गुरुवार, 2 मई 2013

सारी ख्‍़वाहिशों की बोलती बंद !!!!















कभी कुछ होता है कहने को
पर जाने क्‍यूँ
मौन उतर आता है
बड़ी ही तेजी से धड़धड़ाते हुए
सब दुबक कर बैठ जाते हैं
सारी ख्‍़वाहिशों की बोलती बंद
अरमान अपना कमरा बंद करते हैं तो
पलकें बंद होकर लाइट ऑफ  !
....
नहीं समझ आता मुझे
मौन का कभी यूँ सभी को सताना
जहाँ सब डरे-सहम से रहते हैं
कौन पहल करे
कौन उस मुस्‍कान को खींच कर लाए
जो गायब है बिना बताये किसी को
हँसी ने तो एक लम्‍बी छुट्टी भी मार दी
ठहाका गया तो लौटा ही नहीं
सब उसी को ढूँढते फिर रहे थे
ऊपर से यह मौन की साधना
जिसे देख कर सब
मन ही मन कुढ़ से रहे थे !!
....
हाँ एक मुखौटा भी दिखा था
किसी को आते देख
पहन लेते किसी को पता ही नहीं चलता
ये मुस्‍कान नकली है
हँसी छुट्टी पर है
सबका काम तो चल ही रहा था
पर तुम ही सोचो
क्‍या काम चलने का नाम जिंदगी है ?
कहीं सुना था मैने
हँसने-हँसाने का नाम जिंदगी है
तो आओ फिर जिंदगी को आवाज देकर
कुछ मुस्‍कराहटों को इसके नाम कर दें !!!
....

35 टिप्‍पणियां:

  1. हँसी-ठाहके तो कहीं खो गये ...और मुस्कान नकली ...
    होठों की मुस्कान में ढल के
    ग़म आया है भेस बदल के ...,

    शुभकामनायें!

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  2. मैं सबसे पहले हाज़िर हूँ सदा जी ....!!
    बहुत खूबसूरत बात ....!!

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  3. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए शनिवार 04/05/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. सकारात्मक कविता ………काश आज के दौर मे ये संभव हो पाता

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  5. तो आओ फिर जिंदगी को आवाज देकर
    कुछ मुस्‍कराहटों को इसके नाम कर दें !!
    अपनी कोशिस में मेरा साथ रख लें
    हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  6. हँसने-हँसाने का नाम जिंदगी है
    तो आओ फिर जिंदगी को आवाज देकर
    कुछ मुस्‍कराहटों को इसके नाम कर दें !!!
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ,अंतिम पक्तियां सार है.

    lateast post मैं कौन हूँ ?
    latest post परम्परा

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  7. हँसने-हँसाने का नाम जिंदगी है
    तो आओ फिर जिंदगी को आवाज देकर
    कुछ मुस्‍कराहटों को इसके नाम कर दें !!!

    बहुत बेहतरीन पंक्तियाँ ,,,

    RECENT POST: मधुशाला,

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  8. आज सहज चेहरे मिलते ही नहीं कहीं .... हर जगह मुखौटा है ..... कभी असल हंसी भी हो तो लगता है कहीं नकली तो नहीं :):)

    बहुत खूबसूरत भावों को लिए सुंदर रचना ।

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  9. बहुत ही सुन्दर और सकारात्मक कविता,आभार.

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  10. हंसना तो मानो आउट ऑफ़ फैशन हो गया है .. या फिर हम भूल ही गये हैं.. सुन्दर रचना.

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (03-05-2013) के "चमकती थी ये आँखें" (चर्चा मंच-1233) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  12. हँसने-हँसाने का नाम जिंदगी है
    तो आओ फिर जिंदगी को आवाज देकर
    कुछ मुस्‍कराहटों को इसके नाम कर दें !!बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  13. हाँ, आपने सच कहा ....आज यही हो रहा है ...
    -----------------------
    तो क्यों न जिन्दगी को आवाज देकर बुलाएं और उसे हंसाएं ??

