सोमवार, 26 मार्च 2012

तुम्‍हारे लिए ही ...!!!

















मन बग़ावत करने लगा है
आजकल उसका
समझाइशो की भीड़ में
नासमझ मन
हर बात पर खुद को
कटघरे में पाकर
बौखला उठता है  जब
आक्रोश उसका
फूलों की जगह कांटों को
थामकर अपनी
रक्‍त रंजित हथेलियों से
तर्पण कर उठता है
दर्द का ...
चीखें पत्‍थर दिल दीवारों से
टकराकर लौटती हैं
रूदन के बीच  जब
कंपकपाते कदम साथ नहीं देते
फिर चौखट को लांघने का
....
सोचती इतना सन्‍नाटा न होता तो
वो अनसुना कर देती
इन चीखों को
एक कोना जो मन का
हमेशा उसकी परवाह में बेकरार हो
उसका ही रहता था सदा
उसकी ही सुनता था सदा
आज वो अपने हक़ के लिए
बस क़ातर नयन लिए
उसकी राह निहारता रहता है
आओगे तुम कभी तो
इस राह पर ... इस राह पर
रहूंगा मैं सदा ... तुम्‍हारा ही ...
तुम्‍हारे लिए ही ...!!!

42 टिप्‍पणियां:

  1. शुभकामनाएं ।

    बढ़िया भाव ।

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  2. बहुत सुन्दर.....
    गहन भाव.....

    सादर.

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  3. बहुत खूब गहन भाव अभिव्यक्ति....

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  4. आओगे तुम कभी तो
    इस राह पर ... इस राह पर
    रहूंगा मैं सदा ... तुम्‍हारा ही ...
    तुम्‍हारे लिए ही ...!!!
    POSITIVE NOTE.

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  5. बहुत सुंदर
    क्या कहने
    रश्मि दीदी आपकी यूं ही तारीफ नहीं करती हैं।

    चीखें पत्‍थर दिल दीवारों से
    टकराकर लौटती हैं
    रूदन के बीच जब
    कंपकपाते कदम साथ नहीं देते

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  6. सुंदर सम्प्रेषण.... उम्दा भाव...
    सादर।

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  7. आओगे तुम कभी तो
    इस राह पर ... इस राह पर
    रहूंगा मैं सदा ... तुम्‍हारा ही ...
    तुम्‍हारे लिए ही ...!!!बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  8. दर्द लिखना, दर्द पढ़ना, दर्द महसूस करना और दर्द में ही उम्मीद पालना... आह! कितना कठिन है!!

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  9. गहन मर्मान्तक अनुभूतियों का चित्रण!!

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  10. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    आओगे तुम कभी तो
    इस राह पर ... इस राह पर
    रहूंगा मैं सदा ... तुम्‍हारा ही ...
    तुम्‍हारे लिए ही ...!!!

    यही तो प्रेम है

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  11. गहन भाव लिए सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  12. आओगे तुम कभी तो
    इस राह पर...

    इंतज़ार का मीठा दर्द- मीठी ख़ुशी
    सादर

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  13. आओगे तुम कभी तो
    इस राह पर ... इस राह पर
    रहूंगा मैं सदा ... तुम्‍हारा ही ...
    तुम्‍हारे लिए ही ...

    बहुत सुंदर...

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  14. दिल से निकली और दिल तक पहुँचती कविता!!

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  15. आओगे तुम कभी तो
    इस राह पर ... इस राह पर

    बहुत सुन्दर ..

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  16. दर्द को ऊँचाइयों तक पहुँचाती हुई उत्कृष्ट रचना.

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  17. मन की बात भी सुन लेनी चाहिए।

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  18. मन की बगावत .... कभी तो मन भी करेगा ही न ... बहुत भावप्रवण रचना

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  19. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्टस पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  20. बहुत खूब. दिल की गहराइयों से लिखी गई एक शानदार रचना.

    आभार.

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  21. बहुत गहन भाव और उनका प्रभावी सम्प्रेषण...आभार

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  22. गहन भाव संजोए बेहतरीन प्रस्तुति!

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  23. मन में किसी का आमन्त्रण स्थायी रूप से बस जाता है।

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  24. गहन भाव से लिखी सुन्दर अभिव्यक्ति.....

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  25. सोचती इतना सन्‍नाटा न होता तो
    वो अनसुना कर देती
    इन चीखों को

    इन पंक्तियों में छिपी कविता तो खूब है.

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  26. यह रचना अच्छी लगी. आप इसी प्रकार और रचनाएं लिखें

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....