मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

'मैं तो तुम्हारे पास हूँ ...'


















माँ कैसे तुम्‍हें
एक शब्‍द मान लूँ
दुनिया हो मेरी
पूरी तुम
ऑंखे खुलने से लेकर
पलकों के मुंदने तक
तुम सोचती हो
मेरे ही बारे में
हर छोटी से छोटी खुशी
समेट लेती हो
अपने ऑंचल में यूँ
जैसे खज़ाना पा लिया हो कोई
सोचती हूँ ...
यह शब्‍द दुनिया कैसे हो गया मेरी
पकड़ी थी उंगली जब
पहला कदम
उठाया था चलने को
तब भी ...
और अब भी ...मुझसे पहले
मेरी हर मुश्किल में
तुम खड़ी हो जाती हो
और मैं बेपरवाह हो
सोचती हूँ
माँ हैं न सब संभाल लेंगी .....
माँ की कलम मेरे लिए ...!!!
लगता है 
किसी मासूम बच्चे ने
मेरा आँचल पकड़ लिया हो 
जब जब मुड़के देखती हूँ
उसकी मुस्कान में 
बस एक बात होती है
'मैं भी साथ ...'
और मैं उसकी मासूमियत पर 
न्योछावर हो जाती हूँ
आशीषों से भर देती हूँ
कहती हूँ 
'मैं तो तुम्हारे पास हूँ ...'

39 टिप्‍पणियां:

  1. साथ से साथ ऐसे ही चलता जाता है कभी अंगुली कभी दामन पकडे!

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  2. माँ का प्यार अतुल्नीय होता है .. माँ को समर्पित एक बेहद प्यारी व उम्दा कविता ..जिसका कोई जवाब नही ..

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है  बेतुकी खुशियाँ

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  3. साथ साथ चलती रहे और खुशियाँ बांटती रहे सदा : बहुत सूरत रचना

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  4. माँ तो हर पल साथ रहती है ... साथ रहने की सुंदर यात्रा ।

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  5. माँ के लिए तो जितना लिखो लगता है कम है , बेहद मासूमियत से लिखी हुई उत्तम रचना |
    आज सिरहाने एक हवा आई ,
    जैसे उसकी कोई दुआ आई ,
    वो वक्त सोचता हूँ , ठहर जाता हूँ ,
    जिस वक्त मेरी जिंदगी में माँ आई |

    सादर

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  6. बहुत खूब !!
    दिल को छूती रचना !!
    शुभकामनायें !!

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  7. दिल को छूती रचना, माँ की ममता का कोई जवाब नही ..

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  8. बहुत सुंदर रचना
    जब भी बात मां की होती है तो मुनव्वर राना की दो लाइने याद आ जाती हैं

    मां मेरे गुनाहों को कुछ इस तरह से धो देती है,
    जब वो बहुत गुस्से में होती है तो रो देती हैं।।

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  9. ..ऐसी ही होती है ममता की छाँव 'माँ '!

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  10. बहुत सुंदर हृदयस्पर्शी रचना ...सदा जी ...

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  11. बहुत प्यारे रिश्ते के लिए उतने ही प्यारे भाव........

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  12. माँ है न...कितना विश्वास कितनी खुशियाँ भर देता है यह एहसास !!
    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !!

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  13. मेरी हर मुश्किल में
    तुम खड़ी हो जाती हो
    और मैं बेपरवाह हो
    सोचती हूँ
    माँ हैं न सब संभाल लेंगी ..

    माँ तब ही तो महान है

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  14. हर छोटी से छोटी खुशी
    समेट लेती हो
    अपने ऑंचल में यूँ.....
    .....................................
    बेहतरीन

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  15. माँ मे तो संसार छिपा है..सुन्दर रचना..

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  16. जब तलक बाहर से बेटा लौट कर आता नही,
    आँख चौखट पर लगाए जगा करती है वो माँ!,,,

    बहुत उम्दा,लाजबाब रचना....

    recent post: रूप संवारा नहीं,,,

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  17. सदा जी!
    कविता और उसमें माँ के प्रति व्यक्त किये तमाम जज़्बात से कौन इनकार कर सकता है.. और आपकी कविता में यह सब खुलकर स्पष्ट हुआ है..
    लेकिन कुछ संदेह आज उभर कर आये हैं.. आशा है उत्तर देंगी.. और यह प्रश्न दो कारणों से उपजा है.. पहला कविता की एक पंक्ति को रेखांकित करना (अन्य रंग से लिखा जाना).. क्या यह कविता जन्मदात्री माँ के लिए है?? यदि हाँ तो इस प्रकार रेखांकित किये जाने की आवश्यकता नहीं थी.

    और दूसरी बात जो मेरे ऊपर के ही कथन को बल देता है.. वो हैं आपकी ये पंक्तियाँ:

    पकड़ी थी उंगली जब
    पहला कदम
    उठाया था चलने को
    तब भी ...

    ऐसा क्यों कहा आपने.. ऐसा क्यों नहीं कहा कि
    जब गर्भ में आयी थी मैं/
    और तुमने सम्भाला था मुझे/
    दूसरा जन्म पाकर मुझे जन्म दिया था
    यह दुनिया देखना सिखाया था

    खैर यह तो बस एक प्रतिक्रया है मेरी.. कविता को बियोंड द कविता पढ़ने का दुस्साहस...
    :)

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    1. भाव कई रास्तों से गुजरते हैं .... माँ एक भावना,माँ एक कल्पना,माँ एक सत्य ... अपना अपना होता है . यशोदा के संग कृष्ण का गर्भ का रिश्ता नहीं था ..... बस कुछ एहसास कहकर भी अनकहे रहें तो अर्थ पाते हैं

      हटाएं
  18. माँ के प्रेम की कोई सीमा नहीं...लाज़वाब अभिव्यक्ति...

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  19. maa har samy bachche ke paas hoti hai chahe bachche usse kitane hi door kyon na ho...sundar rachna.

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  20. सदा दी बेहतरीन रचना ढेरों बधाइयाँ

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  21. प्यारी सी ... बोला एहसास लिए ... माँ का दुलार लिए ...
    ममता भरी रचना ...

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  22. बहुत ही सुन्दर पोस्ट और प्यारी सी तस्वीर भी।

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  23. माँ सा न कोई .........हर शब्द छोटा है माँ के समक्ष !!!

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  24. वाह बहुत खूब ...हर भाव को अपने ही भीतर समेटे हुए

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  25. बहुत सुंदर...
    एक मासूम कविता, ठीक उस नन्हें बच्चे की कोमल भावनाओं सी जो मां को समझता तो है पर बयां नहीं कर पाता।।।

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  26. आज तलक वह मद्धम स्वर
    कुछ याद दिलाये, कानों में !
    मीठी मीठी धुन लोरी की ,
    आज भी आये , कानों में !
    आज मुझे जब नींद ना आये, कौन सुनाये आ के गीत ?
    काश कहीं से, मना के लायें , मेरी माँ को , मेरे गीत !

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  27. माँ .....कहाँ हो ....याद आ गयी माँ की...:(

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....