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  14. काम चलना जीवन नहीं, दम भर ख़ुशी से जीना ज़िंदगी है, पुकार लो ज़िन्दगी को और जी लो जी भर हँस कर... बहुत सुन्दर सार्थक रचना, बधाई.

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  15. वाह बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने।

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  16. बढ़िया रूपक बुना है इस पोस्ट में आओ खुशियाँ बांटे महसूस करें लौटें मायूसी के दयार से .

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  17. मौन, मुस्कराहट और मुखौटे की अलग अलग कहानी है.. आपने सबको छुआ है.. कभी अलग अलग इनसे बतियाकर देखिये.. बड़ा अच्छा लगेगा.. मौन को हम इग्नोर करते हैं ना, इसीलिये डिस्टर्ब करता है.. कभी प्यार से बिठाइए, बात कीजिये.. बहुत कुछ कहना होगा उसे, बताएगा वो!!
    कविता शानदार!!

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  18. नहीं समझ आता मुझे
    मौन का कभी यूँ सभी को सताना
    जहाँ सब डरे-सहम से रहते हैं
    कौन पहल करे
    कौन उस मुस्‍कान को खींच कर लाए
    जो गायब है बिना बताये किसी को
    हँसी ने तो एक लम्‍बी छुट्टी भी मार दी
    ठहाका गया तो लौटा ही नहीं
    सब उसी को ढूँढते फिर रहे थे
    ऊपर से यह मौन की साधना
    जिसे देख कर सब
    मन ही मन कुढ़ से रहे थे !!

    ऐसे ही समय में वक़्त ठहर जाता है *****

    उत्तर देंहटाएं
  19. ......बस ज़रा इस दहशत से उबार लें...!!!

    उत्तर देंहटाएं
  20. कभी कुछ होता है कहने को
    पर जाने क्‍यूँ
    मौन उतर आता है
    बड़ी ही तेजी से धड़धड़ाते हुए
    सब दुबक कर बैठ जाते हैं
    सारी ख्‍़वाहिशों की बोलती बंद
    अरमान अपना कमरा बंद करते हैं तो
    पलकें बंद होकर लाइट ऑफ !-----
    अदभुत
    आप रचना की तह तक डूबकर लिखती हैं
    यह विरलों में ही होता है
    आपको और आपके लेखन को साधुवाद


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  21. सबसे ज्यादा ज़रूरी है संतुष्टा ,अपनी आत्म स्वरूप की जानकारी ,मैं शरीर मात्र नहीं हूँ शांत स्वरूप ज्ञान स्वरूप आत्मा हूँ .साक्षी भाव से पार्ट बजाने आई हूँ .ख़ुशी लौटेगी .उदासी भागेगी मौन टूटेगा .मौन सिंह भी कह उठेगा -मैं रिमोट नहीं हूँ .

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  22. मुखौटे झेलना हमारी मजबूरी है और कभी कभी पहनना भी ...
    मंगल कामनाएं आपको !

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  23. कहीं सुना था मैने
    हँसने-हँसाने का नाम जिंदगी है
    तो आओ फिर जिंदगी को आवाज देकर
    कुछ मुस्‍कराहटों को इसके नाम कर दें !!!

    बहुत सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  24. जीवन के मन के विविध आयामों को खंगालती पोस्ट बेहतरीन अंदाज़ और तारतम्य लिए .जीवन के उजले पक्ष को वजन देती पोस्ट .शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का .

    उत्तर देंहटाएं
  25. जीवन मे मौन कई बार बहुत कष्टकारी होता है ..बहुत सुन्दर रचना ..

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  26. मौन का क्या है बंद पलकें हो या लाइट ऑफ फिर भी सुनाई देता है... बहुत खूबसूरत भाव

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  27. बहुत ही सुन्दर और सकारात्मक भाव लिए अभिव्यक्ति...:-)

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....