सोमवार, 12 सितंबर 2011

आस्‍था तुम्‍हारी ...!!!







आस्‍था

तुम्‍हारी किसके साथ है

तुम किसके आगे नतमस्‍तक

होना चाहते हो

यह तुम्‍हें तय करना है

दिल से

पूछना फिर तय करना .... ।

मानव में आपसी द्वंद

जो विचारों का

टकराव पैदा करता है

ईर्ष्‍याभाव एक-दूसरे से

कभी अहम पैसे का

कभी गुरूर रूतबे का

कभी वर्ण का

कभी कुल का सम्‍पत्ति का

तुम्‍हें पता है न

किसी भी चीज की अति

विनाश कर देती है

फिर तुम्‍हारा अभिमान

किस बात को लेकर है

जानते हो ....

प्रेम की बोली फीका कर देती है

हर दंभ

मेरे अपराजित होने की वजह

तो तुम जान गये होगे

इन सब संपदाओं से बड़ा है आत्‍मबल

जो टकराता है साहस के साथ

लड़ता है स्‍वाभिमान के साथ

घबराता नहीं विपत्तियों में

सिर्फ एक मौन

तुम्‍हारे द्वारा कही गई हर बड़ी बात को

छोटा कर देता है

तुम्‍हारा कर्णभेदी स्‍वर

बताओ तो जरा यह क्रोध किस पर

मुझ पर या खुद की बेबसी पर

और फिर धराशाई हो जाता है

तुम्‍हारा पैसा तुम्‍हारा गुरूर

और तुम

मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है

मेरे नियम हैं

जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला

किसी के लिए

इसीलिए चल रही हूं बेखौफ़

धैर्य और विश्‍वास के साथ

निरन्‍तर......!!!



31 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है

    मेरे नियम हैं

    जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला

    किसी के लिए

    इसीलिए चल रही हूं बेखौफ़

    धैर्य और विश्‍वास के साथ

    निरन्‍तर......!!!bahut hi badhiyaa

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  3. आस्था की शक्ति मन को बलवान रखती है. सुंदर कविता और भाव.

    उत्तर देंहटाएं
  4. मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है

    मेरे नियम हैं

    जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला

    किसी के लिए

    इसीलिए चल रही हूं बेखौफ़

    धैर्य और विश्‍वास के साथ

    निरन्‍तर......!!! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति|...... धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  5. इश्वर की सत्ता को मानना सबसे बड़ा नियम है ... बहुत लाजवाब लिखा है ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. ...................माफ़ कीजिये मेरे पास लफ्ज़ नहीं है इस पोस्ट की तारीफ़ के लिए........सुभानाल्लाह .......यही कह सकता हूँ|

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत गहरी और खुबसूरत अभिव्यक्ति ...

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  8. Sada jee आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज से हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
    आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
    MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
    MITRA-MADHUR कृपया यहाँ चटका लगाये
    BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्रेम की बोली फीका कर देती है
    हर दंभ....
    *
    मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है
    मेरे नियम हैं
    जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला...

    सुन्दर अभिव्यक्ति.... सार्थक रचना...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर लिखा है...सीधी चोट करने वाली पंक्तियां....

    उत्तर देंहटाएं
  11. रेम की बोली फीका कर देती है
    हर दंभ....
    *
    मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है
    मेरे नियम हैं
    जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला...

    bas iishwar me aastha hi sabse badhkar hoti hai aur use badalna bhi nahi chahiye..........ek behtreen prastuti.

    उत्तर देंहटाएं
  12. गहरे सोचने पर विवश करती कविता. बेहद उम्दा.

    उत्तर देंहटाएं
  13. मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है

    मेरे नियम हैं

    जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला

    किसी के लिए

    इसीलिए चल रही हूं बेखौफ़

    धैर्य और विश्‍वास के साथ

    निरन्‍तर......!!!

    सुन्दर, बेहतरीन प्रस्तुति.
    मेरे ब्लॉग पर भी आईयेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ,अपने विश्वासों पर अ -टल बने रहने का आवाहन .
    तुम्‍हें पता है न

    किसी भी चीज की अति

    विनाश कर देती है

    फिर तुम्‍हारा अभिमान

    किस बात को लेकर है

    जानते हो ....

    प्रेम की बोली फीका कर देती है

    हर दंभ

    उत्तर देंहटाएं
  15. bahut bahut khub....................

    जाने कहाँ
    खो गई
    मिट्टी की वो
    असली खुशबू...........

    उत्तर देंहटाएं
  16. मेरी आस्‍था सिर्फ ईश्‍वर है
    मेरे नियम हैं
    जिन्‍हें मैने आज भी नहीं बदला
    किसी के लिए
    इसीलिए चल रही हूं बेखौफ़
    धैर्य और विश्‍वास के साथ
    निरन्‍तर......!!!

    संवेदनशील रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित पोस्ट

    उत्तर देंहटाएं
  18. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  19. meree aasthaa sirf achhe karm aur binaa nafrat ke ,jeene mein hai mein hai,shaayad parmaatmaa yahee chaahtaa hai ,aisaa meraa maannaa hai
    sundar aur saargarbhit kavitaa sadaa kee tarah

    उत्तर देंहटाएं
  20. मेरी आस्था ईश्वर है जिसके साथ चलते हम सब बेख़ौफ़ ...
    सार्थक अभिव्यक्ति !

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  21. आस्था पर ही जीवन चलता है निरंतर ... अच्छा विश्लेषण किया है ..सुन्दर भाव पूर्ण रचना

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  22. प्रेम की शक्ति मिटा देती है सब दंभ....वाह क्या बात है ...सुंदर

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  23. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  24. imaandari se kehta hoon, behad kamala ki lagee e rachna..aur poora flow kavita me gazab ka hai...

    http://teri-galatfahmi.blogspot.com/

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  25. जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंग को रेखांकित कर गूढ़ बात कही गई है.

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  26. रचना पढ़ कर ऐसा लगा की बहुत दिनों बाद कोई अच्छी रचना पढ़ने को मिली...आपकी लेखनी को नमन.....सशक्त लेखन के लिए ढेर सारी बधाइयाँ स्वीकार करें... - सत्येन्द्र

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....