रविवार, 24 अगस्त 2014

कुछ रिश्‍ते !!!!


कुछ रिश्‍ते
सच्‍चे होते हैं इतने कि
झूठ और फ़रेब
खुद छलनी हो जाते हैं
इनके क़रीब आकर !
  ....
कुछ रिश्‍ते
होते हैं नदी से
बहते जाने में ही
सुकू़न पाते हैं
कहाँ पथरीले रास्‍ते हैं
कहाँ समतल
उन्‍हें फ़र्क नहीं पड़ता !!
   ...
कुछ रिश्‍ते
जब नदी हो जाते हैं
तो अपनापन
समेट के ह्रदय में
निर्मलता का गुण
अपना लेते हैं जैसे माँ
या गंगा मइया !!!!


35 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ रिश्‍ते
    होते हैं नदी से
    बहते जाने में ही
    सुकू़न पाते हैं
    कहाँ पथरीले रास्‍ते हैं
    कहाँ समतल
    उन्‍हें फ़र्क नहीं पड़ता !!................ब्हुत सुन्दर !!

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  2. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 25 . 8 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  3. आप भी तो नदी सी ही है...,प्यारी कविता....

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  4. माँ सा कोई रिश्ता नही …बहुत सुन्दर रचना …।

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  5. यही रिश्ते रिश्ते होते हैं
    इनके स्नेह में प्रवाह होता है
    हर हाल में पावन

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  6. कुछ रिश्‍ते
    जब नदी हो जाते हैं
    तो अपनापन
    समेट के ह्रदय में
    निर्मलता का गुण
    अपना लेते हैं जैसे माँ
    या गंगा मइया !!!! सुंदर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

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  7. कुछ रिश्‍ते
    जब नदी हो जाते हैं
    तो अपनापन
    समेट के ह्रदय में
    निर्मलता का गुण
    अपना लेते हैं जैसे माँ
    या गंगा मइया !!!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर एवं भावपूर्ण.

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (25-08-2014) को "हमारा वज़ीफ़ा... " { चर्चामंच - 1716 } पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  10. जीवन होता है इन रिश्तों में !
    खुशनसीब होते हैं वे जो इन रिश्तों में बंधे होते हैं !
    सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  11. बहुत ही खुबसूरत चित्रण किया है रिश्तों का हार्दिक बधाई

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  12. बहुत सुंदर और कोमल भावपूर्ण रचना..

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  13. सच्चे रिश्तों को परिभाषित करती पाकीज़ा नज़्में!!

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  14. कुछ रिश्‍ते
    जब नदी हो जाते हैं
    तो अपनापन
    समेट के ह्रदय में
    निर्मलता का गुण
    अपना लेते हैं जैसे माँ
    या गंगा मइया !!!!
    बहुत सुंदर

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  15. कहा सदा जी आप ने हर रिश्ते की अपनी मर्यादा है..

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  16. तो अपनापन
    समेट के ह्रदय में
    निर्मलता का गुण
    अपना लेते हैं जैसे माँ
    या गंगा मइया !!!!
    ...बहुत सुंदर कविता।

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  17. रिश्तों की गहराई को बारीकी से उकेरा है इन पंक्तियों में ... लाजवाब ...

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  18. rishto ki bahut sunderta se kism bta di aapne....sunder rishto ki rachna

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  19. विश्वास ही तो आधार है इन सच्चे और सरल रिश्तों का।
    बहुत सुन्दर रचना ।

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....