गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

चाह नहीं कुछ पाने की !!!















दर्द को कहना
उसके साथ - साथ बहना होता है
नदी की तरह
कभी शब्‍दों को शब्‍द दर शब्‍द
विष का पान कराना
जैसे अमृत हो जाना हो
फिर मुहब्‍बत का ...
...
जाने कितनी किस्‍मों में
तकसीम़ हुई वह
कभी दरिया कभी नदिया
कभी धारा कभी लहर
कभी बूंद
जब वह तेरे नयनों से बही  थी
अंतिम बार
....
यह कैसा द्वंद है
भावनाओं का  भावनाओं से
जहां अभिलाषा है
बस मिट जाने की
चाह नहीं कुछ पाने की !!!

...

36 टिप्‍पणियां:

  1. यह कैसा द्वंद है
    भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!!

    अद्धभुत अभिव्यक्ति :))

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  2. बेहद प्रभावशाली पंक्तियाँ गहन अभिव्यक्ति दी वाह क्या बात है.
    यह कैसा द्वंद है
    भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!

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  3. दर्द को कहना
    उसके साथ - साथ बहना होता है
    नदी की तरह
    कभी शब्‍दों को शब्‍द दर शब्‍द
    विष का पान कराना
    जैसे अमृत हो जाना हो
    फिर मुहब्‍बत का ...
    Behad sundar!

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  4. दर्द को कहना
    उसके साथ - साथ बहना होता है
    ..सही है।

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  5. तेरी आँखों से
    टपकी बूंद ने
    रूप धार लिया है
    धारा का
    जो बह रही हैं कहीं
    मेरे मन में
    नदिया बन कर .....

    बहुत सुंदर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  6. कैसी है ये अभिलाषा , इनके दम पर ही टिकी है यह दुनिया अब तक !

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  7. बस यही तो है दर्द की परिणति

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  8. वाह...
    दर्द को कहना
    उसके साथ - साथ बहना होता है
    नदी की तरह
    कभी शब्‍दों को शब्‍द दर शब्‍द
    विष का पान कराना
    जैसे अमृत हो जाना हो
    फिर मुहब्‍बत का ...

    बहुत सुन्दर एहसास....
    सस्नेह
    अनु

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  9. नदी की तरह
    कभी शब्‍दों को शब्‍द दर शब्‍द
    विष का पान कराना
    जैसे अमृत हो जाना हो
    फिर मुहब्‍बत का ...
    बहुत सुंदर और भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  10. नदी की तरह
    कभी शब्‍दों को शब्‍द दर शब्‍द
    विष का पान कराना
    जैसे अमृत हो जाना हो
    बहुत सुन्दर v सार्थक अभिव्यक्ति .आभार माननीय कुलाधिपति जी पहले अवलोकन तो किया होता

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  11. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  12. मुझे क्यों अज़ीज़ तर है, ये धुंआ धुंआ सा मौसम
    ये हवा-ए-शाम-हिज्र मुझे रास है तो क्यों हैं......
    ---------------------
    दमदार कलम.....

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  13. यह कैसा द्वंद है
    भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!

    Sundar Bhaavnaaayein.

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  14. बेहद उम्दा रचना अनुपम भाव संयोजन के साथ ....बहुत खूब सदा जी मज़ा आ गया आज इसे पढ़कर...

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  15. बहुत ही सुंदर भाव .....
    बधाई सदा जी ...

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  16. आपकी रचनाओं में जो मानव मन की टीस होती है वह अन्तस् को झकझोर देती है !

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  17. भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!

    बहुत सुंदर भाव, सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  18. यह कैसा द्वंद है
    भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!
    बहुत सुंदर भाव, सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  19. यह कैसा द्वंद है
    भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की,,,,भावमय बेहतरीन पंक्तियाँ,,,

    recent post: बात न करो,

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  20. यह कैसा द्वंद है
    भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!
    गहन विचारों वाली एक बेहतरीन पोस्ट

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://rohitasghorela.blogspot.in/2012/12/blog-post.html

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  21. जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!

    सुन्दर... :)

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  22. सुन्दर अभिव्यक्ति ,अंतिम पंक्तियाँ लाजवाब है -सुन्दर ,बधाई .
    मेरी नई पोस्ट "पर्यावरण-एक वसीयत " हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों में.

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  23. जाने कितनी किस्‍मों में
    तकसीम़ हुई वह
    कभी दरिया कभी नदिया
    कभी धारा कभी लहर
    कभी बूंद
    जब वह तेरे नयनों से बही थी
    अंतिम बार

    ....वाह! सभी क्षणिकाएं लाज़वाब...मन की व्यथा को बहुत ख़ूबसूरत शब्दों में पिरोया है...

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  24. जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!

    बहुत सुंदर.............

    उत्तर देंहटाएं

  25. जाने कितनी किस्‍मों में
    तकसीम़ हुई वह
    कभी दरिया कभी नदिया
    कभी धारा कभी लहर
    कभी बूंद
    जब वह तेरे नयनों से बही थी

    बहुत खूबसूरत !
    आदरणीया सदा जी

    सुंदर भाव और सुंदर शब्दों से सजी रचना है …
    बहुत खूबसूरत !
    बेहतर प्रस्तुति !

    शुभकामनाओं सहित…

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  26. भावनाओं का भावनाओं से
    जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!
    बहुत खूबसूरत सुंदर भाव, सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  27. दर्द के साथ बहुत कुछ होता है जो बह जाए तो शेष नहीं रहता कुछ भी ...
    बहुत खूब लखा है ...

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  28. जहां अभिलाषा है
    बस मिट जाने की
    चाह नहीं कुछ पाने की !!!

    सुंदर भाव सुंदर अभिव्यक्ति !!

    उत्तर देंहटाएं
  29. बहुत सुन्दर , जाने क्यूँ इसे पढते वक्त मेरे दिमाग में जगजीत जी की वो गजल बज रही थी -
    दर्द से मेरा दामन भर दे , या अल्लाह |

    सादर

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  30. बहुत ही बेहतरीन भावभीनी रचना....
    :-)

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....