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तेरी मुहब्बत मुझे इस कदर रूलाएगी छिपाने में,
उसको इक मुस्कराहट भी मेरी न काम आएगी ।
यूं तो हंसने के फन में खूब माहिर हूं होगा क्या,
जब हंसी बन के अश्क आंखों से छलक जाएगी ।
दर्द तेरा दिया अब दवा का काम करता है,
जख्म पे कोई मरहम अब न काम आएगी ।
टीस जख्मों की चैन दिल का बन गया मेरे,
इस चुभन से बच के जिन्दगी किधर जाएगी ।
जुर्म हो गया मुहब्बत पे इस तरह ऐतबार करना,
इसकी कीमत तो ताउम्र अश्को से चुकाई जाएगी ।


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