मंगलवार, 22 जनवरी 2013

श्रद्धा कब तक आखिर निष्‍ठावान रहेगी ???

मौन कब तलक रहें शब्‍द
स्‍वरों की साधना  में तत्‍पर  रहते
हिफ़ाजत करते स्‍वाभिमान की
अंतस की पीड़ा को मुखर होते देख
नियमों की दहलीज़ लांघी है जब भी
विश्‍वास को दरकिनार कर
शब्‍द चीखा है अपनी पूरी ताकत से  !!!
...
पर कहाँ सुनता है कोई किसी की
सबके पास अपनी-अपनी
जोर आजमाईश के शब्‍द हैं
अपनी-अपनी मतलबपरस्‍ती है
अवसर भी अब सिर्फ बहाना ढूँढने लगे हैं
कब किसी के काम आना है
कब किसी के हाथों से फिसल जाना है
चालबाज़ी जब फितरत ही हो जाये तो
कहिये श्रद्धा कब तक आखिर निष्‍ठावान रहेगी ???
आम आदमी की
  ....
वे कहते हैं ऐसे में मौन धारण कर लो
पर मौन रहना इतना सहज़ है क्‍या
मौन के क्षणों में जब भी रहे
अंतस पर पड़े जख्‍मों की पपडि़यां
बिना खरोंचे ही उधड़ने लगीं
रक्‍त का रिसाव होता एक आह ! निकल ही जाती है
...
सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं ..
ना ही सफल वक्‍ता होना ना ही  मौन रह पाना
बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
सफलता तुम्‍हारी होगी !!!

37 टिप्‍पणियां:

  1. सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं ..
    ना ही सफल वक्‍ता होना ना ही मौन रह पाना
    बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!
    Aameen !!

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  2. सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं .. sahi kaha bahut khub ...

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  3. बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी ..

    सच है प्रयास करते रहो तो सफलता जरूर हाथ आती है ...
    प्रेरणा देती पंक्तियाँ ...

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  4. समय कहाँ निर्धारित है समझ में

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  5. वे कहते हैं ऐसे में मौन धारण कर लो
    पर मौन रहना इतना सहज़ है क्‍या.....
    .................................
    waah.... behtareen

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  6. ....
    वे कहते हैं ऐसे में मौन धारण कर लो
    पर मौन रहना इतना सहज़ है क्‍या
    मौन के क्षणों में जब भी रहे
    अंतस पर पड़े जख्‍मों की पपडि़यां
    बिना खरोंचे ही उधड़ने लगीं
    रक्‍त का रिसाव होता एक आह ! निकल ही जाती है
    सुन्दर

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  7. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरेया ||

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  8. सच कहा है आपने मौन धारण करना आसान नहीं है, मौन के क्षणों में एक -एक शब्द मुखर हो जाता है...इसलिए प्रयास का जारी रहना बहुत जरुरी है...

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  9. बिना प्रयास कुछ भी नहीं हो सकता .... बहुत सटीक और सुंदर भाव ।

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  10. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (23-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | अवश्य पधारें |
    सूचनार्थ |

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  11. सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं ..
    ना ही सफल वक्‍ता होना ना ही मौन रह पाना
    बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!
    सुन्दर अभिव्यक्ति :
    New post कुछ पता नहीं !!! ( तृतीय और अंतिम भाग )
    New post : शहीद की मज़ार से

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  12. सटीक और सुंदर प्रस्तुति बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं

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  13. बिलकुल सही कहा है..प्रयास...प्रयास ...प्रयास

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  14. पर कहाँ सुनता है कोई किसी की
    सबके पास अपनी-अपनी
    जोर आजमाईश के शब्‍द हैं
    अपनी-अपनी मतलबपरस्‍ती है
    अवसर भी अब सिर्फ बहाना ढूँढने लगे हैं
    कब किसी के काम आना है
    कब किसी के हाथों से फिसल जाना है
    चालबाज़ी जब फितरत ही हो जाये तो
    कहिये श्रद्धा कब तक आखिर निष्‍ठावान रहेगी ???
    आम आदमी की
    BEAUTIFUL LINES WITH EMOTIONS

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  15. प्रयास ज़री रहना चाहिए, सफलता तो मिलेगी ही।

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  16. बहुत उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  17. सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं ..
    ना ही सफल वक्‍ता होना ना ही मौन रह पाना
    बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!

    गहरी बात ....... ख्याल रहेगा

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  18. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    सोचने को विवश करती रचना!

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  19. बेहद सुन्दर रचना दीदी हार्दिक बधाई स्वीकारें

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  20. bahut sarthak aur sundar Rachana ...Sada , sis
    वे कहते हैं ऐसे में मौन धारण कर लो
    पर मौन रहना इतना सहज़ है क्‍या

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  21. सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं ..
    ना ही सफल वक्‍ता होना ना ही मौन रह पाना
    बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!..................aamin

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  22. सशक्त शब्द रचना के साथ गहन अभिव्यक्ति

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  23. मौन के क्षणों में जब भी रहे
    अंतस पर पड़े जख्‍मों की पपडि़यां
    बिना खरोंचे ही उधड़ने लगीं
    रक्‍त का रिसाव होता एक आह ! निकल ही जाती है

    .... बहुत सटीक और सशक्त रचना...

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  24. प्रयास ही सफलता की कुंजी है,,,अद्धभुत अभिव्यक्ति,,,सदा जी,,,

    recent post: गुलामी का असर,,,

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  25. वे कहते हैं ऐसे में मौन धारण कर लो
    पर मौन रहना इतना सहज़ है क्‍या
    मौन के क्षणों में जब भी रहे
    अंतस पर पड़े जख्‍मों की पपडि़यां
    बिना खरोंचे ही उधड़ने लगीं
    रक्‍त का रिसाव होता एक आह ! निकल ही जाती है
    ...
    सच तो यह है बिना प्रयास कुछ भी संभव नहीं ..
    ना ही सफल वक्‍ता होना ना ही मौन रह पाना
    बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!

    अद्भुत निःशब्द कराती भावनाए

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  26. बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना

    सार्थक सन्देश सीमा दीदी।
    सादर
    मधुरेश

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  27. बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!

    कोशिश बनी रहे...

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  28. जब तक श्रद्धा में निष्‍ठा रहेगी ......
    शुभकामनायें!

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  29. बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना.
    सार्थक सन्देश.

    ६४ वें गणतंत्र दिवस पर बधाइयाँ और शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  30. वे कहते हैं ऐसे में मौन धारण कर लो
    पर मौन रहना इतना सहज़ है क्‍या
    मौन के क्षणों में जब भी रहे
    अंतस पर पड़े जख्‍मों की पपडि़यां
    बिना खरोंचे ही उधड़ने लगीं
    रक्‍त का रिसाव होता एक आह ! निकल ही जाती है

    काफी सुंदर भावाभियक्ति ,,,,
    सशक्त रचना ,,,
    सादर !

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  31. मौन रहना कभी इतना सहज नहीं होता , और शायद हमेशा जरूरी भी नहीं होता |
    सुन्दर रचना |

    सादर

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  32. बस तुम प्रयासों की उँगली मत छोड़ना
    सफलता तुम्‍हारी होगी !!!

    बहुत अच्छी रचना सदा...
    सस्नेह
    अनु

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  33. सच है विन प्रयास के कुछ नही..सुन्दर रचना |

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....