दामन वफा का,
पकड़कर एक दिन,
बेवफाई ये बोली,
रिश्तों में बढ़ रहीं,
दूरियां,
आपस में तकरार,
मन में द्वेश है बस,
नहीं अब यहां,
तेरी जरूरत !
मुस्कराई वफा
बड़ी शान से
फिर भी जिंदा हूं,
मैं ईमान में,
झुकती नहीं,
डरती नहीं,
मरती नहीं,
पहचान अपनी,
खुद हूं जहान में !!
