
मेरा रूठना जाने क्यों तुमसे अक्सर हो ही जाता है,
रूठा ये दिल तुमसे जाने कितना कुछ कह जाता है ।
बदलती हवाओं सा यह भी ये आया वो गया हुआ,
पाकर इक मुस्कान तुम्हारी ये गुम सा हो जाता है ।
ढूंढती मैं बहाने तुमसे न मिलने के क्या करती जब,
अश्कों की कुछ बूंदो के संग सारे शिकवे ये कर जाता है ।
धड़कनों को पता है तेरे दिल में धड़कता है दिल मेरा,
मेरे वादे, मेरी कसमों का असर तुझ पर हो जाता है ।
उलझन मेरी सुलझाने के लिये तुमने सारे जतन किये,
मुहब्बत का मुहब्बत पे यकीं करना मुश्किल हो जाता है ।
मेरा इंतजार तुम मुझसे छिप कर करते हो अक्सर क्यूं,
कहो तो प्यार जताने से क्या इसका असर कम हो जाता है ।