शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!














खोजते थे तुम पल कोई ऐसा
जिसमें छिपी हो
कोई खुशी मेरे लिए
मैं हंसती जब भी खिलखिलाकर
तुम्‍हारे लबों पर
ये अल्‍फ़ाज होते थे
जिन्‍दगी को जी रहा हूं मैं
ठिठकती ढलते सूरज को देखकर जब भी
तो कहते तुम
रूको एक तस्‍वीर लेने दो
मैं कहती
कभी उगते हुए सूरज के साथ  भी
देख लिया करो मुझे
चिडि़यों की चहचहाहट 
मधुरता साथ लाती है
तुम झेंपकर
बात का रूख बदल देते थे
कुछ देर ठहरते हैं
बस चांद को आने दो छत पे
जानते हो
वो मंजर सारे अब भी
वैसे हैं
मेरी खुशियों को किसी की
नजर लग गई है
मैने बरसों से 
ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!

40 टिप्‍पणियां:

  1. बस चांद को आने दो छत पे
    जानते हो
    वो मंजर सारे अब भी
    वैसे हैं
    मेरी खुशियों को किसी की
    नजर लग गई है
    मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!

    बहुत खूब सदा जी!

    सादर

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  2. इस कविता की खूबसूरती उस तलाश में है जिसे प्रातः की ताज़ग़ी और रोशनी चाहिए. बहुत खूबसूरत भाव को संप्रेषित करती रचना.

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  3. जानते हो
    वो मंजर सारे अब भी
    वैसे हैं
    मेरी खुशियों को किसी की
    नजर लग गई है
    मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!
    Aah!

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  4. प्यार और इंतज़ार का मंज़र ..इस से खूबसूरत नहीं हो सकता...बहुत खूब .....

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  5. मेरी खुशियों को किसी की
    नजर लग गई है
    मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!

    .....वाह! बहुत सुंदर वर्णन ॥

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  6. खूबसूरत कविता बधाई और शुभकामनाएँ

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  7. मेरी खुशियों को किसी की
    नजर लग गई है
    मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा

    वियोग से भरी रचना ....

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  8. एक दर्द झलकता है...
    सुन्दर चित्रण!

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  9. मैं कहती
    कभी उगते हुए सूरज के साथ भी
    देख लिया करो मुझे

    बहुत दर्द इन पक्तियो में
    आभार

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  10. खूबसूरत अहसास।
    सुंदर प्रस्‍तुति।

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  11. डूबते सूरज का निष्कर्ष काली रात के पहले आ जाये।

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  12. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है! सूचनार्थ!

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  13. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ... आपको ढलते सूरज को देखने का इंतज़ार करते देख रही हूँ ...

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  14. मेरी खुशियों को किसी की
    नजर लग गई है
    मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!
    सुन्दर रचना .. एहसास का बखूबी चित्रण

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  15. अंत तक आते-आते कविता इंद्र्धानुष सा निखार गयी।

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  16. मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!

    सुंदर अभिव्यक्ति
    शुभकामनायें आपको !

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  17. मैने वर्षों से ढलता हुआ सूरज नहीं देखा।..इसे पढ़कर आह ही निकलती है।

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  18. कोमल भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति. बहुत खूब!

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  19. ढलता हुआ,सूरज नहीं देखा--- दिल छूती हुई,रचना.

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  20. वाह सदा जी क्या बात है....
    मेरी खुशियों को किसी की
    नजर लग गई है
    मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ..
    गहन भावों को लिए बहुत ही भावपूर्ण, दिल को छु लेने वाली कविता सच मज़ा आगया पढ़कर....

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  21. बहुत भावपूर्ण रचना । शुभकामनाएँ ...

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  22. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति, शुभकामनाएँ .

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  23. बहुत ही भाव पूर्ण ... कमाल की रचना है ...

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  24. अत्यंत भावपूर्ण दिल में घर करतीएक खूबसूरत रचना ! बधाई सदा ! आपके दिल की सदा हम तक पहुँच गई है !
    बधाई !

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  25. भावप्रवण सुंदर प्रस्तुति

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  26. बहुत खूब............यादों के भंवर में कभी कभी दिल ऐसे ही डूब जाता है|

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  27. मैने बरसों से
    ढलता हुआ सूरज नहीं देखा ... !!!

    बहुत खूब

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  28. सदा दी आपकी इस रचना को कविता मंच पर शामिल किया गया है

    कविता मंच
    http://kavita-manch.blogspot.in/

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  29. अक्सर ढ़लता सूरज जीवन के आँगन में कई यादें छोड़ जाता है
    और इन यादों में किसी का इन्तजार ....

    साभार !

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....