शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

बिना किसी को खबर किये !!!!!!

रूहों को लिबास बदलना
खूब भाता है
बिना किसी गम के हँसते-हँसते
बदल लेती हैं ये बिना किसी को खबर किये
लिबास अपना
...
फिर रोकर ये बताना चाहती हैं दुनिया को
इसमें हमारी कोई रज़ा न थी
हम तो कठपुतलियाँ हैं बस
जो भी ये करिश्‍में करता है
वो ऊपरवाला है  !!!

32 टिप्‍पणियां:

  1. वाह रूह की बात कह दी आपने तो

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  2. बहुत शानदार उम्दा प्रस्तुति,,,

    मेरा दूर जिन्दगी से
    कोई सरोकार नहीं
    किसी के जिन्दगी और मौत की
    मैं जिम्मेदार नहीं
    ऐ जिन्दगी
    तेरा एतबार नहीं ,,,,,

    recent post: बसंती रंग छा गया

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  3. जिन्दगी का फलसफा बेहद उलझा है , गुथ्थियाँ सुलझती रहनी चाहिए . अच्छी कविता

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  4. इसका रहस्य तो ऊपरवाला ही जानता है ......
    ~सादर!!!

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  5. इतनी बड़ी बात इतने सरल शब्दों में ..... वाह !!!

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  6. गहन .....उत्तम अभिव्यक्ति ....!!

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  7. अभिनव शब्दों का सुन्दर संयोजन ...!!
    बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (16-02-2013) के चर्चा मंच-1157 (बिना किसी को ख़बर किये) पर भी होगी!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि किसी पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
    सूचनार्थ!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. सादर नमन ।।
    बढ़िया है -
    शुभकामनायें- ||

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    1. आती बास लिबास से, अथवा खुश्बू तेज ।

      रखती नहीं लगाव यह, क्यूँकर रखे सहेज ।

      क्यूँकर रखे सहेज, भेजिए लानत तन पर ।

      काम क्रोध मद मोह, रहा ढो कब से रविकर ।

      समझे रूह दुरूह, दिया-बाती बुझ जाती ।

      दिया लिया सब शून्य, बदल के कपड़े आती ।।

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  10. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  11. रूह तो झूट नहीं बोलती, शायद सच कह रही है . वसंत पंचमी की शुभकामनाएं
    Latest post हे माँ वीणा वादिनी शारदे !

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  12. बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!बेहतरीन अभिव्यक्ति.

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  13. इसमें हमारी कोई रज़ा न थी
    हम तो कठपुतलियाँ हैं बस

    sach to yahi hai ....!!

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  14. बहुत ही प्यारी और भावो को संजोये रचना......

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  15. सब कुछ निश्चित होता है .... हम तो निमित्त मात्र हैं ...

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  16. aarop lgana jyada aasan hota hai naa...aur khuda par to aur bi aasaan...

    http://kumarkashish.blogspot.in/2013/02/blog-post_15.html

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  17. यही विरोधाभास है ज़िन्दगी का सौगात है ,औकात है .

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  18. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  19. बिना किसी को खबर किये हम जान गवांये जाते हैं !
    जो कुछ बचा सके थे अपना तुम्हें छोड़ कर जाते हैं !

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  20. ये तो ऊपर वाला ही जाने ...वो क्या सोचता है और क्या करता है ?

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  21. करिश्मा तो ऊपर वाले का ही होता है ... रूह तो बस चलती है उसके अनुसार ...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....