्यादा ही क्यूँ सोचती है ...हर लम्हा ...पल पल सोच है कि थमने का नाम ही नहीं लेती ....अकेलेपन की वजह से कलम पकड़ी ...और वो लेखनी बन गई

    वजह कुछ भी हो ........पर आने लिखा बहुत सच है .......आभार

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  28. कल 14/1/2012को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  29. वाह....
    जीने की वजह पन्ने हुए ..
    बहुत बढ़िया..

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  30. तूफ़ानो से लड़कर देखो, साहिल पे पहुंचने का उत्‍साह दुगना होगा!
    बहुत प्यारी रचना सदा जी! बहुत धन्यवाद!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....