शनिवार, 19 मई 2012

वैसे ही हो तुम इन शब्‍दों की जननी ... !!!















एक संसार मेरा तुम्‍हारे शब्‍दों से,
तुमसे बन गया है
मेरे शब्‍द तुम्‍हारे शब्‍दों की
उंगली थाम कर चलने लगे हैं
कोई कुछ कहे इनसे पहले
वो तुम्‍हारे शब्‍दों का
अनुसरण कर अपना सच कहते हैं
तुम्‍हारी परिक्रमा
मेरा सबसे बड़ा सच है 
...
ये सच है  कि गीता पढ़ी मैने
पर उसके अर्थ तब समझे
जब तुमने उन्‍हें अपने शब्‍द दिये
मीरा को पढ़ा मैने
भक्ति और प्रेम की दीवानगी
विष के प्‍याले को अमृत
कर गई ये जाना जब तुमने
निस्‍वार्थ प्रेम की महत्‍ता बतलाई
गीता का सार
सत्‍य गीता का
कोई समझता कैसे
यदि श्रीकृष्‍ण स्‍वयं यह उपदेश
अर्जुन को नहीं देते
मर्यादाओं के दायरे में
संस्‍कारों का गांडीव  लिए
अर्जुन निहत्‍थे थे जैसे वैसे ही मैं
बिन तुम्‍हारे आशीर्वचनों के
....
खुश रहो .. दुआ का यह मूलमंत्र
तुम्‍हारे मुँह से सुना होता
तो जाना होता
कितना शक्तिशाली है यह
उदासियों के बादल
छट जाते हैं मन के आकाश से
आंसुओं की बारिश थम जाती है
बोझिल पलकों से
एक इन्‍द्रधनुष बिन सात रंगों के
अपनी आभा बिखेर देता है
मन मस्तिष्‍क में जैसे
वैसे ही हो तुम इन शब्‍दों की जननी ... !!!

19 टिप्‍पणियां:

  1. संस्‍कारों का गांडीव लिए
    अर्जुन निहत्‍थे थे जैसे वैसे ही मैं
    बिन तुम्‍हारे आशीर्वचनों के ...
    सुंदर शब्दों में ...जीती जागती आस्था ...
    सुंदर रचना ...सदा जी ...!
    शुभकामनायें ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. खूबसूरत भावों से सजी रचना,
    सुन्दर अभिव्यक्ति ,......

    बहुत सुंदर रचना,..अच्छी प्रस्तुति

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,
    MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. उदासियों के बादल के बरस जाने के बाद सकून का मौसम छा जाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. खुश रहो .. दुआ का यह मूलमंत्र
    तुम्‍हारे मुँह से सुना होता
    तो जाना होता
    कितना शक्तिशाली है यह
    उदासियों के बादल
    छट जाते हैं मन के आकाश से
    आंसुओं की बारिश थम जाती है
    बोझिल पलकों से
    एक इन्‍द्रधनुष बिन सात रंगों के
    अपनी आभा बिखेर देता है

    यह शब्द जननी असल में माता ही हो सकती है!! बहुत ही समर्पित भाव!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर और शानदार पोस्ट।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह बहुत खूबसूरत भाव ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  8. मर्यादाओं के दायरे में
    संस्‍कारों का गांडीव लिए
    अर्जुन निहत्‍थे थे जैसे वैसे ही मैं
    बिन तुम्‍हारे आशीर्वचनों के

    ...सदैव की तरह अनुपम भाव संजोये एक उत्कृष्ट प्रस्तुति...आभार

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति......

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति......सदैव की तरह अनुपम भाव संजोये ....

    उत्तर देंहटाएं
  11. भावपूर्ण रचना... बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....