माँ की फूंक
चोट पे मरहम
माँ के बोल
मुश्किल समय में दुआ
माँ की गोद
बीमारी में दवा
माँ का हाथ
पीठ पे हौसला
बन जाता है
ये जादू नहीँ तो क्या है
परवाह और फ़िक्र का
माँ की नज़रों से
बच पाना मुश्किल ही नहीँ
नामुमकिन भी है 😊
गुलाल उड़ा
मन ही मन रंगा
पगला मन !
..
रंग से मिल
गलबहियाँ डाल
हँसे गुलाल !
..
रंग बरसा
होली के रंग से
रंगी धरा भी !
..
फागुन संग
पवन खेले रंग
उड़े गुलाल !
...
रंग अबीर
सजधज के आये
मनाओ होली !
बसंत पंचमी को
माँ सरस्वती का वन्दन
अभिनंदन करते बच्चे आज भी
विद्या के मंदिरों में
पीली सरसों फूली
कोयल कूके अमवा की डाली
पूछती हाल बसंत का
तभी कुनमुनाता नवकोंपल कहता
कहाँ है बसंत की मनोहारी छटा ?
वो उत्सव वो मेले ???
सब देखो हो गए हैं कितने अकेले
मैं भी विरल सा हो गया हूँ
उसकी बातें सुनकर
डाली भी करुण स्वर में बोली
मुझको भी ये सूनापन
बिलकुल नहीँ भाता !!
....
विचलित हो बसंत कहता
मैं तो हर बरस आता हूँ
तुम सबको लुभाने
पर मेरे ठहरने को अब
कोई ठौर नहीं
उत्सव के एक दिन की तरह
मैं भी पंचमी तिथि को
हर बरस आऊंगा
तुम सबके संग
माता सरस्वती के चरणों में
शीष नवाकर
बासंती पर्व कहलाऊंगा !!!!
मैं, तुम, हम
सच कहूँ तो
सब बड़े ही खुदगर्ज़ हैं
कोई किसी का नहीं
सब अपनी ही बात
अपने ही अस्तित्व को
हवा देते रहते हैं
कि दम घुट ना जाये कहीं
...
सत्य
जिन्दा है जब तक
विश्वास भी
सांस ले रहा है तब तक
झूठ असत्य अविश्वास
भिन्न नामों की परिधि में
छुपे हुए सत्य को
पहचान जाओ तो
ये तुम्हारा हुनर
वर्ना ये रहता है अनभिज्ञ !
....
नहीं कचोटता होगा तुम्हें
कभी असत्य
क्यूंकि जब जिसके साथ
जीवन निर्वाह की आदत हो जाये
तो फ़िर गलत होकर भी
कुछ गलत नहीं लगता
पर उपदेश कुशल बहुतेरे
वाली बात कह कर
तुम सहज ही
मुस्करा तो देते हो
पर सत्य से
नज़रें मिलाने का साहस
नहीं कर पाते
इतिहास गवाह है
हर क्रूरता को
मुँह की खानी पड़ी है
और झूठ ने गँवाई है
अपनी जान
साँच को आँच नहीं :)
मैं संग्रहित करता रहा
जीवन पर्यन्त
द्रव्य रिश्ते नाते
तेरे मेरे
सम्बन्ध अनगिनत
नहीं एकत्रित करने का -
ध्यान गया
परहित,श्रद्धा, भक्ति
विनम्रता, आस्था, करुणा
में से कुछ एक भी
जो साथ रहना था
उसे छोड़ दिया
जो यही छूटना था
उसकी पोटली में
लगाते रहे गाँठ
कुछ रह ना जाये बाकी !!!
...
मैं तृष्णा की रौ में
जब भरता अँजुरी भर रेत
कंठ सिसक उठता
प्यासे नयनों में विरक्तता
बस एक आह् लिये
मन ही मन
दबाता रहता
उठते हुए ग़ुबार को !!!
.....