गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

मुझे यकीन है ...!!!













बँटवारे की ज़मीन पर
जब भी मैने
प्रेम का बीज़ बोया
जाने क्‍यूँ
वह अंकुरित नहीं हुआ ..
बार-बार वही प्रयास
कभी बीज अंकुरित होता तो
पौधा पनप नहीं पाता
उसकी देख-रेख
करने के लिए जो परिधि निश्चित थी
उसके आगे जाने की
इज़ाजत मुझे नहीं थी ...
.............
मुझे यकीन है
मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
उनमें तेरा नाम जरूर होगा
ये बात और है
इसे पढ़ना
हम दोनो को नहीं आता ....

37 टिप्‍पणियां:

  1. परिधि के दायरे में फल फूल नहीं पाता प्रेम का पौधा ... दोनों क्षणिकएं लाजवाब

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  2. मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता ....

    वाह - क्या बात है !

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  3. हाथ के रेखाएं पढ़ी जा सकें तो जीवन कितना आसान नहीं हो जायगा ... कुछ बातें ऊपर वाले ने अपने पास रक्खी हैं ... इंसान बस तुक्के मारता रहता है ...

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  4. मुझे यकीन है
    मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता .... bahut badhiya ..bahut sahi ..

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  5. पौधे को पनपने के लिये तो खुला आकाश चाहिये होता है फिर प्रेम तो कोई बंधन नही स्वीकारता………बेहद उम्दा प्रस्तुति।

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  6. शुक्रवार के मंच पर, तव प्रस्तुति उत्कृष्ट ।

    सादर आमंत्रित करूँ, तनिक डालिए दृष्ट ।।

    charchamanch.blogspot.com

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  7. बंटवारे का दर्द उस बीज को सुखाता गया

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  8. सशक्त और प्रभावशाली रचना.....

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  9. ये लकीरें जितनी कम हों...जमीन पर या हथेली पर...जिंदगी उतनी आसन हो...

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  10. बहुत खूबसूरत एहसास.. एक पुराना शेर याद आ गया:
    अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
    मैं हूँ तेरा, तू नसीब अपना बना ले मुझको!!

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  11. या फिर जानबूझ कर पढना नहीं चाहता है.. गूढ़..किन्तु अति सुन्दर..

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  12. मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता .

    .....लकीरों की भाषा हम कहाँ समझ पाते है...दोनों ही क्षणिकाएं लाज़वाब...

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  13. काश!!! ये हाथों की लकीरें हमसे पढ़ी जाती ,
    तो शायद परिधी से बाहर भी एक नई जिन्दगी गढ़ी जाती...

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  14. बहुत ही सुन्दर भाव| धन्यवाद।

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  15. मुझे यकीन है
    मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता ....
    Bahut hee gaharee baat kah dee!

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  16. मुझे यकीन है
    मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता .... bahut hi badhiya man ko chhoone wali rachna .

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  17. खूबसूरत अह्साशों से भरी बेहतरीन कविता प्रस्तुत की है आपने

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  18. मुझे यकीन है
    मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता ....

    Wah!!! Behut sundar....Behtareen panktiyab

    http://www.poeticprakash.com/

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  19. बहुत बढ़िया,सार्थक सशक्त अच्छी रचना .....

    MY NEW POST...आज के नेता...

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  20. बेहद shashakt रचना ,भावपूर्ण बधाई

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  21. बहुत सुन्दर सदा जी...
    दोनों दिल को छू गयीं...
    सस्नेह.

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  22. laajavaab... prastuti sada ji, dono hi shranikaayen bahut hi umdaa hain.

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  23. मुझे यकीन है
    मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता .... ati sundar

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  24. सीमाओं में बँटी प्रेम भावना और विश्वास की अनपढ़ता बहुत खूबसूरती से ब्यान हुई है. सुदर.

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  25. मुझे यकीन है
    मेरी हथेली पर जितनी भी रेखाएं हैं
    उनमें तेरा नाम जरूर होगा
    ये बात और है
    इसे पढ़ना
    हम दोनो को नहीं आता ....
    bahut sunder kshanika
    badhai
    rachana

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  26. बहूत सुंदर गहरे भाव व्यक्त करती रचना है....
    बेहतरीन अभिव्यक्ती...

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  27. उसकी देख-रेख
    करने के लिए जो परिधि निश्चित थी
    उसके आगे जाने की
    इज़ाजत मुझे नहीं थी ...

    ...
    मुझे भी उससे आगे जाने की इज़ाज़त नहीं है ...कितनी अपनी से बात कही है आपने सदा जी !!

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....