शनिवार, 3 सितंबर 2011

पलों का हिसाब ....












मैं
जब भी
गुजरे पलों का हिसाब करती
हर बार की तरह
तुम्‍हे भुलाने की खाकर कसम
और ज्‍यादा याद करती
सिसकियां मेरी
खामोशियों पर इस कदर
वार करतीं
तनहाईयों को अपना
गवाह रखती
मैं पलकों को बंद करके
रब से फरियाद करती
मुहब्‍बत भरा दिल देना ठीक है
लेकिन उसका ये अंजाम
होना अच्‍छा नहीं ....
कब तक इस नासमझ को
समझाने के वास्‍ते
मैं यूं तुझसे शिकायत करती रहूंगी ....!!!!

35 टिप्‍पणियां:

  1. पलो का हिसाब कौन कहाँ कब समझ पाता है ..बेहतरीन अभिव्यक्ति

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  2. सुन्दर अभिव्यक्ति सदा जी बधाई

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  3. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  4. समझाने के वास्‍ते
    मैं यूं तुझसे शिकायत करती रहूंगी ....!!!!

    जी, यही शिकायेंते ही तो कुछ जीने का जज्बा पैदा करती हैं... बेहतरीन अभिव्यक्ति.

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  5. सदा जी ..बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।... बधाई

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  6. मैं यूं तुझसे शिकायत करती रहूंगी ....!!!!बहुत ही अच्छी.....

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  7. कब तक इस नासमझ को
    समझाने के वास्‍ते
    मैं यूं तुझसे शिकायत करती रहूंगी ....!!!

    बहुत संवेदनशील बात ...

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  8. बढ़िया भाव... सुन्दर अभिव्यक्ति...
    सादर...

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  9. मैं यूं तुझसे शिकायत करती रहूंगी ....!!!!

    सच बात है ...ये सिलसिला ख़त्म होने वाला नहीं है ...!!
    बहुत सुंदर रचना ..

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  10. शिकायत मत कीजिये ....:))
    लीजिये हम आ गए बधाई देने .....
    आपको ढेरों बधाइयां काव्य संकलन की .....

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  11. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की लगाई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  12. सच है... बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति....

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  13. कब तक इस नासमझ को
    समझाने के वास्‍ते
    मैं यूं तुझसे शिकायत करती रहूंगी

    सिलसिला ख़त्म होने वाला नहीं

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  14. मुहब्‍बत भरा दिल देना ठीक है
    लेकिन उसका ये अंजाम
    होना अच्‍छा नहीं ....
    हर शख्स इस अंजाम से वाकिफ है फिर भी दिल देता है...खैर,अच्छी भावपूर्ण रचना हेतु बधाई

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  15. बहुत सुंदर भाव लिए कविता.

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  16. कौन दे सकता है भला इन पलों का हिसाब ...

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  17. कुछ पलों का हिसाब ना ही करना बेहतर होता है
    सुन्दर रचना

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  18. सुन्दर नये प्रतीकों वाली सुन्दर रचना । बधाई ।

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  19. यूँ कब ताक शिकायत करें
    आओ अब कुछ नई बातें करें

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  20. जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं ...
    बहुत नाजुन सी रचना ... छूती है दिल को ...

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  21. आपकी किसी पोस्ट की हलचल है ...कल शनिवार (५-११-११)को नयी-पुरानी हलचल पर ......कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें .....!!!धन्यवाद.

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....